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Panipat News: फैक्ट्रियों , ढाबों, ईंट भट्ठों व दुकानों पर दम तोड़ रहा बचपन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2024 06:23 AM IST
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Childhood dying in factories, dhabas, brick kilns and shops
पानीपत। फैक्ट्रियों, ढाबों, ईंट भट्ठों व दुकानों पर बचपन दम तोड़ रहा है। इन संस्थानों के मालिक बच्चों को सस्ते श्रमिक के रूप में देखते हैं। माता-पिता भी आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बच्चों को श्रम में झोंक देते हैं। पानीपत औद्योगिक नगरी है। यहां 20 हजार से अधिक छोटे व बड़े उद्योग हैं। लगभग पांच लाख प्रवासी लोग यहां रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार 20 हजार से अधिक प्रवासी बच्चे बाल श्रम की दलदल में फंसे हैं।
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इनके अलावा नेपाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश की किशोरियां भी कोठियों में नौकरानियों के रूप में काम करते हुए मिल जाएंगी। इन किशोरियों को एक गिरोह सपने दिखाकर दूसरे प्रदेशों से दिल्ली बुलाता है और फिर वहां से इनको कोठियों में सप्लाई किया जाता है। पानीपत के सबसे पॉश क्षेत्र मॉडल टाउन, एल्डिको, अंसल व टीडीआई सिटी में किशोरियां भी नौकरानियों के रूप में काम कर रही है। यह किशोरियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग का भी शिकार हैं। बिहार, झारखंड, असम व उड़ीसा से पानीपत व दिल्ली में लड़कियों को लाया जाता है। इनको वहां से कोठियों में काम, ऑफिसों में नौकरी दिलाने के नाम पर झांसे में लिया जाता है। दिल्ली लाकर इनको दलालों के पास छोड़ा जाता है। वहां इनको कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा जाता है। इन किशोरियों को नौकरानी बनाने के साथ साथ इनको देह व्यापार के अड्डों पर छोड़ दिया जाता है।
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दिल्ली से भेजी जा रहीं किशोरी नौकरानियां

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह कारोबार दिल्ली से शुरू होता है। दिल्ली के सकरपुर, लक्ष्मीनगर, भजनपुरा, विकासपुरी,उत्तम नगर, संयम विहार, कुसुमपुर, प्रीतमपुरा, कंजावला व नरेला में प्लेसमेंट ऑफिस चल रहे हैं। वहां से किशोरियों को नौकरानियों के रूप में भेजा जाता है। इनकी पहली पंसद पानीपत है। यहां बाल श्रम आम है और दिल्ली के नजदीक भी है। यह लड़कियां कम पढ़ी लिखी होती हैं। एक बार फंसने के बाद यह बाल श्रम से बाहर नहीं निकल पाती और इन्हें ऐसे ही कम पैसों में यहां काम करना पड़ता है।
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वर्जन-

बाल कल्याण समिति समेत जितने भी विभाग बच्चों के कल्याण से जुड़े हैं सभी को बाल कल्याण के लिए काम करने के निर्देश दिए गए हैं। बाल श्रम के खिलाफ काम करने के भी निर्देश दिए हैं। हाल में पानीपत में हुई बैठक में भी इस विषय पर गंभीरता से चर्चा हुई है। सभी विभागों को फैक्ट्रियों, ढाबों व शोरूम में दबिश देने के निर्देश दिए हैं।
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