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शहर के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं करने पर बिल्डिंग इंस्पेक्टर सस्पेंड
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शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं करने और नक्शों को पास न करने के मामले में नगर निगम कमिश्नर ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया है। उन्होंने आदेश दिया है कि बगैर अनुुमति बिल्डिंग इंस्पेक्टर हेडक्वार्टर नहीं छोड़ सकते हैं, यानी शहर से बाहर नहीं जा सकते हैं। बिल्डिंग इंस्पेक्टर पर आरोप है कि शहर में 200 से ज्यादा बिल्डिंग अवैध बनी हुई हैं। उनके नक्शों को पास करने में गड़बड़ी हुई है। इन अवैध बिल्डिंगों को कभी नोटिस ही नहीं दिया गया। कार्रवाई करने की चेतावनी देने के बावजूद बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने कार्रवाई नहीं की, जिस पर उसे सस्पेंट कर दिया गया है।
शहर में लगातार कब्जे बढ़ते जा रहे है, रोज नई बिल्डिंग बन रही है, लेकिन निगम के अधिकारी को सूचना होने के बावजूद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। शहर की हर सड़क चाहे सनौली रोड हो, गोहाना रोड हो, जीटी रोड हो, सनौली रोड हो आदि पर बने अस्पताल, होटल आदि में किसी के पास भी नक्शे की मान्यता नहीं है। अगर उनके पास है भी तो वह नियमानुसार गलत बनी हुई थी। निगम कमिश्नर ओम प्रकाश ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर बृजेश हुड्डा को इन पर कार्रवाई करने के बार-बार आदेश दिए, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई।
इंस्पेक्टर ने जितनी भी फाइलों को दबा रखा था, उनको कमिश्नर ने एक्सइएन और एससी की मदद से निकलवाया व उनकी जांच करने के आदेेेश दिए। इसके साथ ही कमिश्नर ने बताया कि उन्होंने पहले भी बिल्डिंग इंस्पेक्टर को आदेश दिए थे कि वह नक्शे की फाइलों की मौके पर जाकर जांच करें व अवैध बिल्डिंग मालिकों को नोटिस दे, लेकिन उसने कोई सुनवाई नहीं की। इंस्पेक्टर अपनी मनमानी से नक्शे पास करता था व अपनी मनमानी से ही अवैध बिल्डिंग मालिकों को नोटिस देता था, इसी समस्या से परेशान होकर कमिश्नर ओम प्रकाश ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर बृजेश हुड्डा को हटा दिया है। इसकी जगह जेई वीरेंद्र मलिक को उनका अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
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नगर निगम से कर रहा था खिलवाड़, मनमर्जी से करता था काम-
नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम के पास लगभग सैकड़ों फाइल नक्शे पास के लिए पड़ी हुई है, जिनकों साल से ज्यादा का समय हो चुका है। कमिश्नर ओम प्रकाश ने इन नक्शों को पास कराने के लिए तीन बार बैठक बुलाई, पांच बार खुद बुलाकर आदेश दिया, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं। कमिश्नर ने कहा कि इंस्पेक्टर नगर निगम के साथ धोखाधड़ी कर रहा था। उनके पास इस बारे में कई शिकायतें आ चुकी थीं, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया।
तीन साल में 14 बार चला बुलडोजर, दिखावे के लिए गिराई सिर्फ गरीबों की झोपड़ियां
नगर निगम ने पिछले तीन साल में 14 बार गरीबों पर कार्रवाई की है। बस अड्डे के सामने लगने वाली रेहड़ी हटा दी गई। यहां की रेहड़ी सुखदेव नगर रोड व पुल के नीचे पहुंच गई। जीटी रोड, सनौली रोड, गोहाना रोड और असंध रोड से कई बार रेहड़ी हटाई गई। सेक्टर-25, 24, 12, वार्ड-12,13, जाटल रोड और असंध रोड सहित 9 कॉलोनियों में झोपड़ी भी तोड़ी गई। यह बात दूसरी है कि वह कार्रवाई भी दिखावे के निकली। सेक्टर-25 में खोखे भी लग गए और झोपड़ी भी। चूंकि, दिखावे की कार्रवाई होती है। इसलिए निगम की टीम पहुंचने से पहले ही दुकानदार सामान समेट लेते हैं।
- कमिश्नर को बुला बुला कर अपने लेवल पर कराने पड़ते थे नक्शे पास-
शहरवासियों की नक्शे पास कराने की समस्या जैसे जैसे बढ़ रही थी, वैसे वैसे कमिश्नर पर समस्या का दबाव बढ़ता जा रहा था। अगर कोई बुजुर्ग महिला व पुरुष कमिश्नर के पास समस्या लेकर आता था, तो कमिश्नर को बार बार इंस्पेक्टर को बुलाना पड़ता था और अपने लेवल पर उसको आदेश देता था, कि आप नक्शा की फाइल प्रक्रिया आगे बढ़ाओ और मौके पर जाकर मुआयना करो, लेकिन फिर भी वह कोई सुनवाई नहीं करता था।
- जांच के लिए कमेटी गठित
कमिश्नर ने नक्शे पास व नोटिस की जांच के लिए टीम गठित कर दी है, क्योंकि आशंका थी कि अब से पहले जो भी काम हुए हैं, उन सब में भ्रष्टाचार किया गया है।
जब अमर उजाला संवाददाता ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर से इस बारे में बात की और पूछा कि आपके ऊपर आरोप है कि आप काम ठीक नहीं करते थे, तो उन्होंने जवाब दिया कि यार मैं ईब के बताउं, मैं इसमें कुछ नहीं कहना चाहता। मुझ पर लगाए गए आरोप निराधार है।
- बृजेश हुड्डा, सस्पेंड बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम पानीपत
शहर से अवैैध बिल्डिंग और नक्शे की काफी समस्याएं आ रही थी। वहीं निगम में भी नक्शे की सैकड़ों फाइल पेंडिंग थी, इसके लिए बार बार आदेश दिए गए थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। इसी के साथ ही अवैध बिल्डिंग मालिकों को भी नोटिस देने के लिए कहा था, लेकिन वह भी अनसुनी की। जिसके कारण उसे सस्पेंड कर दिया गया है और उनकी जगह वीरेंद्र मलिक को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
- ओम प्रकाश, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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शहर में लगातार कब्जे बढ़ते जा रहे है, रोज नई बिल्डिंग बन रही है, लेकिन निगम के अधिकारी को सूचना होने के बावजूद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। शहर की हर सड़क चाहे सनौली रोड हो, गोहाना रोड हो, जीटी रोड हो, सनौली रोड हो आदि पर बने अस्पताल, होटल आदि में किसी के पास भी नक्शे की मान्यता नहीं है। अगर उनके पास है भी तो वह नियमानुसार गलत बनी हुई थी। निगम कमिश्नर ओम प्रकाश ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर बृजेश हुड्डा को इन पर कार्रवाई करने के बार-बार आदेश दिए, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई।
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इंस्पेक्टर ने जितनी भी फाइलों को दबा रखा था, उनको कमिश्नर ने एक्सइएन और एससी की मदद से निकलवाया व उनकी जांच करने के आदेेेश दिए। इसके साथ ही कमिश्नर ने बताया कि उन्होंने पहले भी बिल्डिंग इंस्पेक्टर को आदेश दिए थे कि वह नक्शे की फाइलों की मौके पर जाकर जांच करें व अवैध बिल्डिंग मालिकों को नोटिस दे, लेकिन उसने कोई सुनवाई नहीं की। इंस्पेक्टर अपनी मनमानी से नक्शे पास करता था व अपनी मनमानी से ही अवैध बिल्डिंग मालिकों को नोटिस देता था, इसी समस्या से परेशान होकर कमिश्नर ओम प्रकाश ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर बृजेश हुड्डा को हटा दिया है। इसकी जगह जेई वीरेंद्र मलिक को उनका अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
