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सफाई के टेंडर, नियमों का विरोध कर रहे जनप्रतिनिधि
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पानीपत। शहर की सफाई के लिए चार जोन बनाकर लगाए गए टेंडरों और इनकी नियम एवं शर्तों का जनप्रतिनिधियों ने विरोध शुरू कर दिया है। पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकारी केवल पुराने ठेकेदारों को ही फायदा पहुंचाना चाहते हैं। हालात ऐसे बना दिए हैं कि चाहे टेंडर नए लगें या रद्द हों, दोनों ही सूरतों में पुराने ठेकेदारों को फायदा है।
पार्षदों का कहना है कि अगर नए टेंडर को मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिली और रद्द हुआ तो पहले से चले आ रहे ठेके को ही बढ़ाया जाएगा। पिछले कई महीनों से टेंडर बढ़ते आ रहे हैं। अगर मुख्यालय की मंजूरी से टेंडर खुल जाता है तो नियम व शर्तें ऐसी हैं कि टेंडर चहेते और पुराने ठेकेदारों को ही मिलेंगे। इससे निगम और शहर की जनता को कोई फायदा नहीं होगा। आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर चार जोन के टेंडर लगवाए वरना मुख्यालय ने एक जोन की मंजूरी ही दी है।
इन टेंडरों और इनकी नियम व शर्तों का पूरा विरोध करते हुए पार्षदों ने कहा कि वे अधिकारियों से जवाब तलब करेंगे। इसकी शिकायत तक मुख्यालय से लेकर शहर और प्रदेश स्तर के नेताओं से भी की जाएगी। इस प्रकार से शहर को लुटने नहीं दिया जाएगा। इस टेंडर प्रक्रिया से निगम का सफाई पर बजट पहले भी करीब सवा तीन करोड़ था अब भी सवा तीन करोड़ रुपये ही बनेगा। इससे शहर को कोई फायदा तो होगा नहीं ये केवल जनता और जनप्रतिनिधियों को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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22 दिसंबर को खुलेंगे टेंडर
शहर की सफाई के चार जोन के शॉर्ट टर्म टेंडर निगम ने 11 दिसंबर को लगाए हैं, जो 22 दिसंबर को खुलेंगे। निकाय मुख्यालय ने केवल एक जोन बनाकर डेढ़ करोड़ में सफाई करवाने की मंजूरी दी है। हालांकि फिर से प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया। हालांकि अभी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन निगम ने टेंडर लगा दिए है। शहर को वार्ड नंबर एक से सात, आठ से 14, 15 से 20 और 21 से 26 चार जोन में बांटा गया है।
करेंगे विरोध
निगम की इस टेंडर प्रक्रिया और चार जोन में टेंडर लगाने का पूरा विरोध किया जाएगा। इससे शहर को कोई फायदा नहीं होगा केवल कुछ लोगों की जेब ही भरेंगी। निगम ने चार जोन में टेंडर का पूरा ड्रामा किया है, जिससे केवल पुराने ठेकेदारों को ही फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। -चंचल डाबर, पार्षद, वार्ड नंबर 22
निगम का षड्यंत्र- धींगड़ा
चार जोन में सफाई का टेंडर लगवाना निगम का एक सोचा समझा षड्यंत्र है। अगर टेंडर लगे तो नियम व शर्तें ऐसी हैं कि केवल पुराने ठेकेदारों को ही इसका फायदा मिलेगा और अगर मुख्यालय ने इनको मंजूरी नहीं दी तो भी इन पुराने टेंडरों को ही सफाई का हवाला देकर बढ़ाया जाता रहेगा। -अश्वनी धींगड़ा, पार्षद, वार्ड नंबर 23
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पार्षदों का कहना है कि अगर नए टेंडर को मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिली और रद्द हुआ तो पहले से चले आ रहे ठेके को ही बढ़ाया जाएगा। पिछले कई महीनों से टेंडर बढ़ते आ रहे हैं। अगर मुख्यालय की मंजूरी से टेंडर खुल जाता है तो नियम व शर्तें ऐसी हैं कि टेंडर चहेते और पुराने ठेकेदारों को ही मिलेंगे। इससे निगम और शहर की जनता को कोई फायदा नहीं होगा। आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर चार जोन के टेंडर लगवाए वरना मुख्यालय ने एक जोन की मंजूरी ही दी है।
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इन टेंडरों और इनकी नियम व शर्तों का पूरा विरोध करते हुए पार्षदों ने कहा कि वे अधिकारियों से जवाब तलब करेंगे। इसकी शिकायत तक मुख्यालय से लेकर शहर और प्रदेश स्तर के नेताओं से भी की जाएगी। इस प्रकार से शहर को लुटने नहीं दिया जाएगा। इस टेंडर प्रक्रिया से निगम का सफाई पर बजट पहले भी करीब सवा तीन करोड़ था अब भी सवा तीन करोड़ रुपये ही बनेगा। इससे शहर को कोई फायदा तो होगा नहीं ये केवल जनता और जनप्रतिनिधियों को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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22 दिसंबर को खुलेंगे टेंडर
शहर की सफाई के चार जोन के शॉर्ट टर्म टेंडर निगम ने 11 दिसंबर को लगाए हैं, जो 22 दिसंबर को खुलेंगे। निकाय मुख्यालय ने केवल एक जोन बनाकर डेढ़ करोड़ में सफाई करवाने की मंजूरी दी है। हालांकि फिर से प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया। हालांकि अभी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन निगम ने टेंडर लगा दिए है। शहर को वार्ड नंबर एक से सात, आठ से 14, 15 से 20 और 21 से 26 चार जोन में बांटा गया है।
करेंगे विरोध
निगम की इस टेंडर प्रक्रिया और चार जोन में टेंडर लगाने का पूरा विरोध किया जाएगा। इससे शहर को कोई फायदा नहीं होगा केवल कुछ लोगों की जेब ही भरेंगी। निगम ने चार जोन में टेंडर का पूरा ड्रामा किया है, जिससे केवल पुराने ठेकेदारों को ही फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। -चंचल डाबर, पार्षद, वार्ड नंबर 22
निगम का षड्यंत्र- धींगड़ा
चार जोन में सफाई का टेंडर लगवाना निगम का एक सोचा समझा षड्यंत्र है। अगर टेंडर लगे तो नियम व शर्तें ऐसी हैं कि केवल पुराने ठेकेदारों को ही इसका फायदा मिलेगा और अगर मुख्यालय ने इनको मंजूरी नहीं दी तो भी इन पुराने टेंडरों को ही सफाई का हवाला देकर बढ़ाया जाता रहेगा। -अश्वनी धींगड़ा, पार्षद, वार्ड नंबर 23