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अब उद्योगपतियों को अपनी फैक्टरी के बाहर बोर्ड लगाकर देनी होगी उद्योग की कैटेगरी की जानकारी
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उद्योगों की पहचान करने के बाद अब जिला उद्योग केंद्र ने नये नियम लागू कर दिए हैं। इन नियम के अनुसार अब हर उद्योगपति को अपनी फैक्टरी के बाहर बोर्ड लगाकर ये जानकारी देनी होगी कि उनका उद्योग किस कैैटेगरी में आता है। रेड, औरेंज, ग्रीन या व्हाइट में। उनके उद्योग में किस उत्पाद का उत्पादन होता है। इसके अलावा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तीन टन से अधिक क्षमता वाले सभी बायलर के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। जिसे लगाने पर करीब सात लाख रुपये खर्च होंगे।
थर्मोपैक वाली इंडस्ट्री में भी लगेगा मॉनिटरिंग सिस्टम
10 लाख कैलोरी वाले थर्मोपैक ववली इंडस्ट्री में भी प्रदूषण दर्शाने वाला ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। कंबल और 3 डी चादर प्लांट में इस तरह के बड़े थर्मोपैक लगाए जाते हैं। कॉमन बायलर लगाकर प्रदूषण को रोकने के भी आदेश हैं।
कॉमन बॉयलर में अड़चन पैदा हुई
डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा सिक गैपिल कंपनी के रेट बहुत ज्यादा हैं। इसलिए बात नहीं बन रही है। अब दो अन्य फर्म भी यहां आने को तैयार हैं। पीएनजी का रेट ज्यादा होने के कारण उद्यमी पीएनजी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
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थर्मोपैक वाली इंडस्ट्री में भी लगेगा मॉनिटरिंग सिस्टम
10 लाख कैलोरी वाले थर्मोपैक ववली इंडस्ट्री में भी प्रदूषण दर्शाने वाला ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। कंबल और 3 डी चादर प्लांट में इस तरह के बड़े थर्मोपैक लगाए जाते हैं। कॉमन बायलर लगाकर प्रदूषण को रोकने के भी आदेश हैं।
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कॉमन बॉयलर में अड़चन पैदा हुई
डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा सिक गैपिल कंपनी के रेट बहुत ज्यादा हैं। इसलिए बात नहीं बन रही है। अब दो अन्य फर्म भी यहां आने को तैयार हैं। पीएनजी का रेट ज्यादा होने के कारण उद्यमी पीएनजी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
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