{"_id":"60788e3b8ebc3ec89b7f7780","slug":"d-panipat-news-knl67351180","type":"story","status":"publish","title_hn":"रमजान के पहला जुमा आज, अकीदतमंद अदा करेंगे नमाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रमजान के पहला जुमा आज, अकीदतमंद अदा करेंगे नमाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माह ए रमजान के पहले जुमे की नमाज आज अदा की जाएगी। नमाज पर पिछले साल की तरह ही इस साल भी कोरोना का साया है। पहले जुमे की नमाज महिलाएं घर पर और पुरुष मस्जिदों में पढ़ेंगे। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से कोरोना महामारी को देखते हुए समुदाय के लोगों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए नमाज अदा करने की अपील की गई है। कलंदर पीर में दोपहर डेढ़, सनौली रोड मस्जिद में दोपहर पौने दो बजे और सिविल अस्पताल परिसर मस्जिद में सवा एक बजे नमाज अदा की जाएगी।
रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए मुकद्दस महीना है और उस पर जुमे की नमाज खास महत्व रखती है। आमतौर पर भी जो रोज नमाज नहीं अदा कर पाते हैं, वे जुमे की नमाज जरूर अदा करते हैं। जो अकीदतमंद रोज रोजा नहीं रख सकते हैं, वह जुमे के दिन रोजा रखते हैं। यह दिन बहुत खास और पाक है। वकील इरफान खान ने बताया कि जुमे के दिन सभी नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में जाते हैं। एक महीने में चार जुमा होते हैं, पहला, दूसरा, मंझला और अलविदा जुमा।
कलंदर पीर के सुफी सैयद एजाज अहमद हासमी ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर में चांद की तारीख के अनुसार त्योहारों की तारीख तय की जाती है। यही कारण है कि रमजान का महीना हर साल अलग-अलग तारीखों पर शुरू होता है। इस पूरे महीने में लोग अल सुबह उठकर सहरी करते हैं और नमाज अदा करने के बार रोजा रखते हैं। शाम को इफ्तारी के साथ रोजा समाप्त किया जाता है।
विज्ञापन
नौ साल की मारिया ने रखा पहला रोजा
नौ साल की मारिया ने भी अपने माता-पिता के साथ अपना पहला रोजा रखा है। मारिया चौथी कक्षा में पढ़ती हैं। मारिया ने कहा कि सबसे बड़ा काम अल्लाह की इबादत करना है। रमजान के महीने में अपने माता-पिता के साथ सुबह चार बजे उठकर सहरी में भाग लेती हैं, जिसके बाद पूरा दिन रोजा रखती हैं।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए समुदाय से अपील है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करें। घर पर रहकर नमाज अदा करें। मस्जिद में नमाज अदा करें तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और मास्क जरूर लगाएं।
-सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय
सहरी और इफ्तार का वक्त
इफ्तार : शुक्रवार की शाम 6:51
सहरी : शनिवार की सुबह 4:27
विज्ञापन
रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए मुकद्दस महीना है और उस पर जुमे की नमाज खास महत्व रखती है। आमतौर पर भी जो रोज नमाज नहीं अदा कर पाते हैं, वे जुमे की नमाज जरूर अदा करते हैं। जो अकीदतमंद रोज रोजा नहीं रख सकते हैं, वह जुमे के दिन रोजा रखते हैं। यह दिन बहुत खास और पाक है। वकील इरफान खान ने बताया कि जुमे के दिन सभी नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में जाते हैं। एक महीने में चार जुमा होते हैं, पहला, दूसरा, मंझला और अलविदा जुमा।
विज्ञापन
कलंदर पीर के सुफी सैयद एजाज अहमद हासमी ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर में चांद की तारीख के अनुसार त्योहारों की तारीख तय की जाती है। यही कारण है कि रमजान का महीना हर साल अलग-अलग तारीखों पर शुरू होता है। इस पूरे महीने में लोग अल सुबह उठकर सहरी करते हैं और नमाज अदा करने के बार रोजा रखते हैं। शाम को इफ्तारी के साथ रोजा समाप्त किया जाता है।
विज्ञापन
नौ साल की मारिया ने रखा पहला रोजा
नौ साल की मारिया ने भी अपने माता-पिता के साथ अपना पहला रोजा रखा है। मारिया चौथी कक्षा में पढ़ती हैं। मारिया ने कहा कि सबसे बड़ा काम अल्लाह की इबादत करना है। रमजान के महीने में अपने माता-पिता के साथ सुबह चार बजे उठकर सहरी में भाग लेती हैं, जिसके बाद पूरा दिन रोजा रखती हैं।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए समुदाय से अपील है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करें। घर पर रहकर नमाज अदा करें। मस्जिद में नमाज अदा करें तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और मास्क जरूर लगाएं।
-सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय
सहरी और इफ्तार का वक्त
इफ्तार : शुक्रवार की शाम 6:51
सहरी : शनिवार की सुबह 4:27