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बिजली डिफाल्टरों पर दर्ज होगा चोरी का केस
पानीपत
Updated Sun, 22 Dec 2013 11:56 PM IST
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बिजली के डिफाल्टरों पर अब चोरी का भी मामला दर्ज होगा। बिजली निगम ने चोरी रोकने और ऐसे लोगों पर नकेल कसने के लिए यह कदम उठाया है और इसे सख्ती के साथ लागू करने का फैसला लिया है।
उत्तर हरियाणा बिजली निगम ने घाटे से उबरने के लिए रिकवरी पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में बिजली के डिफाल्टरों की बिजली पूरी तरह से बंद करने या उनसे रिकवरी करने का कदम उठाया है। निगम के आला अधिकारियों ने सभी सर्कल अधिकारियाें को भी इसकी हिदायतें दी हैं।
ये है योजना
निगम की योजना के अनुसार, किसी भी उपभोक्ता के बिल की बकाया राशि पांच हजार से ज्यादा पेंडिंग होने के बाद उसे डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है। ऐसे उपभोक्ता का कनेक्शन भी काटने की योजना है।
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इसके बाद भी करीब 12 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके बिल की बकाया राशि पांच हजार से ज्यादा हैं। ये न तो बिल ही भर रहे हैं और न ही कनेक्शन बंद करवा रहे हैं।
जब निगम अधिकारी या कर्मचारी ऐसे उपभोक्ताओं के पास जाते हैं तो उनको किसी न किसी तरह के विवाद में उलझा लेते हैं और अपना कनेक्शन कटवाने से बचा लेते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर नकेल कसने के लिए निगम ने उन पर बकाया राशि जमा कराने के साथ-साथ बिजली चोरी का केस भी दर्ज कराने की योजना बनाई है। जहां पर भी ऐसे उपभोक्ता मिलेेंगे तो उन पर बिजली चोरी का जुर्माना लगाने के साथ-साथ कनेक्शन भी काटा जाएगा।
31 दिसंबर तक का समय
निगम की इस डबल मार से बचने के लिए उपभोक्ताओं के पास 31 दिसंबर तक का समय है। निर्धारित तिथि से पहले जो भी अपनी बकाया राशि जमा करा देंगे, उन्हें राहत मिल जाएगी।
डिफाल्टरों के घरों पर जाकर देखेंगे मौका
निगम अधिकारी डिफाल्टरों के घरों पर जाकर ही मौके का जायजा लेंगे। कनेक्शन पर जितना लोड पाया जाएगा, उसी के अनुसार ही जुर्माना लगाया जाएगा और चोरी का केस दर्ज होगा। इस आदेश से पहले निगम अधिकारी डिफाल्टरों के सिर्फ कनेक्शन की काटते थे और बकाया राशि जमा कराने के साथ ही कनेक्शन जारी कर देते थे।
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उत्तर हरियाणा बिजली निगम ने घाटे से उबरने के लिए रिकवरी पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में बिजली के डिफाल्टरों की बिजली पूरी तरह से बंद करने या उनसे रिकवरी करने का कदम उठाया है। निगम के आला अधिकारियों ने सभी सर्कल अधिकारियाें को भी इसकी हिदायतें दी हैं।
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ये है योजना
निगम की योजना के अनुसार, किसी भी उपभोक्ता के बिल की बकाया राशि पांच हजार से ज्यादा पेंडिंग होने के बाद उसे डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है। ऐसे उपभोक्ता का कनेक्शन भी काटने की योजना है।
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इसके बाद भी करीब 12 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके बिल की बकाया राशि पांच हजार से ज्यादा हैं। ये न तो बिल ही भर रहे हैं और न ही कनेक्शन बंद करवा रहे हैं।
जब निगम अधिकारी या कर्मचारी ऐसे उपभोक्ताओं के पास जाते हैं तो उनको किसी न किसी तरह के विवाद में उलझा लेते हैं और अपना कनेक्शन कटवाने से बचा लेते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर नकेल कसने के लिए निगम ने उन पर बकाया राशि जमा कराने के साथ-साथ बिजली चोरी का केस भी दर्ज कराने की योजना बनाई है। जहां पर भी ऐसे उपभोक्ता मिलेेंगे तो उन पर बिजली चोरी का जुर्माना लगाने के साथ-साथ कनेक्शन भी काटा जाएगा।
31 दिसंबर तक का समय
निगम की इस डबल मार से बचने के लिए उपभोक्ताओं के पास 31 दिसंबर तक का समय है। निर्धारित तिथि से पहले जो भी अपनी बकाया राशि जमा करा देंगे, उन्हें राहत मिल जाएगी।
डिफाल्टरों के घरों पर जाकर देखेंगे मौका
निगम अधिकारी डिफाल्टरों के घरों पर जाकर ही मौके का जायजा लेंगे। कनेक्शन पर जितना लोड पाया जाएगा, उसी के अनुसार ही जुर्माना लगाया जाएगा और चोरी का केस दर्ज होगा। इस आदेश से पहले निगम अधिकारी डिफाल्टरों के सिर्फ कनेक्शन की काटते थे और बकाया राशि जमा कराने के साथ ही कनेक्शन जारी कर देते थे।