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Panipat News: नहाए-खाए से शुरू होगा छठ महापर्व
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थर्मल रजवाहे पर छह महापर्व को लेकर घाट तैयार करते लोग। स्रोत : सोशल मीडिया
पानीपत। दीपावली के बाद श्रद्धालुओं को अब आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का बेसब्री से इंतजार हैं। नहाय-खाय के साथ ही छठ पूजा की शुरुआत हो जाती है। इस पर्व की विशेष धार्मिक मान्यता है। छठ पूजा का पावन महापर्व मंगलवार 5 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू हो रहा है।
विद्वानों के अनुसार आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन घरों में चावल, लौकी तथा चने की दाल बनाई जाती है। दाल-भात के सेवन के बाद लोग अगले दिन यानी छह नवंबर को खरना की तैयारी में जुट जाएंगे। सात को संध्या अर्घ्य है। आठ को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन किया जाएगा।
देश-प्रदेश सहित जिले में छठ की तैयारियां जोरों पर हैं। छठ घाटों की साफ-सफाई की जा रही है। छठ पूजा समितियां भी छठ पूजा की तैयारियों में अभी से जुट गई हैं।
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छठ घाटों को संवारा जाने लगा है। पूर्वांचल सेवा समितियों के अनुसार असंध रोड, जाटल रोड, गोहाना रोड दिल्ली पैरलल नहर के पास छठ पूजा के आयोजन की तैयारी की है। यहां घाटों को संवारा जा रहा है। सात नवंबर को संध्या अर्घ्य वाले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
चार दिन का होगा छठ महोत्सव
5 नवंबर-नहाय खाय
6 नवंबर-खरना
7 नवंबर-संध्या अर्घ्य
8 नवंबर-उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का समापन।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है छठ महापर्व
आस्था का महापर्व छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। छठ पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता होती है। इस कठिन व्रत को महिलाएं और पुरुष घर में खुशहाली और संतान की सलामती के लिए रखते हैं। इसे सूर्य षष्ठी, छठी और डाला छठ के नामों से भी जाना जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है।
कब है छठ पूजा का नहाय-खाय
इस साल नहाय-खाय मंगलवार 5 नवंबर के दिन होगा। पंचांग के अनुसार, नहाय खाए कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान-ध्यान करती है और फिर नहाय-खाय करती है। नहाए-खाए के दिन लौकी और भात का प्रसाद बनाने की परंपरा है।
अस्ताचलगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा दीपावली से छह दिन बाद की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि वीरवार सात नवंबर की रात 12:41 बजे शुरू होगी और इसका समापन शुक्रवार आठ नवंबर की रात 12:34 बजे होगा। ऐसे में सात नवंबर के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा जबकि सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा।
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विद्वानों के अनुसार आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन घरों में चावल, लौकी तथा चने की दाल बनाई जाती है। दाल-भात के सेवन के बाद लोग अगले दिन यानी छह नवंबर को खरना की तैयारी में जुट जाएंगे। सात को संध्या अर्घ्य है। आठ को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन किया जाएगा।
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देश-प्रदेश सहित जिले में छठ की तैयारियां जोरों पर हैं। छठ घाटों की साफ-सफाई की जा रही है। छठ पूजा समितियां भी छठ पूजा की तैयारियों में अभी से जुट गई हैं।
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छठ घाटों को संवारा जाने लगा है। पूर्वांचल सेवा समितियों के अनुसार असंध रोड, जाटल रोड, गोहाना रोड दिल्ली पैरलल नहर के पास छठ पूजा के आयोजन की तैयारी की है। यहां घाटों को संवारा जा रहा है। सात नवंबर को संध्या अर्घ्य वाले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
चार दिन का होगा छठ महोत्सव
5 नवंबर-नहाय खाय
6 नवंबर-खरना
7 नवंबर-संध्या अर्घ्य
8 नवंबर-उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का समापन।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है छठ महापर्व
आस्था का महापर्व छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। छठ पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता होती है। इस कठिन व्रत को महिलाएं और पुरुष घर में खुशहाली और संतान की सलामती के लिए रखते हैं। इसे सूर्य षष्ठी, छठी और डाला छठ के नामों से भी जाना जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है।
कब है छठ पूजा का नहाय-खाय
इस साल नहाय-खाय मंगलवार 5 नवंबर के दिन होगा। पंचांग के अनुसार, नहाय खाए कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान-ध्यान करती है और फिर नहाय-खाय करती है। नहाए-खाए के दिन लौकी और भात का प्रसाद बनाने की परंपरा है।
अस्ताचलगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा दीपावली से छह दिन बाद की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि वीरवार सात नवंबर की रात 12:41 बजे शुरू होगी और इसका समापन शुक्रवार आठ नवंबर की रात 12:34 बजे होगा। ऐसे में सात नवंबर के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा जबकि सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा।