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निगम सदन की बैठक में बड़ा फैसला : जेबीएम को हटाएंगे
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Big decision in corporation house meeting: Will remove JBM
- फोटो : Panipat
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पानीपत। शहर की सफाई एजेंसी जेबीएम की कार्यप्रणाली और निगम पर बढ़ते सफाई के बजट से असंतुष्ट जनप्रतिनिधियों ने वीरवार को निगम सदन की बैठक में बड़ा फैसला लिया। जेबीएम को सफाई के काम से हटाया जाएगा और सफाई के बजट को कम किया जाएगा। इसमें जेबीएम के टेंडर को रद्द करने, चल रहे सभी सफाई के टेंडरों को आगे न बढ़ाने और चार जोन में ही सफाई करवाने पर सहमति बनी। इससे शहर की सफाई पर सालाना खर्च हो रहा 60 करोड़ रुपये का खर्च महज 30 करोड़ ही रह जाएगा।
निगम सदन के इस फैसले पर सांसद संजय भाटिया ने कहा कि पार्षद जेेबीएम का विकल्प तलाश करें। इसके बाद जेबीएम को बाहर का रास्ता दिखाना उनकी जिम्मेदारी, वरना वे पार्षदों के दोषी होंगे। दरअसल जेबीएम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने सफाई पर कहा कि उन्हें कूड़ा डंप करने के लिए कुछ सेकेंडरी प्वाइंट दिए जाएं, वे शहर को चमका देंगे। इतना सुनते ही एक साथ पूरा सदन भड़क गया और जेबीएम पर टूट पड़ा। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर कंपनी को चोरी करार दिया। कहा कि जब से जेबीएम शहर में आई है, शहर का नाश हो गया है। लगातार दो साल से जेबीएम के खिलाफ पार्षद कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तीन बार सदन की बैठक में पेनाल्टी लगाने की बात कह चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो जेबीएम पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही जुर्माना लगाया गया।
पांच पार्षदों की कमेटी खोजेगी जेबीएम का विकल्प
जेबीएम भुगतान करोड़ों में ले रही जबकि काम एक भी नहीं हो रहा। पार्षदों ने कहा कि जेबीएम कंपनी के अधिकारियों की वीडियो तक वायरल है, जिसमें वे कह रहे हैं कि दोपहर से पहले वे कूड़ा ही नहीं उठाएंगे तो उनको भुगतान किस नाम का किया जा रहा है। इस पर फैसला लिया गया कि पहले जेबीएम का विकल्प तलाशना होगा। विकल्प की तलाश के लिए पांच पार्षदों की कमेटी काम करेगी। अगर विकल्प सही रहा और सफाई ठीक हुई तो जेबीएम को हमेशा के लिए निगम से बाहर कर दिया जाएगा। सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट, पार्षद लोकेश नांगरू, संजीव दहिया, रविंद्र भाटिया, अशोक कटारिया की पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जो एक महीने में विकल्प तलाश कर देगी।
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अब सफाई के टेंडर नहीं बढ़ेंगे, चार जोन में ही होगी सफाई
चार जोन में शहर की सफाई वाले टेंडर को अभी तक निगम मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिली है। इस पर निगम सदन में प्रस्ताव लाया गया कि जब तक यह टेंडर न लगे तब तक पुराने टेंडरों को जारी रखा जाए। इस पर विधायक ने आपत्ति जताई और कहा कि अब कोई भी टेंडर बढ़ाया नहीं जाएगा। नए सिरे से ही टेंडर लगाया जाएगा।
सांसद ने भी माना 6 सड़कों की सफाई का टेंडर निगम पर बोझ
निगम सदन की बैठक में पार्षद रविंद्र भाटिया समेत कई पार्षदों ने 6 रास्तों की सफाई वाली मशीन के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि जब निगम के पास खुद की मशीन है, फिर भी निगम 94 लाख रुपये महीना मशीन किराये पर लेकर खर्च कर रहा है। इस पर सांसद एवं विधायक ने माना कि ये मशीन शहर पर बोझ है। इसके टेंडर को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
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निगम सदन के इस फैसले पर सांसद संजय भाटिया ने कहा कि पार्षद जेेबीएम का विकल्प तलाश करें। इसके बाद जेबीएम को बाहर का रास्ता दिखाना उनकी जिम्मेदारी, वरना वे पार्षदों के दोषी होंगे। दरअसल जेबीएम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने सफाई पर कहा कि उन्हें कूड़ा डंप करने के लिए कुछ सेकेंडरी प्वाइंट दिए जाएं, वे शहर को चमका देंगे। इतना सुनते ही एक साथ पूरा सदन भड़क गया और जेबीएम पर टूट पड़ा। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर कंपनी को चोरी करार दिया। कहा कि जब से जेबीएम शहर में आई है, शहर का नाश हो गया है। लगातार दो साल से जेबीएम के खिलाफ पार्षद कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तीन बार सदन की बैठक में पेनाल्टी लगाने की बात कह चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो जेबीएम पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही जुर्माना लगाया गया।
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पांच पार्षदों की कमेटी खोजेगी जेबीएम का विकल्प
जेबीएम भुगतान करोड़ों में ले रही जबकि काम एक भी नहीं हो रहा। पार्षदों ने कहा कि जेबीएम कंपनी के अधिकारियों की वीडियो तक वायरल है, जिसमें वे कह रहे हैं कि दोपहर से पहले वे कूड़ा ही नहीं उठाएंगे तो उनको भुगतान किस नाम का किया जा रहा है। इस पर फैसला लिया गया कि पहले जेबीएम का विकल्प तलाशना होगा। विकल्प की तलाश के लिए पांच पार्षदों की कमेटी काम करेगी। अगर विकल्प सही रहा और सफाई ठीक हुई तो जेबीएम को हमेशा के लिए निगम से बाहर कर दिया जाएगा। सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट, पार्षद लोकेश नांगरू, संजीव दहिया, रविंद्र भाटिया, अशोक कटारिया की पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जो एक महीने में विकल्प तलाश कर देगी।
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अब सफाई के टेंडर नहीं बढ़ेंगे, चार जोन में ही होगी सफाई
चार जोन में शहर की सफाई वाले टेंडर को अभी तक निगम मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिली है। इस पर निगम सदन में प्रस्ताव लाया गया कि जब तक यह टेंडर न लगे तब तक पुराने टेंडरों को जारी रखा जाए। इस पर विधायक ने आपत्ति जताई और कहा कि अब कोई भी टेंडर बढ़ाया नहीं जाएगा। नए सिरे से ही टेंडर लगाया जाएगा।
सांसद ने भी माना 6 सड़कों की सफाई का टेंडर निगम पर बोझ
निगम सदन की बैठक में पार्षद रविंद्र भाटिया समेत कई पार्षदों ने 6 रास्तों की सफाई वाली मशीन के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि जब निगम के पास खुद की मशीन है, फिर भी निगम 94 लाख रुपये महीना मशीन किराये पर लेकर खर्च कर रहा है। इस पर सांसद एवं विधायक ने माना कि ये मशीन शहर पर बोझ है। इसके टेंडर को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।