फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Do not be sad, even sitting at home, you can make your loved ones' ashes flow in the Gangas

ब घर बैठे अपने कर सकेंगे अपनों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jun 2021 01:24 AM IST
विज्ञापन
Do not be sad, even sitting at home, you can make your loved ones' ashes flow in the Gangas
जितेंद्र नरवाल
विज्ञापन

पानीपत। कोरोना के कारण लाखों परिवारों ने अपनों को खोया है। हिंदू रिति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद लोग अपनों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते ये संभव नहीं हो पा रहा। इन हालातों में डाक विभाग के माध्यम से ओम दिव्य दर्शन संस्था ने एक सार्थक पहल की है। इसके तहत लोग अब घर बैठे अपनों की अस्थियों का विसर्जन कर सकते हैं। इतना ही नहीं वे ऑनलाइन अस्थि विसर्जन और रिति रिवाज के अनुसार श्राद्ध की पूरी प्रक्रिया भी देख सकेंगे। इसके अलावा जिनके पास ऑनलाइन माध्यम नहीं है, उनके घर पूरी प्रक्रिया की फोटो तक भेजी जाएंगी। साथ ही अस्थि विसर्जन के बाद घर पर एक गंगा जल की बोतल पहुंचाई जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया निशुल्क है।
सबसे खास बात ये है कि ये पूरी व्यवस्था केवल देशवासियों के लिए नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे लोगों के लिए भी है। इसके लिए संस्था ने देश के उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयाग राज व बिहार के गया को चुना है। इसकी शुरुआत एनआरआई व्यापारी और ओम दिव्य दर्शन के संस्थापक अरविंद राजपूत ने की है। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए उनकी संस्था ने 270 पंडितों को नियुक्त किया है। वे रोजाना विधिपूर्वक करीब 350 तक अस्थि विसर्जन करने का काम करते हैं। हर विसर्जन के लिए दो पंडित होते हैं। एक अस्थि विसर्जन करता है तो दूसरा श्राद्ध करवाता है। इस पूरी प्रकिया को संबंधित परिवार को ऑनलाइन दिखाया जाता है। इस दौरान एक ग्रुप में 6 से 7 लोगों को अस्थि विसर्जन भी किया जा सकता है। इसके लिए किसी से कोई चार्ज नहीं लिया जाता। अगर कोई अपने मन से दान दक्षिणा देना चाहता है तो पंडितों को दे सकता है या पीएम रिलिफ फंड में जमा करवा सकता है।
विज्ञापन

कराना होगा पंजीकरण
अस्थि कलश विसर्जन के लिए परिवार के सदस्यों को पहले ओम दिव्य दर्शन के पोर्टल htpp://omdivysdarshan.org पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यहीं से आपको चैट या फोन नंबर से संपर्क सूत्र भी मिल जाएगा। अब कलश में अस्थियों को डालकर इसे अच्छे तरीके से कवर करना होगा। इसके बाद इसे डाकघर के माध्यम से संबंधित जगह (हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज और गया) भेजना होगा। इस पर अपने नाम, पते, मोबाइल नंबर के साथ ओम दिव्य दर्शन भी लिखना होगा। इसे डाक विभाग संबंधित जगह के ओम दिव्य दर्शन संस्था के पदाधिकारियों तक पहुंचाएगा। यहां विधि पूर्वक इन अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोरोना महामारी को देखते हुए आया ख्याल : राजपूत
मूल रूप से यूपी के मथुरा के रहने वाले एनआरआई अरविंद राजपूत ने बताया कि वे पिछले 22 सालों से सिंगापुर में रह रहे हैं, वहीं उनका व्यापार है। वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। कोरोना वैश्विक महामारी में लोगों को अपनों को खोते हुए और उनका संस्कार तक कर पाने को देखा तो उनके मन में ख्याल आया कि एक ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे लोग घर बैठे ही अपनों का अंतिम संस्कार कर सकें और इसे देख भी सकें। इसी सोच के लिए चलते ये विकल्प चुना। आज देश भर से रोजाना हजारों फोन आते हैं। रोजाना सैकड़ों अस्थियों के कलश आते हैं, जिनको विधि पूर्वक पंडित विसर्जन और श्राद्ध करवाने का काम करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed