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Panipat News: धरती की उर्वरा शक्ति हो रही कम, किसान नैनो यूरिया और दूसरे विकल्प अपनाने लगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Feb 2024 03:15 AM IST
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Earth's fertility is decreasing, farmers start adopting nano urea and other alternatives
पानीपत। पेस्टीसाइड के अंधाधुंध प्रयोग से धरती की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है। ऐसे में प्रति एकड़ फसल का उत्पादन बेशक अच्छा मिल रहा हो, लेकिन पोषक तत्वों की भारी कमी हो रही है। कृषि विभाग भी अब किसानों को पेस्टीसाइड के कम प्रयोग करने और नैनो यूरिया का प्रयोग करने को लेकर जागरूक कर रहा है। किसानों को ड्रोन से नैनो खाद का स्प्रे करने के लिए सौ रुपये शुल्क भी लिया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का दावा है कि इससे पेस्टीसाइड से छुटकारा मिल जाएगा।
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जिले में 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। किसान प्रति एकड़ तीन से चार बैग यूरिया खाद डालते हैं। इससे धरती की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। कृषि विभाग अब किसानों को नैनो यूरिया को लेकर जागरूक कर रहा है। एक तरह से कृषि करने को हाइटेक किया जा रहा है।इसके लिए कृषि विभाग किसानों की मदद कर रहा है। यह कार्य आदमी की जगह अब ड्रोन पूरा कर रहा है। इसलिए किसानों को यूरिया के लिए भी लाइन में लगना नहीं पड़ेगा। कृषि विभाग ने नैनो यूरिया मात्र 100 रुपये के खर्च पर एक एकड़ में छिड़काव किया जा सकता है।
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14सौ एकड़ में नैनो यूरिया का छिड़काव
कृषि विभाग जिले में अब तक करीब 1400 एकड़ में नैनो यूरिया का छिड़काव कर चुका है। किसानों ने करीब चार हजार एकड़ के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। करीब 2500 एकड़ में किसान नैनो यूरिया का छिड़काव कर चुके हैं। बाकी को 20 फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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ड्रोन से छिड़काव का नहीं ले रहा विभाग शुल्क

कृषि विभाग किसानों को 220 की नैनो यूरिया की कीमत मात्र 100 रुपये में मुहैया करवा रही है। इसके साथ कृषि विभाग द्वारा ड्रोन का चार्ज किसानों ने नहीं ले रहा है। अगर यह कहे कि 100 रुपये के खर्च में एक एकड़ में नैनो यूरिया का छिड़काव हो रहा है, तो गलत नहीं होगा। हालांकि अभी सरसों की फसल तो अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन गेहूं की खेती में खाद की अभी जरूरत है।

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नैनो यूरिया छिड़काव के ये फायदे

नैनो तरल यूरिया को खेत में किसी भी कोने में ले जाना आसान है। जहां पर किसान भारी भरकम कट्टों को ढोता था, यह केवल आधा लीटर की बोतल में हैं। इसके स्प्रे से उत्पादन भी अधिक होता है। नैनो यूरिया दानेदार यूरिया से सस्ती भी है। जिससे खेती की लागत भी कम होगी। किसान फसलों में नाईट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। जो सफेद दानों के रूप में उपलब्ध थी। इसका इस्तेमाल करने से आधे से भी कम हिस्सा पौधों को मिलता था, बाकी जमीन और हवा में चला जाता था। नैना का छिड़काव होने से सभी पौधों पर इसका असर होता है। कृषि विशेषज्ञों का दावा है कि धान, आलू, गन्ना, गेहूं और सब्जियों समेत सभी फसलों पर नैनो यूरिया के अच्छे परिणाम हैं।



वर्जन :
नैनो यूरिया के प्रयोग से किसान को खर्च कम करना पड़ता है और इससे उत्पादन भी अधिक होता है। विभाग ने इस बार गेहूं के सीजन में चार हजार एकड़ में छिड़काव का लक्ष्य रखा है। इसको जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग पानीपत।
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