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भूजल दोहन कम करने, उद्यमियों को पीएनजी पर लाने के प्रयास
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पानीपत। सिटीज कपूर।
- फोटो : Panipat
पानीपत। सरकार भूजल को बचाने के लिए कड़े प्रयास कर रही है। उद्यमियों के लिए भूजल का प्रयोग करने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने उद्यमियों को अपने उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट लगाने पर 50 लाख तक की सब्सिडी देने की भी घोषणा की है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग लगातार सेमिनारों का आयोजन कर उद्यमियों को इस संबंध में जागरूक भी कर रहा है, ताकि भूजल के दोहन को बचाया जा सके।
इसके अलावा प्रदूषण स्तर को घटाने के लिए उद्यमियों से कोयले को छोड़ पीएनजी अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उद्यमियों की परेशानियों को दूर किया जा सके, इसके लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग काफी गंभीर भी है। उद्यमियों की परेशानियों को दूर करने व उद्यमियों के लिए बेहतर योजनाओं को जानने से के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की सहायक निदेशक क्षतिज कपूर ने अमर उजाला के साथ संवाद किया।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की सहायक निदेशक क्षतिज कपूर सितंबर 2017 तक कृषि विभाग में संख्यिकी सहायक के पद पर कार्यरत थीं। अक्तूबर 2018 में उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं। वे अब सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
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वह बताती हैं कि उद्यमियों की समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग गंभीर है। उद्यमियों को प्रशासन से किसी भी प्रकार की कोई एनओसी लेने में कोई दिक्कत आ रही है तो विभाग उसकी मॉनीटरिंग कर रहा है।
सभी विभागों से ये अपील की गई है कि उद्यमियों को भूजल दोहन या फायर एनओसी देने के लिए बेमतलब परेशान न किए जाए। उनके चक्कर न कटवाए जाए। उद्यमियों को पीएनजी के बारे में जागरूक किया जा रहा है क्योंकि शहर का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसलिए उद्योगों को पीएनजी पर आना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रदूषण से बचाया जा सके। इसके लिए उद्यमियों को जागरूक भी किया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु व मध्यम वर्ग के उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इसलिए इनको बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाएं भी लेकर आती है।
उद्यमियों को इनका लाभ मिले। उनके प्रयास है कि उद्यमियों को ये भी सुविधाएं दिलाई जाए। अब सरकार ने उद्यमियों को जेएडडी प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख तक की सब्सिडी देने का एलान भी किया है। इसलिए उद्यमियों को इन स्कीमों का फायदा उठाना चाहिए। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का प्रयास है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एचएसआईआईडी व एचएसवीपी के साथ तालमेल बनाकर उद्यमियों के लिए कल्याणकारी कार्य किए जाए, ताकि उद्योगों को बढ़ावा मिले। रोजगार की समस्या कम हो। देश तरक्की के रास्ते में आगे बढ़े।
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इसके अलावा प्रदूषण स्तर को घटाने के लिए उद्यमियों से कोयले को छोड़ पीएनजी अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उद्यमियों की परेशानियों को दूर किया जा सके, इसके लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग काफी गंभीर भी है। उद्यमियों की परेशानियों को दूर करने व उद्यमियों के लिए बेहतर योजनाओं को जानने से के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की सहायक निदेशक क्षतिज कपूर ने अमर उजाला के साथ संवाद किया।
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उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की सहायक निदेशक क्षतिज कपूर सितंबर 2017 तक कृषि विभाग में संख्यिकी सहायक के पद पर कार्यरत थीं। अक्तूबर 2018 में उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं। वे अब सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
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वह बताती हैं कि उद्यमियों की समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग गंभीर है। उद्यमियों को प्रशासन से किसी भी प्रकार की कोई एनओसी लेने में कोई दिक्कत आ रही है तो विभाग उसकी मॉनीटरिंग कर रहा है।
सभी विभागों से ये अपील की गई है कि उद्यमियों को भूजल दोहन या फायर एनओसी देने के लिए बेमतलब परेशान न किए जाए। उनके चक्कर न कटवाए जाए। उद्यमियों को पीएनजी के बारे में जागरूक किया जा रहा है क्योंकि शहर का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसलिए उद्योगों को पीएनजी पर आना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रदूषण से बचाया जा सके। इसके लिए उद्यमियों को जागरूक भी किया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु व मध्यम वर्ग के उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इसलिए इनको बढ़ावा देने के लिए सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाएं भी लेकर आती है।
उद्यमियों को इनका लाभ मिले। उनके प्रयास है कि उद्यमियों को ये भी सुविधाएं दिलाई जाए। अब सरकार ने उद्यमियों को जेएडडी प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख तक की सब्सिडी देने का एलान भी किया है। इसलिए उद्यमियों को इन स्कीमों का फायदा उठाना चाहिए। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का प्रयास है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एचएसआईआईडी व एचएसवीपी के साथ तालमेल बनाकर उद्यमियों के लिए कल्याणकारी कार्य किए जाए, ताकि उद्योगों को बढ़ावा मिले। रोजगार की समस्या कम हो। देश तरक्की के रास्ते में आगे बढ़े।