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Panipat News: सफाई का ठेका 30 जून तक आगे बढ़ाने की मंजूरी, शहर में लगा कूड़े का ढेर
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पानीपत। शहरी स्थानीय निकाय ने शहर की सफाई के काम का खत्म हुआ ठेका आगे बढ़ाने के लिए 30 जून तक की मंजूरी दी है। तब तक आचार संहिता भी समाप्त हो जाएगी। इसके बाद निगम को या तो फिर से ठेकेे का समय आगे बढ़ाने के लिए फिर से मंजूरी लेनी पड़ेगी या नया टेंडर करवाना पड़ेगा। नए टेंडर में भी कम से कम दो माह का समय लगेगा। या फिर छह जून को समाप्त होने वाली आचार संहिता के बाद निगम के पास महज 24 दिन का समय बचेगा। इस समयावधि में निगम को टेंडर संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और एक जुलाई तक नए टेंडर को अलॉट करने के बाद वर्क ऑर्डर तक जारी करना होगा। वरना शहर में कूड़े के ढेर लगने लाजमी होंगे।
उल्लेखनीय है कि उपरोक्त स्थिति के मद्देनजर निगम अधिकारियों के आश्वासन के बाद दोनों एजेंसियों के सफाई कर्मी काम पर तो लौट आए थे लेकिन निकाय से मंजूरी मिलने के असमंजस में सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। जिससे शहर में कूड़े के ढेर लग गए हैं। अब 30 जून तक की अनुमति मिलने पर सफाई एजेंसियों ने भी कर्मचारियों को काम करने की हरी झंडी दे दी है। जिससे सभी सफाई कर्मी काम पर दोबारा लौट आए हैं। पिछले दो साल से शहर को चार जोन में बांटकर दो एजेंसियों को सफाई के काम का ठेका दिया गया था। जो 12 मई को पूरा हो गया था। इसके बाद कर्मचारियों ने काम छोड़ हड़ताल कर दी थी। जिस पर विधायक, जिला अध्यक्ष के बाद निगम आयुक्त के आश्वासन पर कर्मचारी काम पर लौटे थे।
गौरतलब है कि आचार संहिता की वजह से निगम अपने स्तर पर नया टेंडर नहीं लग सकता। जबकि मासिक बजट ज्यादा होने की वजह से टेंडर की समयावधि बढ़ाने की अनुमति भी शहरी स्थानीय निकाय से मिलनी तय थी। इसी बीच सफाई को मूलभूत आवश्यकता मानते हुए निकाय ने इसे 30 जून तक बढ़ाने की अनुमति दी है। शहर में सफाई का काम तीन एजेंसियों के पास है, जिसके लिए हर माह करीब साढ़े तीन करोड़ खर्च करता है। इनमें जेबीएम के पास घर घर कूड़ा उठाने का काम है। जेबीएम शहर से करीब 100 टन कूड़ा निकालती है। इसके लिए निगम जेबीएम को मासिक 20 से 25 लाख का भुगतान करता है। इनका टेंडर 22 साल का था, जो 2018 में दिया गया था। वहीं, पूजा कॉन्सलेशन और आईएनडी के पास गलियों, नालों, सड़कों की सफाई और कूड़े की ढेेरियों को उठाने का काम है।
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इन दोनों एजेंसियों के पास शहर के दो दो जोन हैं। दोनों एजेंसियां शहर से रोजाना करीब 150 टन कूड़ा उठाती हैं। इसके लिए इन एजेंसियों ने करीब एक हजार कर्मचारी लगाए हैं। इस काम के लिए निगम दोनों एजेंसिंयों को करीब सवा तीन करोड़ प्रतिमाह भुगतान करता है। इसका काम दो साल के लिए था जो 12 मई को पूरा हो चुका है। कर्मचारियों के अलावा इन एजेंसियों के पास कूड़ा उठाने वाले 60 ट्रैक्टर ट्राली, बड़े नालों की सफाई और कूड़ा उठाने का काम करने वाली चार जेसीबी मशीन, 150 रिक्शा और चार रोड स्वीपिंग मशीनें तक शामिल की थी। इनके अलावा निगम के खुद के कच्चे-पक्के 513 कर्मचारी हैं। जो शहर की सड़कों की सफाई का काम करते हैं।
