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बैंकाक से मेडल लेकर पहुंचे नीरज का जोरदार स्वागत
अमर उजाला/ब्यूरो, पानीपत
Updated Mon, 02 Jun 2014 12:33 AM IST
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मतलौडा। थाइलैंड में आयोजित यूथ एशियन चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो में सिल्वर पदक जीतकर लौटे खंडरा के नीरज चोपड़ा का मतलौडा पहुंचने पर ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।
इस दौरान क्षेत्र के विधायक, खेल प्रेमियों व ग्रामीण उसे जुलूस की शक्ल में उसे गांव तक ले गए। कोच नसीम अहमद की अगुवाई में मतलौडा खंड के खंडरा गांव वासी 11वीं कक्षा के छात्र नीरज चोपड़ा ने बैंकाक में 21 से 22 मई तक आयोजित दो दिवसीय यूथ एशियन चैंपियनशिप में ज्वैलीन थ्रो में शानदार खेल का प्रदर्शन सिल्वर मेडल हासिल किया।
रविवार को मतलौडा लौटने पर इसराना हलका विधायक कृष्णलाल पंवार, क्षेत्र के गणमान्य लोगों व खिलाड़ियों ने विधायक पंवार के पट्रोल पंप पर फूलमालाओं से उसका स्वागत किया और उसे मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। भाजपा नेता सत्यवान शेरा ने नोटों की माला पहनाई।
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इसके बाद लोग उसे खुली जीप में बैठाकर जुलूस के रूप में खंडरा गांव तक ले गए। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने अपने लाडले को मिठाई खिलाकर स्वागत किया। खंडरा वासी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के पिता सतीश चोपड़ा ने बताया कि उसका बेटा 11वीं कक्षा का विद्यार्थी है और ओपन से घर पर ही पढ़ाई कर रहा है।
पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में चार साल से ज्वेलीन की कोचिंग ले रहा है। बचपन से ही नीरज को खेलने का शौक रहा है। खेल में नीरज के बढ़ते शौक को देखते हुए परिजनों ने भी उससे काफी उम्मीदे लगाई हुई है। एशियन खेलों में सिल्वर मेडल मिलने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नही रहा।
इस मौके पर जसमेर ऊंटला, हवासिंह महला, मांगेराम नंबरदार, रविंद्र महला, भीम सिंह चोपड़ा, सरपंच लहणा सिंह, पूर्व सरपंच जीत सिंह, हरिओम, पवन खंडरा, राजकुमार, पवन दहिया, भगत सिंह जोशी,दारा शेरा मौजूद थे।
रितु ने नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में जीता सिल्वर मैडल
इसराना। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं होती। यह बात सिद्ध करके दिखाई है इसराना खंड के गावं कारद की रीतू ने।
छोटे से गांव कारद में रहने वाली रीतू ने झारखंड में 28 से 31 मई को हुई 16वीं नेशनल जूनियर महिला प्रतियोगिता में 63 किलो भार वर्ग में सिल्वर मैडल जीतकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
प्रतियोगिता में रीतू ने पांच कुश्ती मुकाबलों चार जीत दर्ज कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। सिल्वर मैडल जीतकर गांव में लौटी रीतू पुत्री आजाद सिंह का जोरदार स्वागत किया गया।
गावं में पहुंचने पर रीतू के परिवार, उसके अध्यापक राममेहर सिंह व गावं सरपंच यशवन्ती देवी ने फूलमालाओं से स्वागत किया।
भाई ने सुविधाओं के आभाव में छोड दिया खेलना लेकिन बहन के माध्यम से करना चाहता है सपना पूरा। नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में सिल्वर मैडल जीतकर लौटी रीतु के भाई कर्मपाल ने बताया कि वह भी नेशनल स्तर तक कुश्ती खेल चुका है और यूनिवर्सिटी स्तर पर गोल्ड मैडल जीत चुका है लेकिन गांव में सुविधाओं का आभाव होने के कारण उसे खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा।
कर्मपाल ने बताया कि अब वह गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को कुश्ती के गुर सिखाता है। एक दिन उसने बहन को जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में खिलाया तो अच्छा खेली और जीत गई। कर्मपाल ने बताया कि इसके बाद उन्हें पता चला कि लड़का लड़की में कोई फर्क नहीं होता।
कर्मपाल का कहना है कि मैं कुछ ज्यादा नहीं कर पाया लेकिन मेरा सपना है कि मेरी बहन सपने को पूरा करे और मैं नहीं चाहता कि मेरी तरह सुविधाओं के अभाव में आगे बढ़ने से वंचित रहे।
भाई के सपने को पूरा करना है लक्ष्य
इसराना के गावं कारद की रहने वाली रीतु पुत्री आजाद सिंह का कहना है कि उसका एक ही लक्ष्य है कि वह भाई के अधूरे सपने को पूरा करे। रीतु की उम्र 16 वर्ष है और 10वीं में गांव के एक निजी स्कूल में पढ़ती है।
