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सफाई व स्वच्छता जीवन में जरूरी : उपेंद्र मुनि
Tue, 26 Aug 2025 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 26 Aug 2025 01:33 AM IST
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प्रवचन सुनते श्रावक-श्राविकाएं। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Samvad
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संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। नई अनाज मंडी जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने सोमवार को सफाई व स्वच्छता पर प्रवचन दिया। मुनि ने सफाई व स्वच्छता को जीवन में जरूरी बताया। मुनि ने कहा कि सफाई और स्वच्छता आपस में जुड़े हुए शब्द हैं। जहां सफाई का मतलब किसी चीज का बाहरी रूप से गंदगी-मुक्त होना है। वहीं स्वच्छता एक व्यापक अवधारणा है जिसमें शारीरिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए साफ-सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण शामिल है। बीमारियां रोकने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता ( हाथ धोना) और सार्वजनिक स्वच्छता ( कचरा प्रबंधन) दोनों जरूरी हैं। सार्वजनिक जीवन में शुचिता घरों की गंदगी, कूड़ा डस्टबीन- सुनो। खर लड़े लातों से, मूर्ख लड़े हाथों से कुत्ता लड़े दांतों से, पंडित लड़े बातों से,अस्पताल, बस स्टैंड, गलियां, फेंकने का सामान स्वास्थ्य के हानिकारक, संत न बन सको तो शांत बनी जो सदगति चाहो जीव की, तज दो बातां चार। पर निंदा, पर ईर्ष्या, पर धन, वे पर नार सहयोग जब भी मेरी किस्ती, सैलाब में आ जाती है। मां को भुले नहीं मेरी मां दुआ करती हुई, ख्वाब में आ जाती है। किसी को घर मिला हिस्से में तो किसी के दुकान आई। मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मेरी मां आई। कहते- कुछ नहीं होगा तो अपने आंचल में छुपा लेगी। समोशरण प्रेलेक्ट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया। प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली महिलाओं व बच्चों को सम्मानित किया गया।
समालखा। नई अनाज मंडी जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने सोमवार को सफाई व स्वच्छता पर प्रवचन दिया। मुनि ने सफाई व स्वच्छता को जीवन में जरूरी बताया। मुनि ने कहा कि सफाई और स्वच्छता आपस में जुड़े हुए शब्द हैं। जहां सफाई का मतलब किसी चीज का बाहरी रूप से गंदगी-मुक्त होना है। वहीं स्वच्छता एक व्यापक अवधारणा है जिसमें शारीरिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए साफ-सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण शामिल है। बीमारियां रोकने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता ( हाथ धोना) और सार्वजनिक स्वच्छता ( कचरा प्रबंधन) दोनों जरूरी हैं। सार्वजनिक जीवन में शुचिता घरों की गंदगी, कूड़ा डस्टबीन- सुनो। खर लड़े लातों से, मूर्ख लड़े हाथों से कुत्ता लड़े दांतों से, पंडित लड़े बातों से,अस्पताल, बस स्टैंड, गलियां, फेंकने का सामान स्वास्थ्य के हानिकारक, संत न बन सको तो शांत बनी जो सदगति चाहो जीव की, तज दो बातां चार। पर निंदा, पर ईर्ष्या, पर धन, वे पर नार सहयोग जब भी मेरी किस्ती, सैलाब में आ जाती है। मां को भुले नहीं मेरी मां दुआ करती हुई, ख्वाब में आ जाती है। किसी को घर मिला हिस्से में तो किसी के दुकान आई। मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मेरी मां आई। कहते- कुछ नहीं होगा तो अपने आंचल में छुपा लेगी। समोशरण प्रेलेक्ट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया। प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली महिलाओं व बच्चों को सम्मानित किया गया।

प्रवचन सुनते श्रावक-श्राविकाएं। स्रोत : स्वयं- फोटो : Samvad
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