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Panipat News: सांसों पर ठंड की मार, नहीं काम कर फेफड़े

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2024 04:01 AM IST
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Breathing is affected by cold, lungs are not working.
पानीपत। सर्दी के मौसम में एक और जहां सर्दी खांसी व आंख, नाक गले से संबंधित मरीज बढ़े हैं। वहीं अब सांस के मरीज भी तेजी से आने लगे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले तीन दिन में करीब 250 मरीज सांस से संबंधित बीमारियों के पहुंचे। इनमें शुक्रवार को करीब 35 मरीज पहुंचे।
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सांसद संजय भाटिया के पिता जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे। उनके पौत्र उनको अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने लोगों को सुबह के समय सैर बंद करने की सलाह दी है। ठंड बढ़ने और अलाव जलाने से पर्यावरण प्रदूषण पिछले दिनों की अपेक्षा बढ़ा है। इसके साथ ठंड लगातार पड़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में सांस और दमे के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। सामान्य रोग विशेषज्ञ के पास हर रोज 80 से 90 मरीज सांस रोग के मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सर्दियों के आते ही लगभग 30 प्रतिशत मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 12सौ मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें से मरीज सामान्य रोग विशेषज्ञ के पास बुखार, खांसी और सांस का उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं। सामान्य रोग विशेषज्ञ डाॅ. सुखदीप कौर ने बताया कि ठंड और प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से उनकी ओपीडी में सांस रोगी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उनकी ओपीडी में हर रोज 80 से 90 मरीज सांस रोगी के आ रहे हैं। जिनकी उम्र 50 से ऊपर है।
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सांस लेने में हो रही परेशानी


सुखदीप कौर ने बताया कि दमा व अस्थमा, मरीजों के लिए प्रदूषण और कम तापमान खतरनाक होता है। अन्य माह की अपेक्षा सर्दियों के चार महीनों (नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी) में अस्पतालों में इनकी संख्या 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। ठंड के चलते फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। ठंड के मौसम में सुबह के समय सैर न करें।
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बेड भी कम पड़ गए
जिला नागरिक अस्पताल की आपातकाल में 17 बेड हैं। शुक्रवार को एक के बाद 35 मरीज पहुंचे। दोपहर के समय बार तो बेड कम पड़ गए। चिकित्सकों ने सांस लेने से संबंधित मरीजों को दूसरे वार्डों में रखा गया। उनका इलाज कर छुट्टी दे दी। कुछ को इलाज चल रहा है।



यह हैं लक्षण

- तेजी से सांस लेना।

- बलगम के साथ खांसी आना।

- सीने में इंफेक्शन व जकड़न होना।

- कमजोरी आ जाना


यह हैं लक्षण
इन सावधानियों को बरतें

- मरीजों को हमेशा गर्म कपड़े पहनने चाहिए

- बाहर निकलने पर नाक और मुंह को कवर जरूर करें

- अस्थमा और काला पीड़ितों के कमरे में अंदर धूपबत्ती न जलाएं।

- घरों में अंगीठी, हीटर आदि के प्रदूषण से मरीज को बचाएं।

हलका फुलका व्यायाम करें।
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