{"_id":"5a9ae6074f1c1b355a8b4a7d","slug":"11520100871-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नशीली दवाइयां पकड़ने पर 11 दिन बाद ड्रग कंट्रोलर संस्पेंड, डाक्टर व कैमिस्ट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नशीली दवाइयां पकड़ने पर 11 दिन बाद ड्रग कंट्रोलर संस्पेंड, डाक्टर व कैमिस्ट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
Updated Sat, 03 Mar 2018 11:44 PM IST
विज्ञापन
नशीली दवाइयां पकड़ने पर 11 दिन बाद ड्रग कंट्रोलर सस्पेंड, डॉक्टर और केमिस्ट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं
छापेमारी के विरोध में आई शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी, ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई को लेकर अड़ी
डॉ. वानी कौर इस्तीफा देकर चली गई, केमिस्ट पर दर्ज एफआईआर को भूली पुलिस
विभाग की कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में भी रोष
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा 19 फरवरी को छापेमारी कर तहसील कैंप स्थित एक केमिस्ट शाप से नशीली और प्रतिबंधित दवाइयां पकड़ना आखिरकार ड्रग कंट्रोलर को भारी पड़ गया। एक तरफ जहां टीम को उम्मीद थी कि नशा रोकने के लिए उठाया गया उनके कदम पर सरकार और विभाग की ओर से प्रशंसा मिलेगी, लेकिन हुआ इसके उल्टा। आखिरकार 11 दिन बाद ड्रग कंट्रोलर रितु चौधरी के सस्पेंशन के आर्डर जारी कर दिये हैं। सियासत से भरे इस पूरे प्रकरण में बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार कार्रवाई केवल एक अधिकारी पर ही क्यों की गई? जबकि टीम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। इसके साथ ही सवाल ये भी है कि इस मामले में केवल केमिस्ट के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया, लेकिन गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है? इसके साथ ही जब विभाग ने डॉक्टर वाणी पर शिकंजा कसा तो वह इस्तीफा देकर चली गई, ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या नौकरी से इस्तीफा देने उन पर लगे आरोप नष्ट हो गए क्या ? एक तरफा हुई कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में भी रोष है।
बता दें कि 19 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ मुनीष कुमार के नेतृत्व में बनी संयुक्त टीम ने तहसील कैंप स्थित केमिस्ट शाप पर छापा मारा था, इस दौरान ड्रग कंट्रोलर रीतू चौधरी भी साथ थी। टीम ने तहसील कैंप में मेडिकल स्टोर से नशे के इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवा पकड़ी थी। इस मामले में शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी के पीए और कई केमिस्ट विरोध करने पहुंच गए थे और छापेमारी का विरोध किया था। भारी विरोध के बावजूद टीम ने अपनी पूरी कार्रवाई की और डा. मुनीष की शिकायत पर केमिस्ट सतपाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया। इसके बाद से ये मामला लगातार रुकने की बजाए बढ़ता गया। एक तरफ छापेमारी के विरोध में शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी आई और ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई को लेकर अड़ गई, वहीं टीम की छापेमारी के समर्थन में ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिया और मामले में कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके साथ ही केमिस्टों के भी दो ग्रुप बन गए और एक ने छापेमारी का समर्थन किया तो दूसरे गुट ने विरोध किया। इतना नहीं अलग अलग गुटों ने स्वास्थ्य मंत्री को शपथ पत्र दिये। खुद शहरी विधायक मंत्री अनिल विज से मिली और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद से ही ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड करने को लेकर कयास चल रहे थे। इस पूरे प्रकरण में एक ही अधिकारी पर निशाना साधने को लेकर भी शहर में कई तरह की चर्चाएं हैं।
ये हैं सवाल
आखिर छापेमारी का मामला इतना बड़ा क्यों बन गया?
केमिस्ट पर जब नशीली दवाइयां पकड़ी गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
छापेमारी में टीम थी, सस्पेंड केवल एक ही अधिकारी क्यों हुई?
केमिस्ट शाप पर छापेमारी का राजनीतिकरण क्यों हुआ?
