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बिना निरीक्षण महज 15 सेंकड में कर रहे गाड़ियों को पास, नई दिखने वाले कंडम गाड़ियां बन सकती हैं आफत
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जैसे ही प्रदेश सरकार की तरफ से आरटीए विभाग में बड़े फेरबदल किए गए, वैसे ही नए अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई, लेकिन इससे काम सही न होने से शहर के ट्रांसपोर्टरों के हाल खस्ता हो रहे हैं। बुधवार को गोहाना रोड पुल के नीचे आरटीए कार्यालय के पास वाहनों की पासिंग जारी रही। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने एक गाड़ी को चेकिंग में 15 सेकेंड ही लगाए। सिर्फ गाड़ी के कागजात देखे, एक नजर उठा के गाड़ी को देखा और पास कर दिया। वहीं, कुछ गाड़ियों के पूरे कागजात होने पर भी उन्हें फेल कर दिया। विभाग अधिकारियों की यह लापरवाही विभाग के साथ-साथ जनता पर भी भारी पड़ सकती है।
इस बारे में ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि नए अफसरों को काम करने का ज्ञान नहीं है। नई पोस्टिंग तो कर दी गई, लेकिन अभी तक इनको काम नहीं आ पाया है। आनन-फानन में अधिकारी गाड़ियों को पास कर रहे हैं। वही, इस बारे मेें आरटीए सचिव ने बताया कि उनके एक्सपर्ट अधिकारी हैं, सिर्फ एक नजर में ही भांप लेते हैं कि गाड़ी सही है या नहीं। उनकी आदतों में ये चीजें शामिल हो जाती हैं।
बता दें कि बुधवार को आरटीए विभाग के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर ने करीब 123 गाड़ियों को चैक किया और इनमें से सिर्फ 20 को फेल किया बाकी सभी को पास कर दिया। फेल गाड़ियों के मालिक ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि उन्हें अधिकारी के काम करने का तरीका बिल्कुल पंसद नहीं आया। जिस गाड़ी को पास किया जाना था, उसे फेल कर दिया गया, जिसे फेल करना था उसे पास कर दिया। एक ट्रांसपोर्टर ने तो ये तक बताया कि पासिंग के सही नियमों तक की अधिकारियों को जानकारी नहीं है।
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उन्होंने ये भी बताया कि किसी भी अधिकारी को कोई भी गाड़ी सही तरीके से चैक करने के बाद ही पास करनी चाहिए। अगर कोई सही दिखने वाली गाड़ी अंदर से कंडम हो और उसे पास कर दिया जाए तो वह कभी भी रोड पर हादसे का कारण बन सकती है।
शीशा टूटा,बदलवाने तक का समय नहीं : मलिक
ट्रांसपोर्टर कुलदीप मलिक ने बताया कि उन्होंने एक गाड़ी को पासिंग के लिए भेजा था। उनकी गाड़ी के शीशे में हल्की सी दरार थी। इसे बदलवाने के लिए एमवीआई ने कहा। शीशा बदलवाने के लिए 5 से 10 मिनट का समय मांगा तो वह समय भी नहीं दिया गया। अब दोबारा फिर से चक्कर काटना पड़ेगा।
बिना देखे ही कर दी फेल : सचिन
वाहन मालिक सचिन ने बताया कि वे अपनी कर्मिश्यल गाड़ी को पास करवाने के लिए यहां आए थे। एमवीआई ने एक नजर उठाकर देखा और दोबारा चेकिंग तक नहीं की और गाड़ी को फेल कर दिया। जब उनसे कारण पूछा गया तो उन्होंने ऐसे ऐसे कारण गिना दिये, जिनको उन्होंने चैक ही नहीं किया था। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें परेशानी हो रही है।
आरटीए सचिव अमरिंद्र बताते हैं कि अधिकारियों द्वारा गाड़ियों को पास करने का काम कोई नया नहीं है। वे अपने काम में निपुण हैं। बस एक नजर में ही बता देंते हैं कि गाड़ी पास है या फेल
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इस बारे में ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि नए अफसरों को काम करने का ज्ञान नहीं है। नई पोस्टिंग तो कर दी गई, लेकिन अभी तक इनको काम नहीं आ पाया है। आनन-फानन में अधिकारी गाड़ियों को पास कर रहे हैं। वही, इस बारे मेें आरटीए सचिव ने बताया कि उनके एक्सपर्ट अधिकारी हैं, सिर्फ एक नजर में ही भांप लेते हैं कि गाड़ी सही है या नहीं। उनकी आदतों में ये चीजें शामिल हो जाती हैं।
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बता दें कि बुधवार को आरटीए विभाग के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर ने करीब 123 गाड़ियों को चैक किया और इनमें से सिर्फ 20 को फेल किया बाकी सभी को पास कर दिया। फेल गाड़ियों के मालिक ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि उन्हें अधिकारी के काम करने का तरीका बिल्कुल पंसद नहीं आया। जिस गाड़ी को पास किया जाना था, उसे फेल कर दिया गया, जिसे फेल करना था उसे पास कर दिया। एक ट्रांसपोर्टर ने तो ये तक बताया कि पासिंग के सही नियमों तक की अधिकारियों को जानकारी नहीं है।
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उन्होंने ये भी बताया कि किसी भी अधिकारी को कोई भी गाड़ी सही तरीके से चैक करने के बाद ही पास करनी चाहिए। अगर कोई सही दिखने वाली गाड़ी अंदर से कंडम हो और उसे पास कर दिया जाए तो वह कभी भी रोड पर हादसे का कारण बन सकती है।
शीशा टूटा,बदलवाने तक का समय नहीं : मलिक
ट्रांसपोर्टर कुलदीप मलिक ने बताया कि उन्होंने एक गाड़ी को पासिंग के लिए भेजा था। उनकी गाड़ी के शीशे में हल्की सी दरार थी। इसे बदलवाने के लिए एमवीआई ने कहा। शीशा बदलवाने के लिए 5 से 10 मिनट का समय मांगा तो वह समय भी नहीं दिया गया। अब दोबारा फिर से चक्कर काटना पड़ेगा।
बिना देखे ही कर दी फेल : सचिन
वाहन मालिक सचिन ने बताया कि वे अपनी कर्मिश्यल गाड़ी को पास करवाने के लिए यहां आए थे। एमवीआई ने एक नजर उठाकर देखा और दोबारा चेकिंग तक नहीं की और गाड़ी को फेल कर दिया। जब उनसे कारण पूछा गया तो उन्होंने ऐसे ऐसे कारण गिना दिये, जिनको उन्होंने चैक ही नहीं किया था। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें परेशानी हो रही है।
आरटीए सचिव अमरिंद्र बताते हैं कि अधिकारियों द्वारा गाड़ियों को पास करने का काम कोई नया नहीं है। वे अपने काम में निपुण हैं। बस एक नजर में ही बता देंते हैं कि गाड़ी पास है या फेल