{"_id":"67327acf2a34abcfc90777e4","slug":"asthma-patients-are-suffocating-aqi-reached-490-panipat-news-c-244-1-pnp1001-127279-2024-11-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: दमा रोगियों का घुट रहा दम, एक्यूआई पहुंचा 490","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: दमा रोगियों का घुट रहा दम, एक्यूआई पहुंचा 490
विज्ञापन
पानीपत। शहर की हवा बेहद जहरीली हो चुकी है। स्मॉग के कारण दमा रोगियों का दम घुट रहा है। आंखों में जलन महसूस हो रही है। लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के अनुसार पिछले 12 दिन से पानीपत का एक्यूआई 182-187 के बीच स्थिर बना हुआ है। इस पर पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्यूआई के नाम पर शहरवासियों से असल जानकारी छुपा रहा है।
सीपीसीबी का एक्यूआई मापक यंत्र काम नहीं कर रहा है। करनाल, जींद, कुरुक्षेत्र सिरसा और यमुनानगर जैसे जिलों का एक्यूआई ऑरेंज जोन में है, जहां उद्योग नाममात्र हैं जबकि पानीपत में 20 हजार उद्योग हैं और एक लाख वाहन यहां से गुजरते हैं, वहां का एक्यूआई यलो जोन में प्रदर्शित किया जा रहा है। माइक्रोसाॅफ्ट की एमएसएन साइट के अनुसार पानीपत का एक्यूआई 490 है, जबकि सीपीसीबी के अनुसार 184 है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जान बूझकर एक्यूआई मापक यंत्र सेक्टर 18 में ग्रीन बेल्ट में लगाया है।
निजी एजेंसियों के अनुसार पानीपत का एक्यूआई 300 से अधिक है। सुबह शाम स्मॉग से आंखों में जलन हो रही है। अस्थमा के रोगी बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने ग्रैप दो के अनुसार अब तक जिले में काम भी शुरू नहीं किया है।
इन विभागों की पर्यावरण स्वच्छ करने की जिम्मेदारी
पीडब्ल्यूडी :
स्टेट हाईवे के किनारे पानी का छिड़काव करने की जिम्मेदारी दी गई है। गोहाना रोड, बरसत रोड, सनौली रोड व असंध रोड पर पानी का छिड़काव करने की जिम्मेेदारी यहां पीडब्ल्यूडी की है।
एनएचएआई :
जीटी रोड पर पानी का छिड़काव करना है। गांजबड़ गांव से समालखा तक पानी का छिड़काव किया जाना है।
नगर निगम :
नगर निगम की जिम्मेदारी शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव करने की है। इसके लिए पेड़ पौधों पर भी छिड़काव करना है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड :
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फैक्टरियों, होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल का निरीक्षण करना है। जेनरेटर सेट चलते मिलने पर कार्रवाई करनी है। फैक्टरियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सीपीसीबी को देनी है।
यह एहतियात बरतें
अधिक शारीरिक गतिविधि नहीं करें, पसीना निकलने से शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और खतरनाक धूल कण शरीर में जा सकते हैं।
पार्क या खुले स्थानों पर सुबह और शाम दौड़ने और टहलने से परहेज करें। इस दौरान स्वच्छ हवा चाहिए होती है, अभी हवा जहलीरी है।
दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पीएं और घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी। खाने में जितना हो सके विटामिन-सी, ओमेगा-3 को प्रयोग में लाएं। शहद, लहसुन, अदरक खाने में ज्यादा से ज्यादा खाएं। घर से बाहर निकलना मजबूरी है तो घर आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें और भांप भी ले सकते हैं।
आने वाले दिनों में शहर की हवा और अधिक खराब होगी : वरुण
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वरुण गुलाटी ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्यूआई की सही जानकारी नहीं दे रहा है। असल में पानीपत का एक्यूआई 400 से अधिक है। यहां 20 हजार उद्योग हैं। एक लाख वाहन पानीपत से गुजरते हैं। पानीपत की हवा में 2.5 की मात्रा 350 से अधिक है।
जिस स्थान पर एक्यूआई मापक यंत्र लगाया गया है, वहां उसका कोई फायदा नहीं है। वहां पर हरियाली है। आने वाले दिनों में जैसे ही हवा की रफ्तार कम होगी। धुआं और धूल के कण नहीं छट पाएंगे। स्मॉग का खतरा गहराएगा। हवा में कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ेगी। प्रशासन को इसे लेकर गंभीर कदम उठाने चाहिए।