वर्जन:
30 जून तक बढ़ाया समय : निगम
शहर की सफाई का समय अब 30 जून तक बढ़ाया गया है। सफाई कर्मचारी काम पर लगे हैं। जहां कूड़े के ढेर लगे हैं उनको भी उठवाया जाएगा।
जितेंद्र नरवाल, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम।
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उल्लेखनीय है कि उपरोक्त स्थिति के मद्देनजर निगम अधिकारियों के आश्वासन के बाद दोनों एजेंसियों के सफाई कर्मी काम पर तो लौट आए थे लेकिन निकाय से मंजूरी मिलने के असमंजस में सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। जिससे शहर में कूड़े के ढेर लग गए हैं। अब 30 जून तक की अनुमति मिलने पर सफाई एजेंसियों ने भी कर्मचारियों को काम करने की हरी झंडी दे दी है। जिससे सभी सफाई कर्मी काम पर दोबारा लौट आए हैं। पिछले दो साल से शहर को चार जोन में बांटकर दो एजेंसियों को सफाई के काम का ठेका दिया गया था। जो 12 मई को पूरा हो गया था। इसके बाद कर्मचारियों ने काम छोड़ हड़ताल कर दी थी। जिस पर विधायक, जिला अध्यक्ष के बाद निगम आयुक्त के आश्वासन पर कर्मचारी काम पर लौटे थे।
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गौरतलब है कि आचार संहिता की वजह से निगम अपने स्तर पर नया टेंडर नहीं लग सकता। जबकि मासिक बजट ज्यादा होने की वजह से टेंडर की समयावधि बढ़ाने की अनुमति भी शहरी स्थानीय निकाय से मिलनी तय थी। इसी बीच सफाई को मूलभूत आवश्यकता मानते हुए निकाय ने इसे 30 जून तक बढ़ाने की अनुमति दी है। शहर में सफाई का काम तीन एजेंसियों के पास है, जिसके लिए हर माह करीब साढ़े तीन करोड़ खर्च करता है। इनमें जेबीएम के पास घर घर कूड़ा उठाने का काम है। जेबीएम शहर से करीब 100 टन कूड़ा निकालती है। इसके लिए निगम जेबीएम को मासिक 20 से 25 लाख का भुगतान करता है। इनका टेंडर 22 साल का था, जो 2018 में दिया गया था। वहीं, पूजा कॉन्सलेशन और आईएनडी के पास गलियों, नालों, सड़कों की सफाई और कूड़े की ढेेरियों को उठाने का काम है।
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इन दोनों एजेंसियों के पास शहर के दो दो जोन हैं। दोनों एजेंसियां शहर से रोजाना करीब 150 टन कूड़ा उठाती हैं। इसके लिए इन एजेंसियों ने करीब एक हजार कर्मचारी लगाए हैं। इस काम के लिए निगम दोनों एजेंसिंयों को करीब सवा तीन करोड़ प्रतिमाह भुगतान करता है। इसका काम दो साल के लिए था जो 12 मई को पूरा हो चुका है। कर्मचारियों के अलावा इन एजेंसियों के पास कूड़ा उठाने वाले 60 ट्रैक्टर ट्राली, बड़े नालों की सफाई और कूड़ा उठाने का काम करने वाली चार जेसीबी मशीन, 150 रिक्शा और चार रोड स्वीपिंग मशीनें तक शामिल की थी। इनके अलावा निगम के खुद के कच्चे-पक्के 513 कर्मचारी हैं। जो शहर की सड़कों की सफाई का काम करते हैं।
वर्जन:
30 जून तक बढ़ाया समय : निगम
शहर की सफाई का समय अब 30 जून तक बढ़ाया गया है। सफाई कर्मचारी काम पर लगे हैं। जहां कूड़े के ढेर लगे हैं उनको भी उठवाया जाएगा।
जितेंद्र नरवाल, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम।