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Panipat News: डेंगू की रफ्तार थमी, एक सप्ताह में मिले तीन केस
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पानीपत। इस साल डेंगू के डंक ने शहर को बहुत परेशान किया। अब ठंड ने डेंगू के डंक पर वार किया है। ठंड से डेंगू की रफ्तार रुक गई है। पिछले एक सप्ताह में डेंगू के महज तीन केस मिले हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। फिलहाल जिले में डेंगू के सभी मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं। इस साल डेंगू का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत रहा।
2017 के बाद इस साल सबसे ज्यादा डेंगू के 353 केस मिले। इससे पहले 2017 में डेंगू के 469 केस मिले थे। 2019 में सबसे कम महज 12 केस मिले थे। जिले में पिछले सात साल में 1821 केस मिल चुके हैं। इस साल मिले 353 केस में से 39 केस दूसरे जिलों के हैं। इस साल अब तक पांच साल के छह बच्चे डेंगू का शिकार हुए हैं। इस साल अबतक 196 पुरुष व 157 महिलाएं डेंगू का शिकार हुई है। जिले में इस साल अब तक 12 हजार घरों में डेंगू का लार्वा मिल चुका है। इसको स्वास्थ्य विभाग ने नष्ट किया है। अब तक 4800 लोगों को लार्वा मिलने पर नोटिस जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की 100 टीमों ने अब तक 5.10 लाख घरों में लार्वा की जांच की है।
बॉक्स
इस साल डेंगू केस बढ़ने के कारण
सरकार ने डेंगू पर रोकथाम की जिम्मेदारी नगर निगम, पंचायती राज विभाग व स्वास्थ्य विभाग को सौंपी थी। इस बाद नगर निगम व पंचायती राज विभाग को खुद दवा खरीदकर अपनी मशीनों से फॉगिंग करनी थी लेकिन दोनों विभागों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बरसात में खाली प्लॉटों में पानी भरा रहा। इसमें डेंगू का लार्वा उत्पन्न हुआ और शहर डेंगू की चपेट में आ गया। जिले में जहां डेंगू के केस मिल रहे हैं वहां स्वास्थ्य विभाग खुद फॉगिंग करवा रहा है।
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साल- केस
2017 469
2018 134
2019 12
2020 272
2021 287
2022 296
2023 354
वर्जन-
100 टीमें अब भी डेंगू के खिलाफ कर रहीं काम
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर गंभीर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जो जिम्मेदारी थी। उनको बखूबी पूरा किया गया है। लोगों को डेंगू के खिलाफ जागरूक करने के लिए स्कूलों व कॉलेज में कैंप भी लगाए गए। अप्रैल के बाद से ही जिले में एंटी लार्वा एक्टिविटी चल रही है। 100 टीमें अब भी डेंगू के खिलाफ काम कर रही हैं। अब ठंड बढ़ने से डेंगू का खतरा कम हुआ है लेकिन इसके खिलाफ जागरूकता जरूरी है।
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2017 के बाद इस साल सबसे ज्यादा डेंगू के 353 केस मिले। इससे पहले 2017 में डेंगू के 469 केस मिले थे। 2019 में सबसे कम महज 12 केस मिले थे। जिले में पिछले सात साल में 1821 केस मिल चुके हैं। इस साल मिले 353 केस में से 39 केस दूसरे जिलों के हैं। इस साल अब तक पांच साल के छह बच्चे डेंगू का शिकार हुए हैं। इस साल अबतक 196 पुरुष व 157 महिलाएं डेंगू का शिकार हुई है। जिले में इस साल अब तक 12 हजार घरों में डेंगू का लार्वा मिल चुका है। इसको स्वास्थ्य विभाग ने नष्ट किया है। अब तक 4800 लोगों को लार्वा मिलने पर नोटिस जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की 100 टीमों ने अब तक 5.10 लाख घरों में लार्वा की जांच की है।
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इस साल डेंगू केस बढ़ने के कारण
सरकार ने डेंगू पर रोकथाम की जिम्मेदारी नगर निगम, पंचायती राज विभाग व स्वास्थ्य विभाग को सौंपी थी। इस बाद नगर निगम व पंचायती राज विभाग को खुद दवा खरीदकर अपनी मशीनों से फॉगिंग करनी थी लेकिन दोनों विभागों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बरसात में खाली प्लॉटों में पानी भरा रहा। इसमें डेंगू का लार्वा उत्पन्न हुआ और शहर डेंगू की चपेट में आ गया। जिले में जहां डेंगू के केस मिल रहे हैं वहां स्वास्थ्य विभाग खुद फॉगिंग करवा रहा है।
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साल- केस
2017 469
2018 134
2019 12
2020 272
2021 287
2022 296
2023 354
वर्जन-
100 टीमें अब भी डेंगू के खिलाफ कर रहीं काम
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर गंभीर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जो जिम्मेदारी थी। उनको बखूबी पूरा किया गया है। लोगों को डेंगू के खिलाफ जागरूक करने के लिए स्कूलों व कॉलेज में कैंप भी लगाए गए। अप्रैल के बाद से ही जिले में एंटी लार्वा एक्टिविटी चल रही है। 100 टीमें अब भी डेंगू के खिलाफ काम कर रही हैं। अब ठंड बढ़ने से डेंगू का खतरा कम हुआ है लेकिन इसके खिलाफ जागरूकता जरूरी है।