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गर निगम का कारनामा- अंधेरे में बीतेगी आधे शहर की दिवाली
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अबकी बार तकरीबन आधे शहर की दिवाली अंधेरे में बीतने जा रही है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर को स्ट्रीट लाइटों की रोशनी नहीं मिल पाएगी। सबसे ज्यादा अंधेरा शहर के औद्योगिक सेक्टरों में ही छाया रहेगा। नगर निगम के पास सेक्टर 25 पार्ट-1 व 2, सेक्टर 29 पार्ट-1 व 2 के अलावा अन्य सेक्टरों की लाइटों को दुुरुस्त करवाने के लिए तार ही नहीं हैं। इस काम का नगर निगम अधिकारियों ने सर्वे ही नहीं किया और तारों को मैटेरियल सप्लाई के टेंडर तक में शामिल नहीं किया। हैैरानी वाली बात यह है कि 34 लाख रुपये के इस मैटेरियल सप्लाई के टेंडर को बढ़ाकर 40 लाख रुपये तक पहुंचा दिया गया। इस टेंडर कंपनी से करीब 30 लाख रुपये का सामान भी मंगवाया जा चुका है। इसे करीब 24 लाख रुपये की पेमेेंट तक कर दी गई है। रिपेयरिंग के लिए करीब 50 लाख रुपये से मैनपॉवर तक हायर की गई है और नतीजा जीरो ही रहा।
अब एक बार फिर से निगम मैटेरियल सप्लाई के लिए को-टेंडर लगाने जा रहा है। यानी मैटेरियल सप्लाई के इस काम को दस से बीस लाख रुपये का और बढ़ाया जाएगा। इसके लिए ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर लगने वाले माल की लिस्ट तैयार की जा रही है। जिसके बाद एस्टीमेट बनाकर निविदाएं आमंत्रित की जाएगी और कंपनियों से टेंडर भरवाकर लाइटों का सामान मंगवाया जाएगा। जिसके बाद जाकर शहर की लाइटें जगमग हो पाएगी। इनका अनुुमान नए साल तक का रखा गया है। इसके अलावा क्रॉप्टन की करीब दस हजार स्ट्रीट लाइटों को निगम की जांच कमेटी ने भी हरी झंडी दे दी है, लेकिन इनकी सप्लाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इन पर करीब पौने दो करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।
आठ किलोमीटर के तार हुए गायब
औद्योगिक सेक्टरों से करीब आठ किलोमीटर तक की बिजली के तार गायब मिले। निगम अधिकारियों के अनुसार या तो इस तार को लगाया नहीं गया, या बिजली वाले उतार कर ले गए या चोरी हो गए, इसका सही कारण किसी को नहीं पता। अब इन तारों को नया खरीदकर लगाया जाएगा। इसके लिए करीब 80 बंडल तारों की खपत होगी, जिसे को-टेंडर में शामिल किया जाना है।
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पार्षद कर चुके हैं हंगामा
स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने के लिए जनप्रतिनिधि रोजाना निगम कार्यालय में जाकर मौजूदा अधिकारियों को गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला तक कोई नहीं है। वार्ड पार्षद अंजलि शर्मा, शकुंतला गर्ग, शिव कुमार शर्मा समेत कई पार्षद निगम अधिकारियों को खरी-खरी तक सुना चुके हैं। निगम सदन तक निगम की करतूतों के किस्से गूंज चुके हैं, लेकिन शहर के बदतर हालातों को निगम बदल नहीं पाया है।
एक और टेंडर लगावाया जाएगा- जेई
नगर निगम के इलेक्ट्रिक्ल विंग के जेई गौरव कुमार ने बताया कि निगम के पास इस समय बिजली के तारों व उपकरणों का अभाव है। पहले इसके लिए करीब 40 लाख रुपये का टेंडर है, लेकिन इसमें काम पूरा नहीं होगा। उपकरण के सामान की लिस्ट तैयार कर इसका इस्टीमेट तैयार करवाकर को-टेेेंडर लगाने की तैयारी की जा रही है। ये टेंडर दस से बीस लाख रुपये तक का हो सकता है।
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अब एक बार फिर से निगम मैटेरियल सप्लाई के लिए को-टेंडर लगाने जा रहा है। यानी मैटेरियल सप्लाई के इस काम को दस से बीस लाख रुपये का और बढ़ाया जाएगा। इसके लिए ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर लगने वाले माल की लिस्ट तैयार की जा रही है। जिसके बाद एस्टीमेट बनाकर निविदाएं आमंत्रित की जाएगी और कंपनियों से टेंडर भरवाकर लाइटों का सामान मंगवाया जाएगा। जिसके बाद जाकर शहर की लाइटें जगमग हो पाएगी। इनका अनुुमान नए साल तक का रखा गया है। इसके अलावा क्रॉप्टन की करीब दस हजार स्ट्रीट लाइटों को निगम की जांच कमेटी ने भी हरी झंडी दे दी है, लेकिन इनकी सप्लाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इन पर करीब पौने दो करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।
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आठ किलोमीटर के तार हुए गायब
औद्योगिक सेक्टरों से करीब आठ किलोमीटर तक की बिजली के तार गायब मिले। निगम अधिकारियों के अनुसार या तो इस तार को लगाया नहीं गया, या बिजली वाले उतार कर ले गए या चोरी हो गए, इसका सही कारण किसी को नहीं पता। अब इन तारों को नया खरीदकर लगाया जाएगा। इसके लिए करीब 80 बंडल तारों की खपत होगी, जिसे को-टेंडर में शामिल किया जाना है।
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पार्षद कर चुके हैं हंगामा
स्ट्रीट लाइटों को ठीक करवाने के लिए जनप्रतिनिधि रोजाना निगम कार्यालय में जाकर मौजूदा अधिकारियों को गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला तक कोई नहीं है। वार्ड पार्षद अंजलि शर्मा, शकुंतला गर्ग, शिव कुमार शर्मा समेत कई पार्षद निगम अधिकारियों को खरी-खरी तक सुना चुके हैं। निगम सदन तक निगम की करतूतों के किस्से गूंज चुके हैं, लेकिन शहर के बदतर हालातों को निगम बदल नहीं पाया है।
एक और टेंडर लगावाया जाएगा- जेई
नगर निगम के इलेक्ट्रिक्ल विंग के जेई गौरव कुमार ने बताया कि निगम के पास इस समय बिजली के तारों व उपकरणों का अभाव है। पहले इसके लिए करीब 40 लाख रुपये का टेंडर है, लेकिन इसमें काम पूरा नहीं होगा। उपकरण के सामान की लिस्ट तैयार कर इसका इस्टीमेट तैयार करवाकर को-टेेेंडर लगाने की तैयारी की जा रही है। ये टेंडर दस से बीस लाख रुपये तक का हो सकता है।