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Panipat News: स्ट्रीट लाइट रिपेयरिंग में फिर फेल हुआ निगम
Wed, 13 Nov 2024 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 13 Nov 2024 02:22 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। शहर में लगी स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग के काम में निगम बार बार फेल साबित हो रहा है। इस काम के लिए अधिकारियों ने हर संभव प्रयास करके देखा लेकिन कामयाबी नहीं मिली। एक बार फिर से निगम खराब लाइटों की रिपेयरिंग के लिए एजेंसी को काम देने की तैयारी में है। इसके लिए सालाना खर्च का अनुमान लगाकर नया टेंडर लगाने की तैयारी की जा रही है।
हैरानी की बात ये है कि निगम के पास सिर्फ खराब लाइटों को ठीक करवाने के लिए खुद की मैनपावर भी है। निगम ने खुद खराब लाइटों को ठीक कराने के लिए लाखों रुपये का सामान भी खरीदा है। बावजूद शहर की लाइटें बंद पड़ी हैं।
इससे पहले भी निगम ने एक एजेंसी को खराब लाइटों को ठीक कराने का ठेका दिया था। लाइटें ठीक नहीं हो सकी तो ठेके को बीच में ही रद्द करना पड़ा। फिर से निगम ने अपने पुराने कर्मचारियों को सामान दिलाकर लाइटें ठीक करवाने का प्रयास करने लगा। जब बात नहीं बनी तो फिर से बैकफुट पर आकर नया टेंडर लगाने की तैयारी कर दी है।
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खास बात ये है कि इससे पहले भी खराब लाइटों को दुरुस्त कराने में निगम फेल साबित हुआ है। 28 नवंबर 2023 की सदन की बैठक में सबसे ज्यादा बवाल खराब लाइटों की मरम्मत न होने और शहर में लगने वाली नई 16000 लाइटों पर हुआ। जिसमें तत्कालीन निगम आयुक्त राहुल नरवाल ने खुद माना कि वे और उनकी टीम पिछले 11 माह से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के काम में फेल साबित हुई है। इसलिए निगम सदन उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर सकता है।
हालात ये हैं कि केवल स्ट्रीट लाइट रिपेयर के लिए लगाए गए 44 कर्मचारियों में से अब आधे भी फील्ड में नहीं है। फील्ड की बजाए ज्यादातर तो निगम की ही अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत हैं। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इस बात को अधिकारियों भी मानते हैं कि अब उनके पास पूरी मैनपावर नहीं है। जो मैनपावर रखी थी उसमें से कुछ कर्मचारी अब निगम की दूसरी शाखाओं में लगाए गए हैं। एक्सईएन गोपाल कलावत ने भी माना था कि उनकी मैनपावर उनके ही पास नहीं है। सोमवार से इसे वापस बुलाया जाएगा। इस समाचार को अमर उजाला ने 27 अक्तूबर के अंक में प्रकाशित भी किया था।
पहले लगाया था टेंडर, बीच में कराना पड़ा बंद अब फिर तैयारी
नगर निगम ने इससे पहले रिपेयरिंग का टेंडर लगाया। हर माह करीब छह सात लाख रुपये एजेंसी को दिए जाते थे। इसमें मैनपावर से लेकर सामान एजेंसी की जिम्मेदारी थी। बात नहीं बनी तो काम को बीच में ही रुकवा दिया गया। टेंडर दो माह पहले रद्द कर दिया गया।
एक साल के टेंडर में दस माह में से एजेंसी को सिर्फ दो माह का भुगतान किया। अब इस मामले में एक कमेटी बनाई गई है। अब निगम फिर से दस से 12 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च के हिसाब से नया टेंडर लगाने की तैयारी में है। फिलहाल शहर में करीब 15 हजार पुरानी और करीब 15 हजार नई लाइटों को लेकर लगाया जाएगा। यानी निगम की खुद की मैनपावर और सामान होने के बाद निगम अधिकारी फिर से एजेंसी से काम करवाने जा रहे हैं।
शहरवासियों को राहत देने के लिए खराब लाइटों को ठीक करवाने के लिए नया टेंडर लगाने का विचार विमर्श किया जा रहा है। अगर अधिकारियों की रजामंदी से ये प्रस्ताव सफल होता है तो शहर की खराब लाइटों को आसानी से ठीक कराया जा सकेगा। इससे शहर भर के लोगों को रात के समय रोशनी मिल सकेगी। -गोपाल कलावत, एक्सईएन, नगर निगम।