वर्जन
मेरे पास ड्रग कंट्रोलर रीतू चौधरी के सस्पेंशन के आर्डर आ गए हैं, उन्हें पंचकूला हेडक्वार्टर बुलाया गया है। इससे ज्यादा इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकता। डा. वाणी को नोटिस जारी किया था, उसने इस्तीफा दिया है। पूरे मामले की जांच की जाएगी।
विज्ञापन
-डा. संतलाल वर्मा, सीएमओ।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा तहसील कैंप स्थित केमिस्ट शाप पर छापे के मामले में अभी दोनों आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए है। जल्द ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सुनिल, अतिरिक्त सिटी थाना प्रभारी, पानीपत
विज्ञापन
छापेमारी के विरोध में आई शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी, ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई को लेकर अड़ी
डॉ. वानी कौर इस्तीफा देकर चली गई, केमिस्ट पर दर्ज एफआईआर को भूली पुलिस
विभाग की कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में भी रोष
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा 19 फरवरी को छापेमारी कर तहसील कैंप स्थित एक केमिस्ट शाप से नशीली और प्रतिबंधित दवाइयां पकड़ना आखिरकार ड्रग कंट्रोलर को भारी पड़ गया। एक तरफ जहां टीम को उम्मीद थी कि नशा रोकने के लिए उठाया गया उनके कदम पर सरकार और विभाग की ओर से प्रशंसा मिलेगी, लेकिन हुआ इसके उल्टा। आखिरकार 11 दिन बाद ड्रग कंट्रोलर रितु चौधरी के सस्पेंशन के आर्डर जारी कर दिये हैं। सियासत से भरे इस पूरे प्रकरण में बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार कार्रवाई केवल एक अधिकारी पर ही क्यों की गई? जबकि टीम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। इसके साथ ही सवाल ये भी है कि इस मामले में केवल केमिस्ट के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया, लेकिन गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है? इसके साथ ही जब विभाग ने डॉक्टर वाणी पर शिकंजा कसा तो वह इस्तीफा देकर चली गई, ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या नौकरी से इस्तीफा देने उन पर लगे आरोप नष्ट हो गए क्या ? एक तरफा हुई कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में भी रोष है।
बता दें कि 19 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ मुनीष कुमार के नेतृत्व में बनी संयुक्त टीम ने तहसील कैंप स्थित केमिस्ट शाप पर छापा मारा था, इस दौरान ड्रग कंट्रोलर रीतू चौधरी भी साथ थी। टीम ने तहसील कैंप में मेडिकल स्टोर से नशे के इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवा पकड़ी थी। इस मामले में शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी के पीए और कई केमिस्ट विरोध करने पहुंच गए थे और छापेमारी का विरोध किया था। भारी विरोध के बावजूद टीम ने अपनी पूरी कार्रवाई की और डा. मुनीष की शिकायत पर केमिस्ट सतपाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया। इसके बाद से ये मामला लगातार रुकने की बजाए बढ़ता गया। एक तरफ छापेमारी के विरोध में शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी आई और ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई को लेकर अड़ गई, वहीं टीम की छापेमारी के समर्थन में ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिया और मामले में कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके साथ ही केमिस्टों के भी दो ग्रुप बन गए और एक ने छापेमारी का समर्थन किया तो दूसरे गुट ने विरोध किया। इतना नहीं अलग अलग गुटों ने स्वास्थ्य मंत्री को शपथ पत्र दिये। खुद शहरी विधायक मंत्री अनिल विज से मिली और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद से ही ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड करने को लेकर कयास चल रहे थे। इस पूरे प्रकरण में एक ही अधिकारी पर निशाना साधने को लेकर भी शहर में कई तरह की चर्चाएं हैं।
विज्ञापन
ये हैं सवाल
आखिर छापेमारी का मामला इतना बड़ा क्यों बन गया?
केमिस्ट पर जब नशीली दवाइयां पकड़ी गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
छापेमारी में टीम थी, सस्पेंड केवल एक ही अधिकारी क्यों हुई?
केमिस्ट शाप पर छापेमारी का राजनीतिकरण क्यों हुआ?
वर्जन
मेरे पास ड्रग कंट्रोलर रीतू चौधरी के सस्पेंशन के आर्डर आ गए हैं, उन्हें पंचकूला हेडक्वार्टर बुलाया गया है। इससे ज्यादा इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकता। डा. वाणी को नोटिस जारी किया था, उसने इस्तीफा दिया है। पूरे मामले की जांच की जाएगी।
विज्ञापन
-डा. संतलाल वर्मा, सीएमओ।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा तहसील कैंप स्थित केमिस्ट शाप पर छापे के मामले में अभी दोनों आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए है। जल्द ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सुनिल, अतिरिक्त सिटी थाना प्रभारी, पानीपत