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‘पापा चिंता न करो, हमने जुटा लिया है अपने लिए खाना’
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समालखा। यूक्रेन से लौटने के बाद अपनी मां के साथ अंकुश
- फोटो : Panipat
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समालखा। रूस के हमले के बाद से यूक्रेन के विभिन्न शहरों में भारतीय छात्र फंस गए हैं। समालखा की तीन छात्राएं यूक्रेन के शहर उजहोड में फंसी हैं, जबकि दो छात्र शुक्रवार को घर लौटने में कामयाब रहे। यह एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए थे।
शहर की भटनागर गली निवासी मुकेश शर्मा की 21 वर्षीय बेटी किवी एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के उजहोड शहर में हैं। अभी वह द्वितीय वर्ष में हैं। किवी ने यूक्रेन से फोन पर पिता को बताया कि यूक्रेन की राजधानी कीव से उनका शहर करीब 770 किलोमीटर दूर है। शहर में शाम सात से सुबह 10 बजे तक कर्फ्यू लगा है। उन्होंने एक सप्ताह का राशन पहले जमा कर लिया है ताकि भोजन की समस्या न आए। परिजनों को बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। चिंता न करें। भारतीय दूतावास यूक्रेन में रहने वाले भारतीय का पंजीकरण कर रहा है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी उन्हें निकालने का प्रयास कर रहे हैं। पोलैंड और हंगरी के दूतावास से बात की जा रही है, जल्द ही देश लौट सकेंगे।
पिता मुकेश शर्मा ने कहा कि जब तक बेटी घर नहीं आ जाती, चिंता तो है ही। उन्होंने कहा कि सरकार वहां फंसे भारतीयों को देश लाने का प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि बेटी सहित वहां फंसे अन्य भारतीय भी जल्द ही देश लौट आएंगे।
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दो छात्राएं और फंसीं
गांव पट्टी कल्याणा के सुनील शर्मा की बेटी चेतना शर्मा और पानीपत शहर की निधि भी उजहोड यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गई थीं। चेतना शर्मा एवं निधि अंतिम वर्ष की छात्राएं हैं। सुनील शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी से फोन पर बात हो रही है। वे सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उन्हें वहां से निकालने के लिए प्रयास कर रहा हैं।
दो छात्र शुक्रवार को लौटे
समालखा शहर निवासी विकास और गांव मनाना का अंकुश वीरवार को यूक्रेन से घर लौट आए हैं। अंकुश ने बताया कि वह एमबीबीएस के लिए यूक्रेन गया था। गत 16 फरवरी को भारतीय दूतावास से मैसेज मिला कि जो भी भारत वापस जाना चाहता है, वह संपर्क करे। उसने टिकट बुक कराई और भारत पहुंचे। उसने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद वहां बेतहाशा महंगाई हो गई है। विमान कंपनियों कई गुना ज्यादा किराया वसूल रही हैं। छात्रों को आर्थिक परेशानी का सामान करना पड़ रहा है।
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शहर की भटनागर गली निवासी मुकेश शर्मा की 21 वर्षीय बेटी किवी एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के उजहोड शहर में हैं। अभी वह द्वितीय वर्ष में हैं। किवी ने यूक्रेन से फोन पर पिता को बताया कि यूक्रेन की राजधानी कीव से उनका शहर करीब 770 किलोमीटर दूर है। शहर में शाम सात से सुबह 10 बजे तक कर्फ्यू लगा है। उन्होंने एक सप्ताह का राशन पहले जमा कर लिया है ताकि भोजन की समस्या न आए। परिजनों को बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। चिंता न करें। भारतीय दूतावास यूक्रेन में रहने वाले भारतीय का पंजीकरण कर रहा है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी उन्हें निकालने का प्रयास कर रहे हैं। पोलैंड और हंगरी के दूतावास से बात की जा रही है, जल्द ही देश लौट सकेंगे।
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पिता मुकेश शर्मा ने कहा कि जब तक बेटी घर नहीं आ जाती, चिंता तो है ही। उन्होंने कहा कि सरकार वहां फंसे भारतीयों को देश लाने का प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि बेटी सहित वहां फंसे अन्य भारतीय भी जल्द ही देश लौट आएंगे।
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दो छात्राएं और फंसीं
गांव पट्टी कल्याणा के सुनील शर्मा की बेटी चेतना शर्मा और पानीपत शहर की निधि भी उजहोड यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गई थीं। चेतना शर्मा एवं निधि अंतिम वर्ष की छात्राएं हैं। सुनील शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी से फोन पर बात हो रही है। वे सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उन्हें वहां से निकालने के लिए प्रयास कर रहा हैं।
दो छात्र शुक्रवार को लौटे
समालखा शहर निवासी विकास और गांव मनाना का अंकुश वीरवार को यूक्रेन से घर लौट आए हैं। अंकुश ने बताया कि वह एमबीबीएस के लिए यूक्रेन गया था। गत 16 फरवरी को भारतीय दूतावास से मैसेज मिला कि जो भी भारत वापस जाना चाहता है, वह संपर्क करे। उसने टिकट बुक कराई और भारत पहुंचे। उसने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद वहां बेतहाशा महंगाई हो गई है। विमान कंपनियों कई गुना ज्यादा किराया वसूल रही हैं। छात्रों को आर्थिक परेशानी का सामान करना पड़ रहा है।

समालखा। वीडियो कॉल पर पिता मुकेश शर्मा से बात करते हुए छात्रा किवी- फोटो : Panipat