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Panipat News: अविश्वास बैठक में चेयरपर्सन के खिलाफ सदस्य, इस्तीफा देने का बड़ा खेला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Mar 2024 02:28 AM IST
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Business of industrial city increased, Rs 1545 crore of GST deposited...
पानीपत। जिला परिषद के 30 साल के इतिहास में विपक्षी और असंतुष्ट पार्षद पहली बार अविश्वास बैठक में एकजुट मिले। यहां एकजुटता की पिच पर भाजपा ने चेयरपर्सन के इस्तीफे की गुगली फेंक दी। यह जिला परिषद की राजनीति में बड़ा खेला हो गया। विपक्षी सदस्यों ने इन सबके बीच वोटिंग की बजाय हाथ उठाकर चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास लाने की बात कही जबकि चेयरपर्सन ने बैठक से पहले इस्तीफा देने की बात कह दी।
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अब अविश्वास और इस्तीफे के फैसले में कुर्सी फंस गई है। प्रशासन इसे इस्तीफा मानता है तो नए चेयरपर्सन की नियुक्ति में कम से कम छह महीने लगेंगे। अगर विपक्षी इसको अविश्वास साबित करते हैं तो 60 दिन में जिला परिषद को चेयरपर्सन मिल जाएगा।
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जिला परिषद का गठन 1994 में हुआ था। 14 साल बाद 2018 में भाजपा की आशु सत्यवान शेरा के खिलाफ अविश्वास लेकर आए थे। सदस्य पहले एकजुट थे, लेकिन 60 दिन के अंदर बुलाई बैठक में एक पार्षद टूट गया। ऐसे में विपक्ष चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास नहीं ला पाए। इस बार पार्षद 25 जनवरी से अब तक एकजुट रहे।
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उपायुक्त के सामने पेश होकर अविश्वास लाने वाले 12 सदस्य थे, लेकिन बुधवार को 13 पार्षद चेयरपर्सन के खिलाफ एकजुट थे। चेयरपर्सन ज्योति शर्मा और उनके पति प्रदीप बिहौली ने सदस्यों को मनाने का काफी प्रयास भी किया लेकिन सदस्य की एकजुटता को नहीं तोड़ पाए। ऐसे में भाजपा को अपने बी प्लान पर चलना पड़ा। उनका बी प्लान अविश्वास बैठक से पहले जिप चेयरपर्सन का इस्तीफा देना रहा। अब देखना है कि भाजपा इसमें कितनी सफल साबित होती है।
वाइस चेयरमैन आर्य सुरेश मलिक ने बताया कि सदस्य चेयरपर्सन ज्योति शर्मा के खिलाफ अविश्वास लेकर आए हैं। उन्होंने बेशक बैठक में अपना इस्तीफा दिया है, लेकिन यह मान्य नहीं होगा। प्रशासन किसी प्रकार का खेल करता है तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। ज्योति शर्मा को पिछले दिनों भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाने के साथ गत दिनों करनाल लोकसभा प्रभारी बनाया है।
ज्योति शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है। यह इस्तीफा अविश्वास की प्रक्रिया शुरू होने से पहले दिया है। ऐसे में अविश्वास बैठक का कोई औचित्य नहीं बनता। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उनको नई जिम्मेदारी सौंपने की बात कही है। उनको मुख्यमंत्री और पार्टी पर भरोसा है। उन्होंने उनके पति पर नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख रुपये लेने के आरोपों को निराधार बताया है।
इस दौरान वार्ड-1 से आकाश पोड़िया, वार्ड-2 से रणदीप कवी, वार्ड-3 अनु दहिया मलिक, वार्ड 4 से संदीप जागलान, वार्ड-5 से रेखा, वार्ड-6 से जगबीर, वार्ड-7 सुदेश, वार्ड-10 से राजू देहरा, वार्ड-11 से ममता, वार्ड-13 से काजल, 14 से आर्य सुरेश मलिक, 16 से पूजा और वार्ड-17 से जितेंद्र मौजूद रहे। वहीं वार्ड-9 से स्वयं जिप चेयरपर्सन ज्योति शर्मा शामिल रहीं।


यह है मामला
जिला परिषद की भाजपा चेयरपर्सन ज्योति शर्मा के खिलाफ 12 पार्षदों ने सामने आकर 25 जनवरी को उपायुक्त को अपने शपथ पत्र सौंपे थे। उन्होंने अविश्वास बैठक बुलाने की मांग की थी। प्रशासन ने 29 जनवरी को पत्र जारी कर नौ फरवरी को बैठक बुलाई थी, लेकिन उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया अवकाश पर चले गए थे। ऐसे में बैठक स्थगित कर दी थी। पार्षदों ने गत दिनों उपायुक्त से मिलकर बैठक बुलाने की मांग की थी। प्रशासन ने छह मार्च बैठक के लिए तय की थी। पार्षदों ने इसके साथ हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को छह मार्च को अविश्वास बैठक बुलाकर फैसला अवगत कराने के बारे में आदेश जारी किए थे।


जिप सदस्य पर दुराचार का केस
समालखा थाना पुलिस ने जिला पार्षद राजू पर दुराचार का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने पार्षद राजू को बुधवार को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था। उनके साथ अन्य पार्षद भी पहुंच गए। उन्होंने इसको बदले और परेशान करने वाली राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने पार्षदों की एकजुटता को तोड़ने का प्रयास किया,लेकिन वे सफल नहीं हुए तो पार्षदों को बैठक में रोकने के लिए इस तरह की हरकत की गई है। दुराचार के आरोप निराधार हैं और वे इस तरह की राजनीति को सहन नहीं करेंगे। पार्षद राजू देहरा ने आरोपों को निराधार और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला बताया। उनका कहना है कि वीरवार को बेटे की शादी है और कुछ लोग इस तरह की हरकत कर रहे हैं।




इस्तीफे में सरकार व प्रशासन के पाले में गेंद
जिला परिषद चेयरपर्सन ज्योति शर्मा ने इस्तीफा उपायुक्त को दिया है। वे यह इस्तीफा निदेशक को भेजेंगे। निदेशक इस्तीफा नामंजूर कर देते हैं तो वे अपने पद पर बनी रहेंगी। ऐसा होता है तो पार्षदों के पास हाईकोर्ट जाने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है।




वर्जन :
जिला परिषद की अविश्वास बैठक बुलाई गई है। साढ़े तीन बजे तक पार्षदों का इंतजार किया गया। प्रशासन ने वोटिंग कराने की तैयारी पूरी कर ली थी। ज्योति शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। 13 पार्षदों ने हाथ उठाकर उनके खिलाफ अविश्वास लेकर आए हैं। वे बैठक की कार्रवाई निदेशालय को भेजेंगे। इसके बाद यह पद रिक्त घोषित किया जाएगा। जिस पर चुनाव कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में छह महीने लग जाएंगे।
- डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
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