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Panipat News: समय पर काम न करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी आयोग की गाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2024 06:44 AM IST
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Commission's punishment will fall on officers who do not work on time
पानीपत। अब समय पर काम न करने वाले अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। राइट टू सर्विस एक्ट क तहत काम न करने वाले अधिकारियों की मॉनिटरिंग हो रही है। जिन पर कार्रवाई की अनुंशसा हरियााणा अधिकार सेवा आयोग की ओर से की जा रही है। आयोग ने नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशानात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है। आयोग की ओर से भेजे गए पत्राचार में एक्सईएन से पूछा गया है कि राइट टू सर्विस एक्ट के दौरान शिकायतों के निपटान में देरी क्यों हुई। इसका जवाब भी भेजें और बताएं कि आपके खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। नगर निगम में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित शिकायतों के समय पर निदान न होने पर आयोग की ओर से निगम अधिकारियों को ये पत्राचार किया गया है। हालांकि पत्राचार में केवल अधिकारियों के पद का ब्योरा है उनके नाम नहीं बताए गए हैं। आयोग की ओर से भेजे गए पत्राचार में हवाला दिया गया है कि जिन शिकायतों की आरटीएस तिथि जून में भी उनकी अपील सितंबर में हुई। इनकी खराब लाइटों की रिपयेरिंग या नई लाइटों को लगवाने का काम समय रहते क्यों नहीं किया गया। इसे लेकर मुख्यालय की ओर से अधिकारियों ने निगम अधिकारियों के पास एक वीडियो कान्फ्रेंस तक की गई।
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गौरतलब है कि आयोग की ओर से ऐसे पांच लोगों के केस आयोग ने अधिकारियों को भेज इनका जवाब मांगा है। जिनमें शहरवासी सतीश ने 25 अप्रैल की एक शिकायत, प्रवीण बुद्धिराजा की दो मई की एक शिकायत, रोहित की 24 मई, राकेश कुमार की 27 मई और विकास बांगड की 28 मई की शिकायत का जिक्र किया गया है।
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आस पोर्टल से होती है मॉनिटरिंग-
आरटीएस दायरे के अधीन आने वाले सुविधाओं की मॉनिटरिंग हरियाणा अधिकार सेवा आयोग आस पोर्टल यानी ऑटो अपील सिस्टम पोर्टल से करता है। जिन शिकायतों का निदान समय पर नहीं होता, ये पोर्टल स्वत: उनको चिह्नित कर आयोग को भेजता है। स्ट्रीट लाइट संबंधित शिकायतों का निदान सात से 14 दिन में करना अनिवार्य होता है। निदान न होने पर वरिष्ठ अधिकारियों के पास अपील के तौर पर केस जाता है। जिसमें पहली अपील एक्सईएन और दूसरी एसई के पास होती है। अपील में भी जवाब न जाने पर आयोग की ओर से संज्ञान लिया जाता है।
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इस बारे नगर निगम आयुक्त डॉ. जयेंद्र सिंह छिल्लर का कहना है कि अधिकारियों को आरटीएस के तहत काम करना होगा। हालांकि ये मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा कुछ मामला है तो आयोग की अनुशंसा से पहले वे ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
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