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मशीनों के पार्टस बनाने वाले उद्यमी कर सकते हैं कोयले का इस्तेमाल
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पानीपत। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने उद्यमियों को 30 सितंबर तक पीएनजी पर आने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद कोयले के इस्तेमाल पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा लेकिन सीएक्यूएम ने मशीनों के पार्ट बनाने वाली इंडस्ट्री को कोयला इस्तेमाल करने की छूट दी है। लोहे से जुड़ी इंडस्ट्री को मेटलर्जिकल यानी धातुकर्मीय कोयले के उपयोग की अनुमति होगी, क्योंकि लोहे को पिघलाने के लिए कोयले का इस्तेमाल जरूरी है। गैस पर लोहे का इतना उच्च तापमान नहीं मिल सकता। इसलिए यह फैसला किया गया है। इसके लिए भी कुछ मानक तय किए गए हैं। ऐसे में पानीपत के 50 उद्योगों को राहत मिली है।
पानीपत में मशीनों के पार्ट बनाने वाले लगभग 50 उद्योग हैं। जैकार्ड जैसी कपड़ा बनाने वाली मशीनें भी पानीपत में बनती हैं। समालखा में कृषि उपकरण वाले लगभग 10 उद्योग हैं। इन उद्योगों में कोयला इस्तेमाल होता रहेगा। इसके लिए उद्यमियों ने आभार जताया है।
अब तक महज 20 उद्योगों में ही पीएनजी
पानीपत में लगभग 18 हजार उद्योग हैं। दो हजार उद्योग कोयला संचालित हैं। इनमें से महज 20 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। पीएनजी पर उद्योगों को शिफ्ट करने में 40-50 लाख तक का खर्च आएगा। इससे उत्पादन भी महंगा होगा। अब तक केवल सेक्टर-25 और सेक्टर-29 में ही पीएनजी की पाइपलाइन बिछाई गई है। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया, बरसत रोड और पसीना रोड में पीएनजी पाइपलाइन नहीं बिछी है। उद्यमियों का कहना है कि सरकार के पास बॉयलर को पीएनजी संचालित करने के लिए पर्याप्त बर्नर नहीं हैं। ऐसे में सभी उद्योगों को 30 सितंबर तक पीएनजी पर शिफ्ट करना संभव नहीं है। इसमें 40-50 लाख तक का खर्च आएगा। उन्होंने सरकार से इस तिथि को आगे बढ़ाने की मांग की है।
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उद्योगपति पीएनजी की बाध्यता के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। सांसद संजय भाटिया से उद्यमियों ने पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की सिफारिश भी की है लेकिन अब तक उद्यमियों को पर्यावरण मंत्री से मिलने का वक्त नहीं मिला। वे इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप चाहते हैं।
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कमीशन का फैसला व्यावहारिक
कमीशन का फैसला व्यावहारिक है। उन्होंने कमीशन के अधिकारियों को अपनी समस्याएं बताई थी। लोहे के उद्योगों में कोयले की जरूरत है। लोहे का पिघलाने के लिए जो तापमान चाहिए वो गैस या बायोमास से नहीं मिल सकता है। इसके देखते हुए कमीशन ने ये फैसला किया है।
- राजीव अग्रवाल, मशीन पार्ट्स निर्माता
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सरकार जल्द कॉमन बॉयलर के लिए जगह तलाशे
पीएनजी से उत्पादन तीन गुना तक महंगा हो जाएगा। अगर कॉमन बॉयलर मिल जाए तो उनको राहत मिलेेगी। प्रदूषण भी कम होगा। सरकार से इनकी अनुमति को मिल चुकी है लेकिन अब तक भूमि नहीं तलाशी जा चुकी है। सरकार से अपील है कि जल्द कॉमन बॉयलर के लिए भूमि तलाशें।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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पानीपत में मशीनों के पार्ट बनाने वाले लगभग 50 उद्योग हैं। जैकार्ड जैसी कपड़ा बनाने वाली मशीनें भी पानीपत में बनती हैं। समालखा में कृषि उपकरण वाले लगभग 10 उद्योग हैं। इन उद्योगों में कोयला इस्तेमाल होता रहेगा। इसके लिए उद्यमियों ने आभार जताया है।
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अब तक महज 20 उद्योगों में ही पीएनजी
पानीपत में लगभग 18 हजार उद्योग हैं। दो हजार उद्योग कोयला संचालित हैं। इनमें से महज 20 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। पीएनजी पर उद्योगों को शिफ्ट करने में 40-50 लाख तक का खर्च आएगा। इससे उत्पादन भी महंगा होगा। अब तक केवल सेक्टर-25 और सेक्टर-29 में ही पीएनजी की पाइपलाइन बिछाई गई है। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया, बरसत रोड और पसीना रोड में पीएनजी पाइपलाइन नहीं बिछी है। उद्यमियों का कहना है कि सरकार के पास बॉयलर को पीएनजी संचालित करने के लिए पर्याप्त बर्नर नहीं हैं। ऐसे में सभी उद्योगों को 30 सितंबर तक पीएनजी पर शिफ्ट करना संभव नहीं है। इसमें 40-50 लाख तक का खर्च आएगा। उन्होंने सरकार से इस तिथि को आगे बढ़ाने की मांग की है।
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उद्योगपति पीएनजी की बाध्यता के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। सांसद संजय भाटिया से उद्यमियों ने पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की सिफारिश भी की है लेकिन अब तक उद्यमियों को पर्यावरण मंत्री से मिलने का वक्त नहीं मिला। वे इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप चाहते हैं।
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कमीशन का फैसला व्यावहारिक
कमीशन का फैसला व्यावहारिक है। उन्होंने कमीशन के अधिकारियों को अपनी समस्याएं बताई थी। लोहे के उद्योगों में कोयले की जरूरत है। लोहे का पिघलाने के लिए जो तापमान चाहिए वो गैस या बायोमास से नहीं मिल सकता है। इसके देखते हुए कमीशन ने ये फैसला किया है।
- राजीव अग्रवाल, मशीन पार्ट्स निर्माता
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सरकार जल्द कॉमन बॉयलर के लिए जगह तलाशे
पीएनजी से उत्पादन तीन गुना तक महंगा हो जाएगा। अगर कॉमन बॉयलर मिल जाए तो उनको राहत मिलेेगी। प्रदूषण भी कम होगा। सरकार से इनकी अनुमति को मिल चुकी है लेकिन अब तक भूमि नहीं तलाशी जा चुकी है। सरकार से अपील है कि जल्द कॉमन बॉयलर के लिए भूमि तलाशें।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन