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मैं जीना चाहता था पर पत्नी ने जीने नहीं दिया, सुसाइड नोट लिख खाया जहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Apr 2021 12:28 AM IST
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भाई मैं जीना चाहता था पर समाज में बदनामी इतनी हुई कि सहन नहीं कर सका। आरती जीने नहीं दे रही है, इसलिए मजबूरन जान देनी पड़ रही है। सुसाइड नोट में यह लिखकर गांव बिहोली निवासी अनिल (28) ने बुधवार रात नौ बजे जहर खाकर आत्महत्या कर ली। जहर खाने से पहले बड़े भाई मंजीत को कॉल किया और आत्महत्या करने की बात बताई। साथ ही कहा कि वह गोहाना रोड फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग में है। करीब रात 10 बजे मंजीत छोटे भाई अनिल की कार को खोजता हुआ पार्किंग में पहुंचा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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गांव बिहोली निवासी बड़े भाई मंजीत ने बताया कि अनिल की नौ साल पहले गांव निंबरी निवासी आरती से शादी हुई थी। पिछले तीन साल से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। अनिल ड्राइवर था और अपनी इको कार चलता था। बुधवार को पत्नी आरती के साथ झगड़ा होने के बाद शाम चार बजे बड़ी बेटी अंशू (8), बेटे वंश (5) और यश (3) को कार में बैठाया और चला गया।
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तीनों बच्चों को कोल्ड ड्रिंक पिलाने और शहर घुमाने की बात कहकर ले गया था, वह अक्सर बच्चों को इस तरह घुमाने ले जाता था। आखिरी बार तीनों बच्चों को तभी देखा गया था। शाम साढ़े सात बजे तक भी नहीं लौटा तो अनिल को कॉल किया, लेकिन उसका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद रात नौ बजे अनिल का कॉल आया और आत्महत्या करने की बात कहकर कॉल काट दी। पहले लगा कि अनिल मजाक कर रहा है, लेकिन गांव बिहोली के रहने वाले और गोहाना रोड पर सिक्योरिटी में काम करने वाले अक्षय और अमित को पार्किंग में भेजा, उन्होंने बताया कि अनिल बेसुध पड़ा है, जिसके बाद वह गांव से रात 10 बजे गोहाना रोड पार्किंग में पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बताया कि अनिल की मौत हो चुकी है। परिवार के लोगों ने अनिल की पत्नी पर किसी अन्य युवक से संबंध रखने का आरोप भी लगाया है।
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बच्चों को खोजा पर नहीं मिले
मंजीत ने बताया कि भतीजी अंशू और भतीजा वंश तथा यश का कोई पता नहीं है। वे कार में नहीं थे और आसपास भी खोजा, लेकिन वे नहीं मिले। परिवार को उनकी चिंता है। अंशू तीसरी कक्षा में पढ़ती है, जबकि वंश पहली और यश प्री नर्सरी में पढ़ता है।
10 बार हुई पंचायत, नहीं मानी तो बेटे समेत पुत्रवधू को कर दिया था बेदखल
मंजीत ने बताया कि वह पानीपत कोर्ट में एक वकील का मुंशी है। उसके पिता जयचंद पीडब्ल्यूडी से चौकीदार के पद से रिटायर्ड हैं। पिता जयचंद ने बताया कि पुत्रवधू के झगड़ों से वह परेशान हो चुके थे। बार-बार झगड़ा कर मायके चली जाती थी। दोनों पक्षों की करीब 10 बार पंचायत हुई, लेकिन पुत्रवधू आरती नहीं मानी। वह अपनी मनमर्जी करती रही। अंत में उन्होंने बेटे अनिल और बहू को बेदखल कर दिया था।
थाने में मारपीट की शिकायत दी, मकान बनाकर देने पर हुआ समझौता
पिता जयचंद ने बताया कि तीन साल पहले उसने हरि सिंह चौक पर एक मकान लिया था। उस समय अनिल और आरती बच्चों के साथ गांव में रहते थे। आरती ने शहर में रहने की जिद की तो अनिल परिवार समेत हरि सिंह कॉलोनी में लिए गए मकान में शिफ्ट हो गया, जहां उनका विवाद बढ़ता गया। एक साल पहले आरती ने थाना किला में उनके और अनिल के खिलाफ मारपीट करने की शिकायत दी थी। तब समझौता हुआ कि वह बेटे अनिल को गांव में मकान बनाकर देगा।
साले और पत्नी के प्रेमी की धमकी से डरकर गांव में आकर रहने लगा था अनिल : मंजीत
भाई मंजीत ने बताया कि अनिल को उसके साले संदीप, सतीश, सास सुनीता, पत्नी आरती, पत्नी का प्रेमी साहिल जान से मारने की धमकी देते थे। उससे प्रॉपर्टी अपने नाम कराना चाहते थे। न करने पर उसके और परिवार को गोली मरवाने की धमकी देते थे। जिस वजह से वह परेशान हो चुका था। तीन माह पहले वह गांव बिहोली में बने नए मकान में परिवार समेत आकर रहने लगा था।
अनिल का सुसाइड नोट
मैं अनिल कुमार गांव बिहोली, मेरे और घर वाली का झगड़ा होता है। मैं जीना चाहता था, हालात ऐसे हुए कि मेरी बदनामी हुई, मैं जीना नहीं चाहता। मेरे बच्चे अंशू, वंश, यश हैं। आरती तूने इतना मजबूर किया कि मैं अपनी जान गंवा रहा हूं। इतना समझाने के बाद भी नहीं मानी। तुझे छोड़कर मैं जा रहा हूं। तू खुशी से रहना। इसका फोन (पत्नी का मोबाइल नंबर लिखा है) सच्चाई बताएगा, मेरी गलती थी या मेरी घरवाली की। इस नंबर (एक और मोबाइल नंबर लिखा है) की कॉल डिटेल निकालने पर सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। अगर मेरे ससुर आ जाते तो शायद मैं खुदकुशी नहीं करता। भाई मैं जीना चाहता था समाज में। आरती, किसी का कसूर नहीं है, सब तेरा है। तूने इतना मजबूर कर दिया कि अपनी जान देनी पड़ी।

पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मृतक की भाई की शिकायत पर पत्नी, दो साले, सास और साहिल के खिलाफ 306, 365 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है, बच्चों की तलाश जारी है।
- प्रदीप कुमार, डीएसपी, पानीपत
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