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पानीपत। शहर में लगी स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग के काम में निगम बार बार फेल साबित हो रहा है। इस काम के लिए अधिकारियों ने हर संभव प्रयास करके देखा लेकिन कामयाबी नहीं मिली। एक बार फिर से निगम खराब लाइटों की रिपेयरिंग के लिए एजेंसी को काम देने की तैयारी में है। इसके लिए सालाना खर्च का अनुमान लगाकर नया टेंडर लगाने की तैयारी की जा रही है।
हैरानी की बात ये है कि निगम के पास सिर्फ खराब लाइटों को ठीक करवाने के लिए खुद की मैनपावर भी है। निगम ने खुद खराब लाइटों को ठीक कराने के लिए लाखों रुपये का सामान भी खरीदा है। बावजूद शहर की लाइटें बंद पड़ी हैं।
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इससे पहले भी निगम ने एक एजेंसी को खराब लाइटों को ठीक कराने का ठेका दिया था। लाइटें ठीक नहीं हो सकी तो ठेके को बीच में ही रद्द करना पड़ा। फिर से निगम ने अपने पुराने कर्मचारियों को सामान दिलाकर लाइटें ठीक करवाने का प्रयास करने लगा। जब बात नहीं बनी तो फिर से बैकफुट पर आकर नया टेंडर लगाने की तैयारी कर दी है।
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खास बात ये है कि इससे पहले भी खराब लाइटों को दुरुस्त कराने में निगम फेल साबित हुआ है। 28 नवंबर 2023 की सदन की बैठक में सबसे ज्यादा बवाल खराब लाइटों की मरम्मत न होने और शहर में लगने वाली नई 16000 लाइटों पर हुआ। जिसमें तत्कालीन निगम आयुक्त राहुल नरवाल ने खुद माना कि वे और उनकी टीम पिछले 11 माह से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के काम में फेल साबित हुई है। इसलिए निगम सदन उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर सकता है।
हालात ये हैं कि केवल स्ट्रीट लाइट रिपेयर के लिए लगाए गए 44 कर्मचारियों में से अब आधे भी फील्ड में नहीं है। फील्ड की बजाए ज्यादातर तो निगम की ही अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत हैं। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इस बात को अधिकारियों भी मानते हैं कि अब उनके पास पूरी मैनपावर नहीं है। जो मैनपावर रखी थी उसमें से कुछ कर्मचारी अब निगम की दूसरी शाखाओं में लगाए गए हैं। एक्सईएन गोपाल कलावत ने भी माना था कि उनकी मैनपावर उनके ही पास नहीं है। सोमवार से इसे वापस बुलाया जाएगा। इस समाचार को अमर उजाला ने 27 अक्तूबर के अंक में प्रकाशित भी किया था।
पहले लगाया था टेंडर, बीच में कराना पड़ा बंद अब फिर तैयारी
नगर निगम ने इससे पहले रिपेयरिंग का टेंडर लगाया। हर माह करीब छह सात लाख रुपये एजेंसी को दिए जाते थे। इसमें मैनपावर से लेकर सामान एजेंसी की जिम्मेदारी थी। बात नहीं बनी तो काम को बीच में ही रुकवा दिया गया। टेंडर दो माह पहले रद्द कर दिया गया।
एक साल के टेंडर में दस माह में से एजेंसी को सिर्फ दो माह का भुगतान किया। अब इस मामले में एक कमेटी बनाई गई है। अब निगम फिर से दस से 12 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च के हिसाब से नया टेंडर लगाने की तैयारी में है। फिलहाल शहर में करीब 15 हजार पुरानी और करीब 15 हजार नई लाइटों को लेकर लगाया जाएगा। यानी निगम की खुद की मैनपावर और सामान होने के बाद निगम अधिकारी फिर से एजेंसी से काम करवाने जा रहे हैं।
शहरवासियों को राहत देने के लिए खराब लाइटों को ठीक करवाने के लिए नया टेंडर लगाने का विचार विमर्श किया जा रहा है। अगर अधिकारियों की रजामंदी से ये प्रस्ताव सफल होता है तो शहर की खराब लाइटों को आसानी से ठीक कराया जा सकेगा। इससे शहर भर के लोगों को रात के समय रोशनी मिल सकेगी। -गोपाल कलावत, एक्सईएन, नगर निगम।