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बैंक गारंटी नहीं जमा करने पर निगम ने रोके विकास कार्यों आठ वर्क ऑर्डर
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पानीपत। शहर में विकास कार्यों पर फिर अड़ंगा लग गया है। नगर निगम ने आठ विकास कार्यों के वर्क ऑर्डर रोक दिए हैं। ये विकास कार्य सड़क, नालियों और गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स के हैं। इन्हें रोकने की वजह इनकी निर्माण एजेंसियों की ओर से बैंक गारंटी जमा नहीं कराना है। सभी आठ एजेंसियों को नोटिस जारी कर दिया गया है। फिर भी बैंग गारंटी जमा नहीं कराई गई तो अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जब्त कर ली जाएगी।
नगर निगम से ज्यादा घाटे में टेंडर लेने वाली निर्माण एजेंसियों पर बैंक गारंटी की तलवार लटकी है। बैक गांरटी मिलने तक निर्माण एजेंसियों को वर्क ऑर्डर नहीं मिलेंगे। ऐसे में निर्माण एजेंसियों को ईएमडी का नुकसान होगा और हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल पर रिकॉर्ड खराब होने पर टेंडर लेने में परेशानी होगी। तत्काल समस्या उन कॉलोनियों के लोगों की है, जहां पर विकास कार्य होने थे। उनका इंतजार बढ़ गया है।
चार करोड़ रुपये की लागत के हैं विकास कार्य
नगर निगम के नोटिस के बाद करीब 20 निर्माण एजेंसियों ने बैंक गारंटी जमा करा दी है। इनके पास 10 करोड़ रुपये की लागत के 20 विकास कार्य हैं। उधर, आठ निर्माण एजेंसियों ने बैंग गारंटी जमा नहीं कराई है, जिसकी वजह चार करोड़ रुपये की लागत के आठ विकास कार्यों के वर्क ऑर्डर रोके गए हैं।
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10 प्रतिशत घाटे से ऊपर बैंक गारंटी जरूरी
नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी बताते हैं कि किसी भी टेंडर को अगर निर्माण एजेंसी मार्केट रेट से 10 प्रतिशत घाटे में लेती है तो ठीक है। इतना मान्य है। इससे अधिक टेंडर घाटे में लिया गया तो ठेकेदार को घाटे की रकम के बराबर बैंक गारंटी देनी होगी ताकि वह विकास कार्य को बीच में छोड़कर न भागे। मान लीजिए अगर किसी ठेकेदार ने टेंडर 25 प्रतिशत घाटे में लिया है। इस काम की लागत का 10 प्रतिशत छोड़ बाकी 15 प्रतिशत की बैंक गांरटी जमा करानी होगी। काम पूरा करने पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेकर बैंक गारंटी वापस ली जा सकती है। काम बीच में छोड़ने पर बैंक गारंटी से बाकी का काम पूरा होता है।
वर्जन :
अगर कोई बैंक गारंटी नहीं जमा करवाता या जिसकी ईएमडी जब्त होती है तो इसका रिकार्ड भी पोर्टल पर होगा। इससे उन्हें ईएमडी के नुकसान के साथ एजेंसी रिकार्ड के खराब होने का भी नुकसान होगा।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत
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नगर निगम से ज्यादा घाटे में टेंडर लेने वाली निर्माण एजेंसियों पर बैंक गारंटी की तलवार लटकी है। बैक गांरटी मिलने तक निर्माण एजेंसियों को वर्क ऑर्डर नहीं मिलेंगे। ऐसे में निर्माण एजेंसियों को ईएमडी का नुकसान होगा और हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल पर रिकॉर्ड खराब होने पर टेंडर लेने में परेशानी होगी। तत्काल समस्या उन कॉलोनियों के लोगों की है, जहां पर विकास कार्य होने थे। उनका इंतजार बढ़ गया है।
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चार करोड़ रुपये की लागत के हैं विकास कार्य
नगर निगम के नोटिस के बाद करीब 20 निर्माण एजेंसियों ने बैंक गारंटी जमा करा दी है। इनके पास 10 करोड़ रुपये की लागत के 20 विकास कार्य हैं। उधर, आठ निर्माण एजेंसियों ने बैंग गारंटी जमा नहीं कराई है, जिसकी वजह चार करोड़ रुपये की लागत के आठ विकास कार्यों के वर्क ऑर्डर रोके गए हैं।
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10 प्रतिशत घाटे से ऊपर बैंक गारंटी जरूरी
नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी बताते हैं कि किसी भी टेंडर को अगर निर्माण एजेंसी मार्केट रेट से 10 प्रतिशत घाटे में लेती है तो ठीक है। इतना मान्य है। इससे अधिक टेंडर घाटे में लिया गया तो ठेकेदार को घाटे की रकम के बराबर बैंक गारंटी देनी होगी ताकि वह विकास कार्य को बीच में छोड़कर न भागे। मान लीजिए अगर किसी ठेकेदार ने टेंडर 25 प्रतिशत घाटे में लिया है। इस काम की लागत का 10 प्रतिशत छोड़ बाकी 15 प्रतिशत की बैंक गांरटी जमा करानी होगी। काम पूरा करने पर कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेकर बैंक गारंटी वापस ली जा सकती है। काम बीच में छोड़ने पर बैंक गारंटी से बाकी का काम पूरा होता है।
वर्जन :
अगर कोई बैंक गारंटी नहीं जमा करवाता या जिसकी ईएमडी जब्त होती है तो इसका रिकार्ड भी पोर्टल पर होगा। इससे उन्हें ईएमडी के नुकसान के साथ एजेंसी रिकार्ड के खराब होने का भी नुकसान होगा।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत