पानीपत: पति की हत्या की दोषी पत्नी और देवर को उम्रकैद, प्रेम संबंध में की थी वारदात
प्रेम संबंध में 27 अक्तूबर 2020 को वारदात हुई थी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने फैसला सुनाया है। दोषियों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। नहीं देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
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हरियाणा के पानीपत में धूपसिंह नगर में 27 अक्तूबर 2020 को प्रेम प्रसंग में पति अनिल की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में पत्नी संगीता और प्रेमी चचेरे देवर सचिन को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दोषियों पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर दोनों को दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला न्यायवादी राजेश कुमार चौधरी ने बताया कि चांदनीबाग थाना पुलिस में धूपसिंह नगर निवासी धर्मबीर ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि वह चार भाई हैं, चारों शादीशुदा हैं। उनका एक भाई अनिल (26) फैक्टरी में सिलाई का काम करता था। उसके दो बच्चे हैं। उसके माता-पिता भी अनिल के पास ही रहते हैं। उसका भाई हर रोज की तरह 26 अक्तूबर 2020 को खाना खाकर सोया था। सुबह अनिल की पत्नी संगीता ने बताया कि अनिल कुछ बोल नहीं रहा है। उन्होंने जाकर देखा तो अनिल की सांसें बंद हो चुकीं थीं।
अनिल के गले, चेहरे व शरीर पर चोट के निशान थे। परिवार का कहना था कि अनिल की पत्नी संगीता और उसके चचेरे भाई सचिन के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था और दोनों ने मिलकर अनिल की हत्या की है। चांदनीबाग थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, जिसकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अनिल की गला घोंटकर व मुंह दबाकर हत्या की गई है। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर पत्नी संगीता और सचिन को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो दोनों ने वारदात को कबूल लिया।
एफएसएल रिपोर्ट, मोबाइल फोन और गवाह ने दिलाई सजा
पुलिस ने मौके से अनिल के कपड़े, खून की पट्टी और विसरा जांच के लिए लैब भेजे थे। इसके अलावा पुलिस ने संगीता का मोबाइल फोन बरामद किया था, जिससे वह प्रेमी सचिन से लगातार बातचीत करती थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चुन्नी भी बरामद की थी जिससे गला घोंटा गया था। सभी की एफएसएल रिपोर्ट, मोबाइल फोन से हुई बातचीत और 22 गवाह के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदेश कुमार शर्मा की अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
दोषियों ने कोर्ट में लगाई नरमी की गुहार, अदालत ने कहा-सहानुभूति से न्याय प्रणाली को नुकसान
अदालत में दोषी संगीता ने कहा कि उसके दो बच्चे हैं, वह गरीब महिला है। वहीं दोषी सचिन ने कहा कि वह एक छात्र है और उसके बुजुर्ग माता-पिता हैं, उनका पहले भी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है, इसलिए सजा में नरमी बरती जाए। इस पर न्यायाधीश सुदेश कुमार शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपर्याप्त सजा देने की सहानुभूति न्याय प्रणाली को अधिक नुकसान पहुंचाएगी, जिसे कानून में जनता का विश्वास कमजोर होगा, इसलिए उचित सजा देना अदालत का कर्तव्य है।