पढ़ाई के साथ साथ कुश्ती का भी उसे शौक है लेकिन गांव में कोई स्टेडियम और कोच नही है। रीतु का कहना है कि गांव में सुविधाओं का आभाव होते हुए भी उसे परिवार का पूरा साथ मिला है। रीतू का कहना है कि उसके भाई ही उसके कोच हैं और वह उनके सपने को जरूर पूरा करेगी।
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इस दौरान क्षेत्र के विधायक, खेल प्रेमियों व ग्रामीण उसे जुलूस की शक्ल में उसे गांव तक ले गए। कोच नसीम अहमद की अगुवाई में मतलौडा खंड के खंडरा गांव वासी 11वीं कक्षा के छात्र नीरज चोपड़ा ने बैंकाक में 21 से 22 मई तक आयोजित दो दिवसीय यूथ एशियन चैंपियनशिप में ज्वैलीन थ्रो में शानदार खेल का प्रदर्शन सिल्वर मेडल हासिल किया।
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रविवार को मतलौडा लौटने पर इसराना हलका विधायक कृष्णलाल पंवार, क्षेत्र के गणमान्य लोगों व खिलाड़ियों ने विधायक पंवार के पट्रोल पंप पर फूलमालाओं से उसका स्वागत किया और उसे मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। भाजपा नेता सत्यवान शेरा ने नोटों की माला पहनाई।
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इसके बाद लोग उसे खुली जीप में बैठाकर जुलूस के रूप में खंडरा गांव तक ले गए। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने अपने लाडले को मिठाई खिलाकर स्वागत किया। खंडरा वासी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के पिता सतीश चोपड़ा ने बताया कि उसका बेटा 11वीं कक्षा का विद्यार्थी है और ओपन से घर पर ही पढ़ाई कर रहा है।
पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में चार साल से ज्वेलीन की कोचिंग ले रहा है। बचपन से ही नीरज को खेलने का शौक रहा है। खेल में नीरज के बढ़ते शौक को देखते हुए परिजनों ने भी उससे काफी उम्मीदे लगाई हुई है। एशियन खेलों में सिल्वर मेडल मिलने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नही रहा।
इस मौके पर जसमेर ऊंटला, हवासिंह महला, मांगेराम नंबरदार, रविंद्र महला, भीम सिंह चोपड़ा, सरपंच लहणा सिंह, पूर्व सरपंच जीत सिंह, हरिओम, पवन खंडरा, राजकुमार, पवन दहिया, भगत सिंह जोशी,दारा शेरा मौजूद थे।
रितु ने नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में जीता सिल्वर मैडल
इसराना। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं होती। यह बात सिद्ध करके दिखाई है इसराना खंड के गावं कारद की रीतू ने।
छोटे से गांव कारद में रहने वाली रीतू ने झारखंड में 28 से 31 मई को हुई 16वीं नेशनल जूनियर महिला प्रतियोगिता में 63 किलो भार वर्ग में सिल्वर मैडल जीतकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
प्रतियोगिता में रीतू ने पांच कुश्ती मुकाबलों चार जीत दर्ज कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। सिल्वर मैडल जीतकर गांव में लौटी रीतू पुत्री आजाद सिंह का जोरदार स्वागत किया गया।
गावं में पहुंचने पर रीतू के परिवार, उसके अध्यापक राममेहर सिंह व गावं सरपंच यशवन्ती देवी ने फूलमालाओं से स्वागत किया।
भाई ने सुविधाओं के आभाव में छोड दिया खेलना लेकिन बहन के माध्यम से करना चाहता है सपना पूरा। नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में सिल्वर मैडल जीतकर लौटी रीतु के भाई कर्मपाल ने बताया कि वह भी नेशनल स्तर तक कुश्ती खेल चुका है और यूनिवर्सिटी स्तर पर गोल्ड मैडल जीत चुका है लेकिन गांव में सुविधाओं का आभाव होने के कारण उसे खेल बीच में ही छोड़ना पड़ा।
कर्मपाल ने बताया कि अब वह गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों को कुश्ती के गुर सिखाता है। एक दिन उसने बहन को जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में खिलाया तो अच्छा खेली और जीत गई। कर्मपाल ने बताया कि इसके बाद उन्हें पता चला कि लड़का लड़की में कोई फर्क नहीं होता।
कर्मपाल का कहना है कि मैं कुछ ज्यादा नहीं कर पाया लेकिन मेरा सपना है कि मेरी बहन सपने को पूरा करे और मैं नहीं चाहता कि मेरी तरह सुविधाओं के अभाव में आगे बढ़ने से वंचित रहे।
भाई के सपने को पूरा करना है लक्ष्य
इसराना के गावं कारद की रहने वाली रीतु पुत्री आजाद सिंह का कहना है कि उसका एक ही लक्ष्य है कि वह भाई के अधूरे सपने को पूरा करे। रीतु की उम्र 16 वर्ष है और 10वीं में गांव के एक निजी स्कूल में पढ़ती है।
पढ़ाई के साथ साथ कुश्ती का भी उसे शौक है लेकिन गांव में कोई स्टेडियम और कोच नही है। रीतु का कहना है कि गांव में सुविधाओं का आभाव होते हुए भी उसे परिवार का पूरा साथ मिला है। रीतू का कहना है कि उसके भाई ही उसके कोच हैं और वह उनके सपने को जरूर पूरा करेगी।