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नगर निगम से कर रहा था खिलवाड़, मनमर्जी से करता था काम-
नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम के पास लगभग सैकड़ों फाइल नक्शे पास के लिए पड़ी हुई है, जिनकों साल से ज्यादा का समय हो चुका है। कमिश्नर ओम प्रकाश ने इन नक्शों को पास कराने के लिए तीन बार बैठक बुलाई, पांच बार खुद बुलाकर आदेश दिया, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं। कमिश्नर ने कहा कि इंस्पेक्टर नगर निगम के साथ धोखाधड़ी कर रहा था। उनके पास इस बारे में कई शिकायतें आ चुकी थीं, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया।
तीन साल में 14 बार चला बुलडोजर, दिखावे के लिए गिराई सिर्फ गरीबों की झोपड़ियां
नगर निगम ने पिछले तीन साल में 14 बार गरीबों पर कार्रवाई की है। बस अड्डे के सामने लगने वाली रेहड़ी हटा दी गई। यहां की रेहड़ी सुखदेव नगर रोड व पुल के नीचे पहुंच गई। जीटी रोड, सनौली रोड, गोहाना रोड और असंध रोड से कई बार रेहड़ी हटाई गई। सेक्टर-25, 24, 12, वार्ड-12,13, जाटल रोड और असंध रोड सहित 9 कॉलोनियों में झोपड़ी भी तोड़ी गई। यह बात दूसरी है कि वह कार्रवाई भी दिखावे के निकली। सेक्टर-25 में खोखे भी लग गए और झोपड़ी भी। चूंकि, दिखावे की कार्रवाई होती है। इसलिए निगम की टीम पहुंचने से पहले ही दुकानदार सामान समेट लेते हैं।
- कमिश्नर को बुला बुला कर अपने लेवल पर कराने पड़ते थे नक्शे पास-
शहरवासियों की नक्शे पास कराने की समस्या जैसे जैसे बढ़ रही थी, वैसे वैसे कमिश्नर पर समस्या का दबाव बढ़ता जा रहा था। अगर कोई बुजुर्ग महिला व पुरुष कमिश्नर के पास समस्या लेकर आता था, तो कमिश्नर को बार बार इंस्पेक्टर को बुलाना पड़ता था और अपने लेवल पर उसको आदेश देता था, कि आप नक्शा की फाइल प्रक्रिया आगे बढ़ाओ और मौके पर जाकर मुआयना करो, लेकिन फिर भी वह कोई सुनवाई नहीं करता था।
- जांच के लिए कमेटी गठित
कमिश्नर ने नक्शे पास व नोटिस की जांच के लिए टीम गठित कर दी है, क्योंकि आशंका थी कि अब से पहले जो भी काम हुए हैं, उन सब में भ्रष्टाचार किया गया है।
जब अमर उजाला संवाददाता ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर से इस बारे में बात की और पूछा कि आपके ऊपर आरोप है कि आप काम ठीक नहीं करते थे, तो उन्होंने जवाब दिया कि यार मैं ईब के बताउं, मैं इसमें कुछ नहीं कहना चाहता। मुझ पर लगाए गए आरोप निराधार है।
- बृजेश हुड्डा, सस्पेंड बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम पानीपत
शहर से अवैैध बिल्डिंग और नक्शे की काफी समस्याएं आ रही थी। वहीं निगम में भी नक्शे की सैकड़ों फाइल पेंडिंग थी, इसके लिए बार बार आदेश दिए गए थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की। इसी के साथ ही अवैध बिल्डिंग मालिकों को भी नोटिस देने के लिए कहा था, लेकिन वह भी अनसुनी की। जिसके कारण उसे सस्पेंड कर दिया गया है और उनकी जगह वीरेंद्र मलिक को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
- ओम प्रकाश, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।