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जल्दबाजी में लिया गया निर्णय स्थायी फल नहीं देता : अरुण मुनि
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अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में शनिवार को जैन मुनि अरुण के साथ उनके शिष्य अभिषेक मुनि व अभिनंदन मुनि ने प्रवचन किए। अरुण मुनि ने कहा कि महावीर परमात्मा ने एकाग्रता और मनोयोगपूर्वक साधना की महत्ता बताई है। एक समय में केवल एक कार्य पर केंद्रित रहो। जब कार्य निष्ठा और ईमानदारी से किया जाता है तो सफलता स्वयं आपके द्वार पर आकर खड़ी हो जाती है। जीवन हो, कारोबार हो या साधना एक ही समय में एक ही मार्ग पर चलना चाहिए। आधे मन से किया गया काम, जल्दबाजी में लिया गया निर्णय या बिना निष्ठा से किया गया प्रयास कभी स्थायी फल नहीं देता।
कार्य हो या व्यापार उसमें गुणवत्ता अनिवार्य है। माला और नोट दोनों उंगलियों से गिने जाते हैं लेकिन माला का महत्व तभी है जब वह मन की शुद्धि और आत्मा की उन्नति के लिए हो। यदि माला केवल हाथ की आदत बन जाए और मन कहीं और भटके तो उसका कोई महत्व नहीं। माला श्रद्धा, निष्ठा और मुक्ति की भावना के साथ ही फेरें।
अनुचित व्यवहार से बिगड़ती है साख : रोहित मुनि
राजाखेड़ी गांव में रोहित मुनि व श्रेयांश मुनि ने प्रवचन दिए। रोहित मुनि ने बताया कि अनुचित व्यवहार से साख और कामुकता से इज्जत बिगड़ती है। इसी कामुकता वश रावण ने कुल घात करवाया था। स्वस्थ जीवन जीने के लिए रोजाना हल्का भोजन करना चाहिए। जर्दा, गुटका खाकर दीवारों को, बीड़ी सिगरेट से फेफड़ों को, फैशन से कपड़ों को, कड़वे बोल से जुबान को, बेवकूफ बनकर जीवन को, कृत्रिम चीजों से असलियत को, नाइंसाफी से व्यवहार को और बुरी संगत करके चरित्र को मत बिगाड़ो। अनियंत्रित दिनचर्या से जीवन बिगड़ता है। इसलिए धन के बजाए तन से प्यार करो और धर्म की शरण में आकर जीवन सफल बनाओ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में शनिवार को जैन मुनि अरुण के साथ उनके शिष्य अभिषेक मुनि व अभिनंदन मुनि ने प्रवचन किए। अरुण मुनि ने कहा कि महावीर परमात्मा ने एकाग्रता और मनोयोगपूर्वक साधना की महत्ता बताई है। एक समय में केवल एक कार्य पर केंद्रित रहो। जब कार्य निष्ठा और ईमानदारी से किया जाता है तो सफलता स्वयं आपके द्वार पर आकर खड़ी हो जाती है। जीवन हो, कारोबार हो या साधना एक ही समय में एक ही मार्ग पर चलना चाहिए। आधे मन से किया गया काम, जल्दबाजी में लिया गया निर्णय या बिना निष्ठा से किया गया प्रयास कभी स्थायी फल नहीं देता।
कार्य हो या व्यापार उसमें गुणवत्ता अनिवार्य है। माला और नोट दोनों उंगलियों से गिने जाते हैं लेकिन माला का महत्व तभी है जब वह मन की शुद्धि और आत्मा की उन्नति के लिए हो। यदि माला केवल हाथ की आदत बन जाए और मन कहीं और भटके तो उसका कोई महत्व नहीं। माला श्रद्धा, निष्ठा और मुक्ति की भावना के साथ ही फेरें।
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अनुचित व्यवहार से बिगड़ती है साख : रोहित मुनि
राजाखेड़ी गांव में रोहित मुनि व श्रेयांश मुनि ने प्रवचन दिए। रोहित मुनि ने बताया कि अनुचित व्यवहार से साख और कामुकता से इज्जत बिगड़ती है। इसी कामुकता वश रावण ने कुल घात करवाया था। स्वस्थ जीवन जीने के लिए रोजाना हल्का भोजन करना चाहिए। जर्दा, गुटका खाकर दीवारों को, बीड़ी सिगरेट से फेफड़ों को, फैशन से कपड़ों को, कड़वे बोल से जुबान को, बेवकूफ बनकर जीवन को, कृत्रिम चीजों से असलियत को, नाइंसाफी से व्यवहार को और बुरी संगत करके चरित्र को मत बिगाड़ो। अनियंत्रित दिनचर्या से जीवन बिगड़ता है। इसलिए धन के बजाए तन से प्यार करो और धर्म की शरण में आकर जीवन सफल बनाओ।
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