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डीसी ऑफिस में डेरा डालेगी यूनियन
अमर उजाला, पानीपत
Updated Thu, 02 Jan 2014 11:40 PM IST
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पानीपत। सीटू और खेत मजदूर यूनियन ने संयुक्त रूप से मजदूरों की मांगाें के लिए 29 और 30 जनवरी के डीसी कार्यालय के सामने पड़ाव डालने की योजना बनाई।
सीटू और खेत मजदूर यूनियन की संयुक्त बैठक वीरवार को शिव वर्मा स्मारक भवन में हुई।
इसकी अध्यक्षता सिटी जिला प्रधान सुनील दत्त ने की। जिला सचिव आनंद ज्वाहरा और सह सचिव जयभगवान ने कहा कि मजदूराें की समस्याओं को लेकर 29 और 30 जनवरी को डीसी ऑफिस के सामने पड़ाव डाला जाएगा। सरकार की दमनकारी नीतियाें के कारण मजदूर दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी तरस रहे हैं।
सीटू की मांग है न्यूनतम वेतन की तुरंत पालना की जाए, मनरेगा योजना को शहरी इलाकों में भी लागू किया जाए। सभी गांव में सौ-सौ गज के प्लाट उपलब्ध कराए जाएं, मजदूरों को दो रुपये प्रति किलो गेहूं, तीन रुपये प्रति किलो चावल और दाल दी जाए।
इसके अलावा आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील ओर आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। उन्हाेंने मजदूराें का आह्वान किया कि मांगों को लागू कराने के लिए सभी एकत्रित हो जाएं।
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कैत गांव में डिपो की सप्लाई बंद
पानीपत। खाद्य और आपूर्ति विभाग ने गांव कैत के डिपो की राशन सप्लाई बंद कर दी है। विभागीय अधिकारी दिनभर डिपो संचालक के पास रखे राशन और उसके दस्तावेजों की जांच पड़ताल में लगे रहे। विभाग ने यह कदम ग्रामीणाें की शिकायत पर उठाया है।
डीसी के आदेशों के बाद डीएफएसई ने क्षेत्र के गांव कैत के राशन डिपो की राशन की सप्लाई बंद कर दी। विभागीय अधिकारी डीसी ऑफिस से आदेश मिलने के तुरंत बाद डिपो संचालक और ग्रामीणों की शिकायत से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने में लग गए।
ज्ञात हो कि गांव कैत स्थित एससी बस्ती के ग्रामीणों ने 31 दिसंबर को एडीसी को शिकायत दी थी कि उन्हें का डिपो संचालक घटिया राशन देता है। उनका कहना था कि यह राशन इंसान तो क्या पशु भी नहीं खा सकते।
ग्रामीण सतीश कुमार, रामफल, पवन कुमार, नरेंद्र, जोगेंद्र, धर्मबीर और पूर्ण ने एडीसी को दी शिकायत में बताया था कि वे बीपीएल परिवारों की सूची में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि डिपो संचालक बीपीएल परिवारों को बहुत ही घटिया गेहूं दे रहा है। कोई ग्रामीण मजबूरीवश इस अनाज का प्रयोग कर लेगा तो वह बीमार हो जाएगा।
ग्रामीणों ने एडीसी को दी शिकायत में मांग की थी कि डिपो संचालक की ओर से की जा रही गड़बड़ी की जांच की जाए। जो राशन बीपीएल परिवारों को दिया जा रहा है, उसकी लैब में जांच की जाए। प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएफएससी को कार्रवाई के आदेश दिए।
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सीटू और खेत मजदूर यूनियन की संयुक्त बैठक वीरवार को शिव वर्मा स्मारक भवन में हुई।
इसकी अध्यक्षता सिटी जिला प्रधान सुनील दत्त ने की। जिला सचिव आनंद ज्वाहरा और सह सचिव जयभगवान ने कहा कि मजदूराें की समस्याओं को लेकर 29 और 30 जनवरी को डीसी ऑफिस के सामने पड़ाव डाला जाएगा। सरकार की दमनकारी नीतियाें के कारण मजदूर दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी तरस रहे हैं।
सीटू की मांग है न्यूनतम वेतन की तुरंत पालना की जाए, मनरेगा योजना को शहरी इलाकों में भी लागू किया जाए। सभी गांव में सौ-सौ गज के प्लाट उपलब्ध कराए जाएं, मजदूरों को दो रुपये प्रति किलो गेहूं, तीन रुपये प्रति किलो चावल और दाल दी जाए।
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इसके अलावा आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील ओर आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। उन्हाेंने मजदूराें का आह्वान किया कि मांगों को लागू कराने के लिए सभी एकत्रित हो जाएं।
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कैत गांव में डिपो की सप्लाई बंद
पानीपत। खाद्य और आपूर्ति विभाग ने गांव कैत के डिपो की राशन सप्लाई बंद कर दी है। विभागीय अधिकारी दिनभर डिपो संचालक के पास रखे राशन और उसके दस्तावेजों की जांच पड़ताल में लगे रहे। विभाग ने यह कदम ग्रामीणाें की शिकायत पर उठाया है।
डीसी के आदेशों के बाद डीएफएसई ने क्षेत्र के गांव कैत के राशन डिपो की राशन की सप्लाई बंद कर दी। विभागीय अधिकारी डीसी ऑफिस से आदेश मिलने के तुरंत बाद डिपो संचालक और ग्रामीणों की शिकायत से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने में लग गए।
ज्ञात हो कि गांव कैत स्थित एससी बस्ती के ग्रामीणों ने 31 दिसंबर को एडीसी को शिकायत दी थी कि उन्हें का डिपो संचालक घटिया राशन देता है। उनका कहना था कि यह राशन इंसान तो क्या पशु भी नहीं खा सकते।
ग्रामीण सतीश कुमार, रामफल, पवन कुमार, नरेंद्र, जोगेंद्र, धर्मबीर और पूर्ण ने एडीसी को दी शिकायत में बताया था कि वे बीपीएल परिवारों की सूची में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि डिपो संचालक बीपीएल परिवारों को बहुत ही घटिया गेहूं दे रहा है। कोई ग्रामीण मजबूरीवश इस अनाज का प्रयोग कर लेगा तो वह बीमार हो जाएगा।
ग्रामीणों ने एडीसी को दी शिकायत में मांग की थी कि डिपो संचालक की ओर से की जा रही गड़बड़ी की जांच की जाए। जो राशन बीपीएल परिवारों को दिया जा रहा है, उसकी लैब में जांच की जाए। प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएफएससी को कार्रवाई के आदेश दिए।