धूं-धू कर चला रावण परिवार, असत्य पर हुई सत्य की जीत

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2020 11:50 PM IST
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एक बार फिर असत्य पर सत्य की जीत हुई। विजयदशमी के पावन पर्व पर बुराई के प्रतीक लंकापति दशानन रावण का पुतला दहन किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के धनुष से निकला अग्नि बाण जैसे ही असत्य व अधर्म के प्रतीक रावण की नाभि पर लगा, वैसे ही रावण का पुतला धूं-धूं कर जलने लगा। अहंकार रूपी रावण का पुतला जलते ही रामलीला मंचन देख रहे लोगों ने एक-दूसरे को विजय पर्व की बधाई दी। दशहरा कमेटी सनौली रोड, श्रीराम दशहरा कमेटी बरसत रोड और देवी मंदिर सहित जिले के अनेक स्थानों पर शाम पांच बजकर 33 मिनट पर रावण के पुतले दहन किए गए। भगवान राम का विजय तिलक हुआ। अतिथियों के द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण माता सीता, हनुमानजी की आरती उतारी गई। हालांकि कोविड-19 को देखते हुए इस बार दशहरा उत्सव सूक्ष्म रूप में मनाया गया। सभी दशहरा कमेटियों द्वारा परंपरा का निर्वहन करते हुए 20 से 25 फीट के रावण का दहन किया गया।
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रावण दहन के साथ गूंजा श्रीराम
रावण दहन के साथ ही दैवीय शक्ति के पूजकों ने जयघोष लगाने शुरू कर दिये। पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। यह दृश्य सभी दशहरा ग्राउंड में देखने को मिला। शहर सहित ग्रामीण अंचल में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी पर्व उत्साह से मनाया गया। जगह-जगह अहंकारी दशानन के पुतले का पारंपरिक रूप से दहन किया गया। जैसे ही राम-लक्ष्मण व हनुमान दशहरा स्थल पहुंचे, वैसे ही माहौल राम भक्तिमय हो गया। रावण के पुतले पर तीर मारकर आग लगाई और रावण धू-धूकर जलने लगा। दहन के बाद अधिकांश घरों में विशेष भोज का आनंद लिया गया। कई श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।
गांव भालसी में बच्चों ने किया दो से तीन फीट के रावण का दहन
वहीं गांव भालसी में बच्चों द्वारा दो से तीन फीट के रावण का पुतले का दहन किया। छोटे-छोटे बच्चों लविश नैन, मनन, रैनी, शौर्य, नव नैन, वंशिका, आरूश समेत बच्चों ने रावण के पुतले बनाकर उनमें बम-पटाखे लगाए और शाम पांच बजकर 33 मिनट पर रावण के पुतले का दहन किया।
चुस्त-दुरुस्त रहा प्रशासन
मौके पर प्रशासन अग्निशमन वाहन के साथ मुस्तैद था। कोविड-19 को लेकर प्रशासन द्वारा सख्त दिशा निर्देश दिए गए थे। दशहरा स्थल पर आमजन के प्रवेश पर पाबंदी रही। दशहरा कमेटियों द्वारा कोविड-19 को लेकर जारी दिशा-निर्देशों और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रावण के पुतले का दहन किया गया। आमजन के लिए दशहरा कमेटियों द्वारा रावण दहन का लाइव प्रसारण किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों समेत पुलिस बल पूरे समय तक मौके पर तैनात थे।
बधाइयों का चला सिलसिला
दशहरा पर्व पर बधाइयों का सिलसिला भी जारी रहा। छोटों ने बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और हमउम्र साथियों ने एक-दूसरे को गले मिलकर दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। कई लोगों ने दहन के बाद फोन कर परिचितों को बधाई दी तो किसी ने एसएमएस के जरिए संदेश भेजे।
वीरता की पूजक और शौर्य की उपासक है भारतीय संस्कृति : राधे-राधे
अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे ने कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है। शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज में रक्त में वीरता प्रकट हो, इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरे का पर्व भाई चारे का प्रतीक है। इसलिए समाज के हर समुदाय को भाई चारे की भावना से रहना चाहिए।
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