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आग से ‘झुलासा’ शबनम का ‘संसार’
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:53 AM IST
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गांव कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल में हुए अग्निकांड ने शबनम की जान ले ली, तो इसकी तपिश उसका परिवार पूरी उम्र महसूस करेगा। इस हादसे में शबनम की दो बेटी और दोनों बेटे बेसहारा हो गए हैं। चारों भाइयों बहनों का पहले दिन बहन सन्नो और उसके आठ घंटे बाद मां शबनम की मौत का समाचार पाकर रो-रो कर बुरा हाल है। बच्चों के पिता अनबन होने के बाद कई साल पहले ही शबनम से अलग रह रहा है। वह इतने बड़े हादसे के बाद भी अपने बाकी चारों बच्चों को संभालने नहीं आया। बड़ौत की उर्दू कॉलोनी निवासी पड़ोस के लोगों ने चारों बच्चों को सहारा दिया है।
गांव कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल में हुए दर्दनाक हादसे में आठवीं मौत शबनम (44) निवासी उर्दू कॉलोनी बड़ौत की हुई। शबनम ने शुक्रवार देर रात पीजीआई रोहतक में दम तोड़ दिया। शबनम 80 प्रतिशत तक जल चुकी थी। पुलिस ने शनिवार को पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। पड़ोसी वकील ने बताया कि शबनम का पति सलाऊ पिछले छह साल से अपनी पत्नी से अलग रहता है। शबनम दस दिन पहले ही अपने बच्चों को लेकर सनौली आई थी। एक सप्ताह काम की तलाश में घूमने के बाद शबनम को गांव कुराड़ स्थित एवीएस मिल में नौकरी मिली थी। शबनम ने पांच दिन पहले ही मिल में काम शुरू किया था। शबनम पांच बच्चों में तीन बेटी और दो बेटे सन्नो (17), 15 वर्षीय शाहिस्ता, 13 वर्षीय मुस्कान, छह वर्षीय जिसान और चार वर्षीय समीर थे। बड़ी बेटी सन्नो ने भी खर्च मेें हाथ बंटाने के लिए अपनी मां के साथ शुक्रवार से ही मिल में काम शुरू किया था। मिल में लगी आग की चपेट में आने सन्नो की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि शबनम गंभीर रूप से झुलस गई थी। शबनम और उसकी बेटी सन्नो की मौत के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है। शाहिस्ता, मुस्कान, जिसान व समीर का रो-रोकर बुरा हाल है। चारों के लिए दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। चारों बच्चों की मदद के लिए आगे आए पड़ोसी चारों को अपने साथ बड़ौत ले गए। रिश्तेदार शबनम और सन्नो के शवों का बड़ौत ले गए। वहां मां-बेटियों को एक ही कब्रिस्तान में दफना दिया गया है।
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गांव कुराड़ स्थित एवीएस स्पीनिंग मिल में हुए दर्दनाक हादसे में आठवीं मौत शबनम (44) निवासी उर्दू कॉलोनी बड़ौत की हुई। शबनम ने शुक्रवार देर रात पीजीआई रोहतक में दम तोड़ दिया। शबनम 80 प्रतिशत तक जल चुकी थी। पुलिस ने शनिवार को पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। पड़ोसी वकील ने बताया कि शबनम का पति सलाऊ पिछले छह साल से अपनी पत्नी से अलग रहता है। शबनम दस दिन पहले ही अपने बच्चों को लेकर सनौली आई थी। एक सप्ताह काम की तलाश में घूमने के बाद शबनम को गांव कुराड़ स्थित एवीएस मिल में नौकरी मिली थी। शबनम ने पांच दिन पहले ही मिल में काम शुरू किया था। शबनम पांच बच्चों में तीन बेटी और दो बेटे सन्नो (17), 15 वर्षीय शाहिस्ता, 13 वर्षीय मुस्कान, छह वर्षीय जिसान और चार वर्षीय समीर थे। बड़ी बेटी सन्नो ने भी खर्च मेें हाथ बंटाने के लिए अपनी मां के साथ शुक्रवार से ही मिल में काम शुरू किया था। मिल में लगी आग की चपेट में आने सन्नो की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि शबनम गंभीर रूप से झुलस गई थी। शबनम और उसकी बेटी सन्नो की मौत के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है। शाहिस्ता, मुस्कान, जिसान व समीर का रो-रोकर बुरा हाल है। चारों के लिए दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। चारों बच्चों की मदद के लिए आगे आए पड़ोसी चारों को अपने साथ बड़ौत ले गए। रिश्तेदार शबनम और सन्नो के शवों का बड़ौत ले गए। वहां मां-बेटियों को एक ही कब्रिस्तान में दफना दिया गया है।
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