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उद्यमियों को 10 दिन उद्योग बंद रख बॉयलर को बायोमास पर बदलना होगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 02:51 AM IST
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Entrepreneurs will have to change the boiler on biomass by keeping the industry closed for 10 days
पानीपत। शहर में कोयला संचालित उद्योगों पर एक अक्तूबर से ताला लगाने के लिए सीपीसीबी व सीक्यूएम (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) की टीमें फील्ड में उतरेंगी। उद्यमी कोयला संचालित उद्योगों को बचाने में सफल नहीं हो पाए हैं। एक अक्तूबर से ग्रैप के तहत कोयला संचालित उद्योगों को बंद कर दिया जाएगा। अब उद्यमियों के पास बॉयलर को बायोमास पर करने के अलावा कोई चारा नहीं है। उद्यमियों को कमीशन ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि वह उद्योगों को बंद कर बॉयलर को बायोमास पर स्थापित करें। कोयले से बायोमास पर बॉयलर को करने से लाखों का खर्च आएगा। पूरा स्ट्रक्चर दोबारा बिछाना होगा। इसमें 10 दिन तक का वक्त लगेगा। जो कंपनी बॉयलर को बायोमास पर शिफ्ट करती हैं, वो फिलहाल गुरुग्राम व फरीदाबाद में बॉयलरों पर काम करने में व्यस्त हैं। पानीपत के उद्यमियों को कंपनियां नहीं मिल रही हैं। ऐसे में यहां के उद्यमियों की समस्या अधिक बढ़ गई है। कंपनियां उद्यमियों को एक-एक माह का समय दे रही हैं।
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पानीपत में 500 उद्योग कोयला संचालित हैं। 40 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। जहां पीएनजी की पाइपलाइन नहीं बिछी है, वहां उद्यमियों को बॉयलर को पीएनजी पर शिफ्ट करने के लिए एक दिसंबर तक का वक्त मिला है। उद्यमियों को फिलहाल कोयला 14 रुपये किलोग्राम मिल रहा है। बायोमास 10 रुपये किलोग्राम तक मिलेगा, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि सभी प्रकार के उत्पादों में बायोमास कामयाब नहीं है। बायोमास में अधिकांश कोयले की तुलना में काफी कम सल्फर होता है। इसका मतलब यह है कि को-फायरिंग से सल्फर डाइऑक्साइड जैसे सल्फरस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी, जो अम्लीय वर्षा को कम करने में सहायक होगी। बायोमास से बॉयलर को उतना तापमान नहीं मिल पाता, जितना लोहे की वस्तुओं को चाहिए होता है।
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एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। कोर्ट ने एनसीआर में स्पष्ट तौर पर कोयले को बंद करने का आदेश दिया है। जब पानीपत का उद्यमियों का दल दिल्ली में सीक्यूएम के चेयरमैन एमएम कुट्टी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा तो उन्होंने उद्यमियों के सामने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर रख दिए थे। उद्यमियों को उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उनको बहुत वक्त मिल चुका है अब और वक्त नहीं मिलेगा। पर्यावरण मंत्री भी खुद को बेबस बता चुके हैं। दरअसल उद्यमी बॉयलर को बायोमास पर शिफ्ट करने के लिए 18 माह का वक्त मांग रहे थे।
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फिलहाल उद्यमियों को 14 रुपये के हिसाब से कोयला मिल रहा है। पीएनजी का रेट 48.50 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है। पीएनजी का कनेक्शन लेने पर उत्पादन तीन गुना तक महंगा होगा। उद्यमियों को अपने उत्पाद महंगे करने पड़ेंगे। ऐसे में पानीपत के उद्यमी लुधियाना और गुजरात के उद्यमियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।

उद्योग बंद हुए तो पानीपत को बड़ा नुकसान होने वाला है। सरकार से बार बार अपील के बावजूद सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया। अब सीक्यूएम ने एक अक्तूबर से उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। ये बहुत दुखदायी है। अब बॉयलर को बायोमास पर स्थापित करने में काफी खर्च आएगा। पूरा स्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा। कंपनी भी गुरुग्राम व फरीदाबाद में व्यस्त हैं। अब उनके सामने बड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। उद्यमी यहां से पलायन करने पर विचार कर रहे हैं।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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