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खुद बेसहारा गोवंश उठा रहा निगम न कर रहा संस्थाओं की मदद
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पानीपत। शहर में घूमने वाले हजारों गोवंशों को निगम गोशाला या नंदीशाला तक भी नहीं पहुंचा पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जो संस्थाएं इनको पकड़ने और रखरखाव की जिम्मेदारी लेती हैं, उनकी भी निगम मदद नहीं कर सका है। यही वजह है कि शहर की सड़कों पर करीब तीन हजार गोवंश बेसहारा घूम रहे हैं जो आए दिन हादसा का सबब बन जाते हैं। कई हादसे तो लोगों की जान तक ले चुके हैं। बुधवार को भी ऐसे ही एक हादसे ने एक नवयुवक की जान ले ली।
बता दें कि करीब चार साल पहले निगम ने शहर में स्ट्रे कैटल फ्री अभियान चलाया था। इसके तहत 1650 गोवंशों को पकड़कर नैन गोभ्यारण की गोशाला में छोड़ा गया था। इसके बाद यह काम बंद हो गया। ठीक दो साल पहले फिर से गोवंश पकड़ने शुरू किए गए। इस बार केवल 450 पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा गया। इसके बाद फिर से काम बंद करवा दिया गया। अब करीब सात माह पहले निगम ने फिर से शहर को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए अभियान चलाया है, लेकिन महज 850 गोवंशों को ही गोशाला तक पहुंचाया गया।
हर बार इस काम के बंद होने का कारण निगम के गोशाला को दिए गए खोखले आश्वासन रहे। हर बार निगम और शहर की सरकार गोशाला में जाती है और गोशाला समिति को कभी चारे, कभी शेड तो कभी पक्की करवाने का आश्वासन देकर गोवंशों को भेजने का काम करती। सुविधाएं न मिलने पर गोशाला समिति गोवंशों को लेने से मना कर देती।
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करीब एक माह पहले बरसत रोड पर भैंसवाल मोड के पास श्रीराधा कृष्ण गोशाला समिति ने गोशाला के साथ एक नंदीशाला का शुभारंभ किया। यहां करीब 600 नंदियों के रखने की व्यवस्था की गई। समिति पदाधिकारियों ने निगम से मैनपावर का सहयोग मांगा। समिति ने कहा कि वे खुद ही शहर से गाय और बैल पकड़कर अपनी गोशाला और नंदीशाला में रखेंगे और उनकी देखभाल भी करेंगै। समिति ने खुद के प्रयासों से शहर से 220 नंदी पकड़े भी लेकिन निगम की ओर से सहयोग न मिलने पर समिति का हौसला टूटने लगा।
समिति के प्रधान राजीव जैन बताते हैं कि उनके पास खुद की गाड़ी है। कुछ कर्मचारी हैं। एंबुलेंस से लेकर अस्पताल और डॉक्टर भी हैं। चारे की व्यवस्था भी समिति की ओर से खुद की जा रही है। उनके पास सिर्फ निगम के सहयोग और कर्मचारियों की कमी है। कई बार शहर से गोवंश उठाने में रूट डायवर्ट करना पड़ता है। गोवंश पकड़ने में कर्मचारियो की संख्या ज्यादा चाहिए। इसे लेकर बार बार निगम और मेयर से सहयोग मांगा, जो आज तक नहीं मिला।
वर्जन-
कराएंगे समस्या समाधान : भट्ट
शहर की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक यह समस्या भी है, जो जिला प्रशासन के साथ निगम प्रशासन के संज्ञान में है। इसका जल्द ही निगम अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर हल निकलवाया जाएगा।
- दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।
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बता दें कि करीब चार साल पहले निगम ने शहर में स्ट्रे कैटल फ्री अभियान चलाया था। इसके तहत 1650 गोवंशों को पकड़कर नैन गोभ्यारण की गोशाला में छोड़ा गया था। इसके बाद यह काम बंद हो गया। ठीक दो साल पहले फिर से गोवंश पकड़ने शुरू किए गए। इस बार केवल 450 पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा गया। इसके बाद फिर से काम बंद करवा दिया गया। अब करीब सात माह पहले निगम ने फिर से शहर को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए अभियान चलाया है, लेकिन महज 850 गोवंशों को ही गोशाला तक पहुंचाया गया।
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हर बार इस काम के बंद होने का कारण निगम के गोशाला को दिए गए खोखले आश्वासन रहे। हर बार निगम और शहर की सरकार गोशाला में जाती है और गोशाला समिति को कभी चारे, कभी शेड तो कभी पक्की करवाने का आश्वासन देकर गोवंशों को भेजने का काम करती। सुविधाएं न मिलने पर गोशाला समिति गोवंशों को लेने से मना कर देती।
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करीब एक माह पहले बरसत रोड पर भैंसवाल मोड के पास श्रीराधा कृष्ण गोशाला समिति ने गोशाला के साथ एक नंदीशाला का शुभारंभ किया। यहां करीब 600 नंदियों के रखने की व्यवस्था की गई। समिति पदाधिकारियों ने निगम से मैनपावर का सहयोग मांगा। समिति ने कहा कि वे खुद ही शहर से गाय और बैल पकड़कर अपनी गोशाला और नंदीशाला में रखेंगे और उनकी देखभाल भी करेंगै। समिति ने खुद के प्रयासों से शहर से 220 नंदी पकड़े भी लेकिन निगम की ओर से सहयोग न मिलने पर समिति का हौसला टूटने लगा।
समिति के प्रधान राजीव जैन बताते हैं कि उनके पास खुद की गाड़ी है। कुछ कर्मचारी हैं। एंबुलेंस से लेकर अस्पताल और डॉक्टर भी हैं। चारे की व्यवस्था भी समिति की ओर से खुद की जा रही है। उनके पास सिर्फ निगम के सहयोग और कर्मचारियों की कमी है। कई बार शहर से गोवंश उठाने में रूट डायवर्ट करना पड़ता है। गोवंश पकड़ने में कर्मचारियो की संख्या ज्यादा चाहिए। इसे लेकर बार बार निगम और मेयर से सहयोग मांगा, जो आज तक नहीं मिला।
वर्जन-
कराएंगे समस्या समाधान : भट्ट
शहर की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक यह समस्या भी है, जो जिला प्रशासन के साथ निगम प्रशासन के संज्ञान में है। इसका जल्द ही निगम अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर हल निकलवाया जाएगा।
- दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।