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मानी नहीं हार... किया अभ्यास और जीता रजत पदक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 01:35 AM IST
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Didn't give up... did practice and won silver medal
पानीपत। वर्षा के साथ अन्य। - फोटो : Panipat
पानीपत। स्कूली दौड़ प्रतियोगिता में कभी अध्यापक ने धावक वर्षा पालीवाल को बाहर का रास्ता दिखा दिया था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनके दृढ़ संकल्प का नतीजा यह रहा कि उन्होंने अब मंगलवार को ओडिशा में आयोजित इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया है। अब बुधवार को वह पांच हजार मीटर दौड़ स्पर्धा में भी अपना दमखम दिखाएंगी।
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जाटल के बड़ौली गांव की रहने वाली वर्षा ने बताया कि स्कूल में दौड़ प्रतिस्पर्धा में जब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया तो वह थोड़ी मायूस हो गई थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने अपने गांव के पास जाटल स्टेडियम में रोज दौड़ लगाना शुरू किया। करीब पांच वर्ष की मेहनत अब रंग ला रही है। उन्होंने ओडिशा में आयोजित इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में एथलीट के तौर पर 1500 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया। वर्षा के चाचा सतीश पालीवाल ने बताया कि यह पदक वर्षा की मेहनत का नतीजा है।
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वर्षा अब बुधवार को पांच हजार मीटर दौड़ प्रतियोगिता में दमखम दिखाएंगी। उनके कोच रवि ने बताया कि वह अभ्यास के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। समय से पहले स्टेडियम ग्राउंड में जाकर अभ्यास करना शुरू कर देती हैं। वर्षा का लक्ष्य है कि वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाए। उनके चाचा सतीश ने बताया कि कई बार नेशनल में चयन होने के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उनका नाम नहीं आता था लेकिन उसने मेहनत कम नहीं की। राज्य एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव राजकुमार मिटान ने सहयोग किया और सही मार्गदर्शन दिया।
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आर्थिक तंगी होने के बाद भी पिता ने दिया साथ
वर्षा के चाचा सतीश ने बताया कि उसके पिता मुकेश कुमार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसके बाद भी उन्होंने बेटी को हमेशा खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। पिता ने कहा कि उनकी बेटी नेशनल और इंटरनेशनल में स्वर्ण पदक लाए, यही उनका सपना है।
उपलब्धियां :
- मेरठ में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक
- संगरूर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता कांस्य पदक
- राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण पदक
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