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कूड़ा बीनने वाले बच्चों के हाथों में कलम थमाकर बना रहीं काबिल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 01:07 AM IST
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Capable of making garbage pickers by putting pen in the hands of children
Capable of making garbage pickers by putting pen in the hands of children - फोटो : Panipat
कूड़ा बीनने वाले, चाय की दुकान पर काम करने वाले या बूट पालिश करने वाले बच्चों को काबिल बनाने का सपना आज से 20 साल पहले कमला आर्या ने देखा था। इसे साकार करने के लिए उन्होंने एक स्कूल की शुरुआत की। इसके लिए कभी किसी के खाली प्लाट, गोदाम, घर की छत, दीवार के ओट या पेड़ की छाया में कक्षाएं लगाईं। देखते ही देखते कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और चेतना स्कूल का एक पूरा परिवार बन गया।
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अब चेतना परिवार देश के कई राज्यों में फैल चुका है। इसकी सौ से भी ज्यादा शाखाएं बन चुकी हैं। यहां सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी पढ़ाया जाता है। जीवन यापन करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर तक की ट्रेनिंग दी जाती है। पढ़ाई और प्रशिक्षण बिल्कुल निशुल्क है। आज भी ये स्कूूल खाली प्लाटों, गोदामों और छतों पर चलाए जा रहे हैं। यहां से पढ़कर निकले बच्चों में कुछ आज सफलता की बुलंदियों पर हैं। कुछ डॉक्टर इंजीनियर बन चुके है तो कुछ अपने खुद के रोजगार चलाने में सक्षम हो चुके हैं।
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चेतना स्कूल की शुरुआत करने वाली 73 वर्षीय कमला आर्या ने बताया कि भले ही वे बहुत कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन सभी महिलाओं और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करना चाहती हैं। सन 2002 में घर से किसी काम के लिए निकली थीं, रास्ते में कूड़ा बीनने वाले बच्चों को देखा तो उनके जीवन और भविष्य को बदलने का मन किया। उन्हें जीवन में एक नई राह मिली। अध्यापक एवं कवि पति दीपचंद्र निर्मोही से महज सौ रुपये लेकर इसकी शुरुआत कर दी।
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बाजार से तख्तियां, दवात और कुछ कॉपी-किताबें खरीदीं और लोगों की मदद से बच्चों को पढ़वाना शुरू कर दिया। फिर एक स्कूल हर कॉलोनी या गांव में चलाने की सोची, जिसके बाद कड़ी से कड़ी जुड़ी और बन गया चेतना परिवार। कमला आर्या बताती हैं कि आज परिवार के कई राज्यों में सौ से भी ज्यादा स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र हैं।
कमला आर्या ने बताया कि उनके स्कूलों में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि सभी के शारीरिक व मानसिक विकास की भी ट्रेनिंग होती है। बच्चों को हर प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेेने के लिए उत्साहित किया जाता है। उनके अंदर छिपी हर प्रतिभा को निखारने का काम किया जात है। बुढ़ापे में अक्षर ज्ञान देना हो या रोजी रोटी के लिए आत्मनिर्भर बनाना हो। सब सिखाया जाता है।

कमला आर्या ने बताया कि उनकी यही इच्छा है कि शिक्षा की यह अलख जलती रहे। चेतना परिवार के हर साथी ने पूरा सहयोग किया है।देश का हर बच्चा शिक्षित और काबिल बनें। जिससे कोई बेरोजगार न हो और अधर्म के रास्ते पर न चले।
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