वर्जन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप ने बताया कि एक्यूआई मापक यंत्र टोल प्लाजा के पास है। वहां से वाहन गुजरते हैं। इसलिए हवा में धुएं की मात्रा का वहां से सही पता चलता है। फिलहाल ग्रैप का दूसरा चरण लागू है। उसके अनुसार काम चल रहा है।
विज्ञापन
वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के अनुसार पिछले 12 दिन से पानीपत का एक्यूआई 182-187 के बीच स्थिर बना हुआ है। इस पर पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्यूआई के नाम पर शहरवासियों से असल जानकारी छुपा रहा है।
विज्ञापन
सीपीसीबी का एक्यूआई मापक यंत्र काम नहीं कर रहा है। करनाल, जींद, कुरुक्षेत्र सिरसा और यमुनानगर जैसे जिलों का एक्यूआई ऑरेंज जोन में है, जहां उद्योग नाममात्र हैं जबकि पानीपत में 20 हजार उद्योग हैं और एक लाख वाहन यहां से गुजरते हैं, वहां का एक्यूआई यलो जोन में प्रदर्शित किया जा रहा है। माइक्रोसाॅफ्ट की एमएसएन साइट के अनुसार पानीपत का एक्यूआई 490 है, जबकि सीपीसीबी के अनुसार 184 है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जान बूझकर एक्यूआई मापक यंत्र सेक्टर 18 में ग्रीन बेल्ट में लगाया है।
निजी एजेंसियों के अनुसार पानीपत का एक्यूआई 300 से अधिक है। सुबह शाम स्मॉग से आंखों में जलन हो रही है। अस्थमा के रोगी बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने ग्रैप दो के अनुसार अब तक जिले में काम भी शुरू नहीं किया है।
इन विभागों की पर्यावरण स्वच्छ करने की जिम्मेदारी
पीडब्ल्यूडी :
स्टेट हाईवे के किनारे पानी का छिड़काव करने की जिम्मेदारी दी गई है। गोहाना रोड, बरसत रोड, सनौली रोड व असंध रोड पर पानी का छिड़काव करने की जिम्मेेदारी यहां पीडब्ल्यूडी की है।
एनएचएआई :
जीटी रोड पर पानी का छिड़काव करना है। गांजबड़ गांव से समालखा तक पानी का छिड़काव किया जाना है।
नगर निगम :
नगर निगम की जिम्मेदारी शहर की सड़कों पर पानी का छिड़काव करने की है। इसके लिए पेड़ पौधों पर भी छिड़काव करना है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड :
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फैक्टरियों, होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल का निरीक्षण करना है। जेनरेटर सेट चलते मिलने पर कार्रवाई करनी है। फैक्टरियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सीपीसीबी को देनी है।
यह एहतियात बरतें
अधिक शारीरिक गतिविधि नहीं करें, पसीना निकलने से शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और खतरनाक धूल कण शरीर में जा सकते हैं।
पार्क या खुले स्थानों पर सुबह और शाम दौड़ने और टहलने से परहेज करें। इस दौरान स्वच्छ हवा चाहिए होती है, अभी हवा जहलीरी है।
दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पीएं और घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही बनी रहेगी। खाने में जितना हो सके विटामिन-सी, ओमेगा-3 को प्रयोग में लाएं। शहद, लहसुन, अदरक खाने में ज्यादा से ज्यादा खाएं। घर से बाहर निकलना मजबूरी है तो घर आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें और भांप भी ले सकते हैं।
आने वाले दिनों में शहर की हवा और अधिक खराब होगी : वरुण
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वरुण गुलाटी ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक्यूआई की सही जानकारी नहीं दे रहा है। असल में पानीपत का एक्यूआई 400 से अधिक है। यहां 20 हजार उद्योग हैं। एक लाख वाहन पानीपत से गुजरते हैं। पानीपत की हवा में 2.5 की मात्रा 350 से अधिक है।
जिस स्थान पर एक्यूआई मापक यंत्र लगाया गया है, वहां उसका कोई फायदा नहीं है। वहां पर हरियाली है। आने वाले दिनों में जैसे ही हवा की रफ्तार कम होगी। धुआं और धूल के कण नहीं छट पाएंगे। स्मॉग का खतरा गहराएगा। हवा में कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ेगी। प्रशासन को इसे लेकर गंभीर कदम उठाने चाहिए।
वर्जन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप ने बताया कि एक्यूआई मापक यंत्र टोल प्लाजा के पास है। वहां से वाहन गुजरते हैं। इसलिए हवा में धुएं की मात्रा का वहां से सही पता चलता है। फिलहाल ग्रैप का दूसरा चरण लागू है। उसके अनुसार काम चल रहा है।