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कोविड-19 में सैनिटाइजर छिड़काव के लिए किराए पर लिए ट्रैक्टर और मशीनों के रेट को लेकर विजिलेंस ने मांगा निगम से जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2020 12:14 AM IST
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कोविड-19 के दौरान नगर निगम द्वारा शहरभर में किए गए सैनिटाइजर छिड़काव के लिए किराए पर लिए ट्रैक्टर व मशीनों के रेट की जांच एक बार फिर खुल गई है। इसमें निगम के कई अधिकारी अपना जवाब दायक कर चुके हैं, बाकी अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। इसकी जांच अब खुद मुख्यालय अकाउंट विजिलेंस देख रही है।
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बता दें कि सैनिटाइज छिड़ाव के लिए किराए पर लिए संसाधनों के निगम अधिकारियों ने रेट ज्यादा बना दिए थे। इस काम की पेमेंट होने से पहले ही निगम में भ्रष्टाचार का मुद्दा गूंज गया। इसकी आवाज मुख्यालय तक गई। गृह मंत्री अनिल विज ने इसकी जांच करने के आदेश भी दिए। जिस पर डायरेक्टर आफिस की तरफ से विजिलेंस के अकाउंट अफसरों ने जांच भी शुरू कर दी, लेकिन इसमें निगम अधिकारियों के सहयोग की कमी मिली। जिसके चलते विजिलेंस अकाउंट अफसरों द्वारा निगम पानीपत को बार-बार पत्राचार भी किया जाता रहा, लेकिन निगम अधिकारियों ने इसका जवाब तक नहीं दिया।
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अब फिर से विजिलेंस अकाउंट अफसरों ने निगम से इसका जवाब मांग कर इस काम में कुल फाइनेंशियल लॉस की रिपोर्ट मांगी है। मुख्यालय द्वारा निगम अधिकारियों से जवाब मांगा गया है कि इस प्रक्रिया में निगम ने कुल कितने पैसे खर्च किए या कितने पैसों के बिल बनाए गए। अगर किसी का भुगतान किया गया है तो उसकी भी जानकारी दी जाए। एक्सईएन पानीपत द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के तहत किराए पर लिए गए ट्रैक्टर और मशीनों के रेटों को डीसी रेटों से तुलना क्यों नहीं की गई। इसके बाद भी पानीपत निगम द्वारा लगाए गए इन रेटों को किसी कंपिटेंट अथॉरिटी से अप्रूवल क्यों नहीं लिया गया।
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इसके लिए मुख्यालय द्वारा इंक्वायरी में निगम एक्सईएन व सेक्टर ऑफिसर को भी शामिल किया गया था, उन्होंने अपने जवाब तो दे दिए हैं, लेकिन विजिलेंस अकाउंट टीम उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुई।

नगर निगम के एग्जिक्यूटिव आफिसर बलबीर का कहना है कि उन्होंने मामले की नोटिंग तो देखी थी, उस पर हस्ताक्षर तक किए गए थे, लेकिन अब तक पूरे मामले की फाइल उनके पास नहीं आई है। न ही उनके बिलों की उनके पास जानकारी है। इस बारे में निगम से रिकार्ड देख कर मामले की जानकारी दी जा सकती है।
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