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कॉमर्शियल इमारत की कैटेगरी बदल बना दिया इंडस्ट्री और घटा दिए 13 लाख

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 01:33 AM IST
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Changed the category of commercial building to industry and reduced 13 lakhs
पानीपत। नगर निगम की संपत्ति कर शाखा में श्रेणी बदलकर लाखों रुपये घटाने का एक और नया गड़बड़झाला सामने आया है। इसमें निगम कर्मियों ने मौके पर जाकर दुकान और शोरूम वाली एक कॉमर्शियल इमारत को श्रेणी बदलकर इंडस्ट्री दिखा दिया। इसकी रिपोर्ट तैयार करवाई गई। इससे इस इमारत पर कॉमर्शियल कैटेगरी से बनने वाला करीब 7 से 8 लाख रुपये का टैक्स कुछ हजार में ही सिमट गया। इतना ही नहीं इस श्रेणी बदलने से निगम को एनडीसी चार्ज का भी करीब 6 लाख का चूना लगा है। कुल मिलाकर इस प्रकार करीब 13 लाख रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ।
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हैरान करने वाली बात ये है कि जिस प्रॉपर्टी को पहले बिल में करीब 800 गज से भी ज्यादा दर्शाया गया था। अब इस बिल को भागों में बांटते हुए महज 400 गज के आसपास कर दिया गया है। इसके पहले बिल में चार फ्लोर थे अब महज एक फ्लोर दर्शाया गया है। निगम अधिकारियों भी अपने कर्मचारियों के कारनामे से हैरत में हैं। कर्मचारियों ने मौके पर जाकर रिपोर्ट तक की है और पूरी फाइल पर अधिकारियों तक के हस्ताक्षर तक करवा लिए। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच पड़ताल की जाएगी और फाइल को पढ़ने और मौका देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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प्रॉपर्टी टैक्स और एनडीसी चार्ज पर निगम को ऐसे लगाया चूना
हुआ यूं कि पुराने वार्ड नंबर 10 और अब नए वार्ड नंबर 11 के अंतर्गत आने वाले सेक्टर 25 के पास खुशी गार्डन के साथ वाले एरिया में करीब 800 गज की जमीन पर बनी एक इमारत में शोरूम और दुकानें बनी थी। इसका बिल कामर्शियल कैटेगरी के हिसाब से कमर्शियल रेट 45 रुपये लगना था। जिस पर फायर टैक्स जोड़ने के बाद करीब 40 हजार एक साल का टैक्स लिया जाना था जोकि एकमुश्त 12 साल का जमा होना था। यह करीब 4 लाख 80 हजार रुपये बनता है।
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इस पर निगम के टैक्स का ब्याज भी तय था जो करीब 3 से साढ़े तीन लाख का बताया जा रहा है। कुल मिलाकर इस कामर्शियल संपत्ति पर 12 साल का फॉयर और प्रॉपर्टी टैक्स ब्याज समेत करीब 7 से 8 लाख रुपये लिया जाना था। अब इसकी कामर्शियल कैटेगरी को निगम कर्मियों ने इंडस्ट्री दिखा दिया। इससे टैक्स स्लैब 45 रुपये गज से कम होकर सीधा साढ़े 4 रुपये और 3.75 रुपये के हिसाब से बना दिया गया। जो एक साल का करीब 2500 रुपये ही बना। अगर इसे 12 साल का एकमुश्त जोड़ा जाए तो यह करीब 30 हजार रुपये के आसपास बनता है।
एनडीसी के भी 6 लाख किए गोल
अब कैटेगरी बदलने के बाद इस प्रॉपर्टी की जारी की गई एनडीसी पर 120 रुपये के हिसाब से करीब एक लाख रुपये वसूल किए गए, जबकि कामर्शियल कैटेगरी पर करीब 837 रुपये के हिसाब से पैसे लिए जाने थे जोकि करीब 7 लाख रुपये बनते थे। कैटेगरी बदलने से प्रॉपर्टी टैक्स के करीब 7 लाख और एनडीसी के करीब 6 लाख रुपये गोल कर दिए गए।
पहले बिल में थे 4 फ्लोर, नए में एक
संबंधित इमारत के पुराने बिल में चार फ्लोर बनाए गए थे जोकि अब नए बिल में ये इमारत एक मंजिला दिखाई गई है। बताया जा रहा है कि अगर चारों फ्लोर का बिल बनता तो ये करीब 30 लाख का बन जाता था और अब एक मंजिला इमारत का बिल कम बना है। इसलिए तीन फ्लोर को हटवा दिया गया है।

फाइल से होगी पूरी पड़ताल- डीएमसी
संबंधित प्रॉपर्टी की पूरी फाइल पढ़ने और मौका देखने के बाद ही पूरे मामले की पड़ताल हो सकेगी। अगर मौके पर जाकर कैटेगरी बदली गई है तो ये गलत है। पूरे मामले की जांच पड़ताल करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि पूरा मामला क्या है और इसकी रिपोर्ट और वास्तविकता में क्या अंतर है।
जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।
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