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Panipat News: उपभोक्ता आयोग ने खारिज की याचिका
Fri, 26 Dec 2025 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 26 Dec 2025 02:02 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिजली और बीमा से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता की शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायत में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके आधार पर उपभोक्ता को राहत दी जा सके।
मामला मतलौडा क्षेत्र की रहने वाले उपभोक्ता विरेंद्र कुमारी ने हाउसिंग बोर्ड हरियाणा, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। शिकायत में बिजली आपूर्ति और बीमा से संबंधित नुकसान को लेकर जिम्मेदारी तय करने और मुआवजा दिलाने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर. के. डोगरा और सदस्य विनीत कौशिक की पीठ के समक्ष हुई। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुसुम देवी ने पक्ष रखा, जबकि विपक्षी पक्षों की ओर से अलग-अलग अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल किया। आयोग ने मामले में शेष बहस सुनने के बाद 16 दिसंबर 2025 को आदेश सुरक्षित किया और उसी दिन पारित आदेश में शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर शिकायतकर्ता के दावों में दम नहीं पाया गया। ऐसे में उपभोक्ता को कोई राहत देना न्यायसंगत नहीं है।
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पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिजली और बीमा से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता की शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायत में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके आधार पर उपभोक्ता को राहत दी जा सके।
मामला मतलौडा क्षेत्र की रहने वाले उपभोक्ता विरेंद्र कुमारी ने हाउसिंग बोर्ड हरियाणा, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। शिकायत में बिजली आपूर्ति और बीमा से संबंधित नुकसान को लेकर जिम्मेदारी तय करने और मुआवजा दिलाने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर. के. डोगरा और सदस्य विनीत कौशिक की पीठ के समक्ष हुई। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुसुम देवी ने पक्ष रखा, जबकि विपक्षी पक्षों की ओर से अलग-अलग अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल किया। आयोग ने मामले में शेष बहस सुनने के बाद 16 दिसंबर 2025 को आदेश सुरक्षित किया और उसी दिन पारित आदेश में शिकायत को खारिज कर दिया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर शिकायतकर्ता के दावों में दम नहीं पाया गया। ऐसे में उपभोक्ता को कोई राहत देना न्यायसंगत नहीं है।
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