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दंपति ने फर्जी तरीके से पा ली संस्कृत अध्यापक की नौकरी, अब फंसे
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
Updated Sat, 26 Sep 2015 12:14 AM IST
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शिक्षा विभाग में 43 जेबीटी के बाद दो संस्कृत अध्यापकों के भी फर्जी तरीके से नौकरी पाने का मामला सामने आया है। दोनों रिश्ते में पति-पत्नी हैं और उन्होंने 1998 में दो माह के अंदर जिले सरकारी स्कूलों में संस्कृत अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया था।
पति ने तो ओटी भी जनरल कोटे से की थी और इस दौरान एससी कोटे के सारे फंड लिए थे। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है और चार्जशीट निदेशालय को भेज वैट करने की मांग की है। जिसके बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने राजकीय सीसे स्कूल छाजपुर में तैनात संस्कृत अध्यापक तेजबीर सिंह व राजकीय सीसे स्कूल खोतपुरा में तैनात संस्कृत अध्यापिका पूनम रानी को सस्पेंड कर दिया है। डीईईओ ने दोनों की चार्जशीट को हाल ही में निदेशालय को भेजा है और वैट करने की मांग की है।
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डीईईओ द्वारा 43 जेबीटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के बाद दोनों संस्कृत अध्यापकों की कारगुजारी भी सबके सामने आ गई।
जिला मौलिक शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार तेजबीर व पूनम रानी पति-पत्नी हैं और दोनों ने 1998 में दो माह के अंतराल में जिले में संस्कृत अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया था। तेजबीर ने राजकीय सीसे स्कूल बड़ौली में 24 जुलाई 1998 व पूनम रानी ने 21 मई 1998 को ज्वाइन किया था।
टेकराम दहिया ने तेजबीर सिंह व पूनम रानी की नियुक्ति पर शक हुआ और उन्होंने आरटीआई लगा दी। जिसमें पूरा मामला साफ होता चला गया। टेकराम दहिया के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की भी आंखें खुली की खुली रह गईं।
इस मामले की एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक द्वारा जांच की गई। जिसमें संस्कृत अध्यापक तेजबीर का डाईट बीसवां मील सोनीपत से ओटी का कोर्स करना पाया गया। तेजबीर ने यहां पर एससी कोटे के तहत दाखिला लिया था और दो साल तक कोटे की सभी योजनाओं का लाभ लिया। जबकि तेजबीर सिंह सामान्य वर्ग का था।
न तो चयन आयोग व न ही निदेशालय की सूची में नाम
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 1998 में संस्कृत अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी और आयोग की सूची को निदेशालय ने जारी कर दिया था। तेजबीर ने मेरिट सूची छह व पूनम रानी ने तीन नंबर पर आना बताया था। उनको इसके आधार पर ज्वाइन करा दिया गया।
विभागीय जांच में सामने आया कि मेरिट लिस्ट में तीन व छह नंबर किसी अन्य अभ्यर्थी का नाम था और न तो आयोग व न ही निदेशालय की सूची में उनका नाम दिया गया था। जांच अधिकारी भी इस मामले को जानकर चिंतित है। शिक्षा निदेशालय द्वारा संस्कृत अध्यापकों की मेरिट सूची 10 अप्रैल 1998 को जारी की गई थी। शिक्षा विभाग द्वारा तेजबीर को छह व पूनम को 24 अगस्त को सस्पेंड कर दिया। विभाग ने अब दोनों को वैट करने को लिखा है।
जिले के दो स्कूलों में दो संस्कृत अध्यापकों ने फर्जी तरीके से ज्वाइन करना पाया गया है। उन दोनों को गत माह ही सस्पेंड कर दिया है और अब निदेशालय को दोनों की चार्जशीट भेजकर वैट करने की मांग की है।
संतोष ग्रोवर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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पति ने तो ओटी भी जनरल कोटे से की थी और इस दौरान एससी कोटे के सारे फंड लिए थे। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है और चार्जशीट निदेशालय को भेज वैट करने की मांग की है। जिसके बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने राजकीय सीसे स्कूल छाजपुर में तैनात संस्कृत अध्यापक तेजबीर सिंह व राजकीय सीसे स्कूल खोतपुरा में तैनात संस्कृत अध्यापिका पूनम रानी को सस्पेंड कर दिया है। डीईईओ ने दोनों की चार्जशीट को हाल ही में निदेशालय को भेजा है और वैट करने की मांग की है।
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डीईईओ द्वारा 43 जेबीटी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के बाद दोनों संस्कृत अध्यापकों की कारगुजारी भी सबके सामने आ गई।
जिला मौलिक शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार तेजबीर व पूनम रानी पति-पत्नी हैं और दोनों ने 1998 में दो माह के अंतराल में जिले में संस्कृत अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया था। तेजबीर ने राजकीय सीसे स्कूल बड़ौली में 24 जुलाई 1998 व पूनम रानी ने 21 मई 1998 को ज्वाइन किया था।
टेकराम दहिया ने तेजबीर सिंह व पूनम रानी की नियुक्ति पर शक हुआ और उन्होंने आरटीआई लगा दी। जिसमें पूरा मामला साफ होता चला गया। टेकराम दहिया के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की भी आंखें खुली की खुली रह गईं।
इस मामले की एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक द्वारा जांच की गई। जिसमें संस्कृत अध्यापक तेजबीर का डाईट बीसवां मील सोनीपत से ओटी का कोर्स करना पाया गया। तेजबीर ने यहां पर एससी कोटे के तहत दाखिला लिया था और दो साल तक कोटे की सभी योजनाओं का लाभ लिया। जबकि तेजबीर सिंह सामान्य वर्ग का था।
न तो चयन आयोग व न ही निदेशालय की सूची में नाम
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 1998 में संस्कृत अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी और आयोग की सूची को निदेशालय ने जारी कर दिया था। तेजबीर ने मेरिट सूची छह व पूनम रानी ने तीन नंबर पर आना बताया था। उनको इसके आधार पर ज्वाइन करा दिया गया।
विभागीय जांच में सामने आया कि मेरिट लिस्ट में तीन व छह नंबर किसी अन्य अभ्यर्थी का नाम था और न तो आयोग व न ही निदेशालय की सूची में उनका नाम दिया गया था। जांच अधिकारी भी इस मामले को जानकर चिंतित है। शिक्षा निदेशालय द्वारा संस्कृत अध्यापकों की मेरिट सूची 10 अप्रैल 1998 को जारी की गई थी। शिक्षा विभाग द्वारा तेजबीर को छह व पूनम को 24 अगस्त को सस्पेंड कर दिया। विभाग ने अब दोनों को वैट करने को लिखा है।
जिले के दो स्कूलों में दो संस्कृत अध्यापकों ने फर्जी तरीके से ज्वाइन करना पाया गया है। उन दोनों को गत माह ही सस्पेंड कर दिया है और अब निदेशालय को दोनों की चार्जशीट भेजकर वैट करने की मांग की है।
संतोष ग्रोवर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।