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जब डाक्टर ने कहा, गिरा दो बच्चा
ब्यूरो/अमर उजाला,पानीपत
Updated Sun, 24 Jul 2016 10:56 PM IST
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पानीपत। सिविल अस्पताल में नसबंदी करवाने के चार साल बाद एक महिला गर्भवती हो गई। आरोप है कि महिला के परिजन गर्भवती को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने बच्चा गिराने के लिए बोल दिया।
गर्भवती अल्ट्रासाउंड के लिए लगातार सिविल अस्पताल के चक्कर काट रही है, लेकिन तीन माह बाद भी उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन शिकायत मिलने पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है।
काबड़ी रोड, अर्जुन नगर निवासी ममता ने बताया कि वह दो बच्चों की मां है। उसने परिवार की सहमति के बाद चार साल पहले सिविल अस्पताल में नसबंदी करवा ली थी। अब चार साल बाद वह दोबारा गर्भवती हो गई। इसकी जानकारी होते ही वह अप्रैल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंची।
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ममता और उसके परिजनों का आरोप है कि तीन माह के बाद भी अस्पताल में उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। अस्पताल की ओपीडी में बैठने वाली एक महिला डॉक्टर उसको गर्भपात करवाने की सलाह दे रही है। ममता ने डॉक्टर पर आरोप लगाया कि डॉक्टर बचने के लिए बार-बार गर्भपात की सलाह दे रही है। आरोप है कि डॉक्टर गर्भपात कराने की जिम्मेदारी भी ले रही है।
महिला रोग विशेषज्ञ की नजर में मामला
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि नसबंदी के ऑपरेशन कई बार फेल हो जाते है। उसका मुख्य कारण प्राइवेट पार्ट में धागे का ढीला होना होता है। यदि ऑपरेशन फेल होता है तो महिला के गर्भवती होने के संभावना बढ़ जाती है। महिला को अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को अनवांटेड प्रेंगनेंसी लिस्ट में डालकर उसका कानूनी प्रक्रिया से गर्भपात करवा सकती है। इसके लिए महिला की सहमति जरूरी है।
वर्जन
नसबंदी का ऑपरेशन फेल होने के बाद किसी डॉक्टर ने यदि महिला को गैरकानूनी ढंग से गर्भपात कराने की सलाह दी है, तो यह गलत है। उनके पास यदि इस संबंध में शिकायत आती है तो आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे गंभीर मामले को सहन नहीं किया जाएगा।
डॉ. एसके गुप्ता, एमएस सिविल अस्पताल पानीपत।
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गर्भवती अल्ट्रासाउंड के लिए लगातार सिविल अस्पताल के चक्कर काट रही है, लेकिन तीन माह बाद भी उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन शिकायत मिलने पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है।
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काबड़ी रोड, अर्जुन नगर निवासी ममता ने बताया कि वह दो बच्चों की मां है। उसने परिवार की सहमति के बाद चार साल पहले सिविल अस्पताल में नसबंदी करवा ली थी। अब चार साल बाद वह दोबारा गर्भवती हो गई। इसकी जानकारी होते ही वह अप्रैल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंची।
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ममता और उसके परिजनों का आरोप है कि तीन माह के बाद भी अस्पताल में उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। अस्पताल की ओपीडी में बैठने वाली एक महिला डॉक्टर उसको गर्भपात करवाने की सलाह दे रही है। ममता ने डॉक्टर पर आरोप लगाया कि डॉक्टर बचने के लिए बार-बार गर्भपात की सलाह दे रही है। आरोप है कि डॉक्टर गर्भपात कराने की जिम्मेदारी भी ले रही है।
महिला रोग विशेषज्ञ की नजर में मामला
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि नसबंदी के ऑपरेशन कई बार फेल हो जाते है। उसका मुख्य कारण प्राइवेट पार्ट में धागे का ढीला होना होता है। यदि ऑपरेशन फेल होता है तो महिला के गर्भवती होने के संभावना बढ़ जाती है। महिला को अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को अनवांटेड प्रेंगनेंसी लिस्ट में डालकर उसका कानूनी प्रक्रिया से गर्भपात करवा सकती है। इसके लिए महिला की सहमति जरूरी है।
वर्जन
नसबंदी का ऑपरेशन फेल होने के बाद किसी डॉक्टर ने यदि महिला को गैरकानूनी ढंग से गर्भपात कराने की सलाह दी है, तो यह गलत है। उनके पास यदि इस संबंध में शिकायत आती है तो आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे गंभीर मामले को सहन नहीं किया जाएगा।
डॉ. एसके गुप्ता, एमएस सिविल अस्पताल पानीपत।