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Panipat News: अंशिका बनी साध्वी अंशिमा और सूरज बने मुनि संभव
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पानीपत। द्वारिका दिल्ली की 14 वर्षीय अंशिका जैन वीरवार को दीक्षा के उपरांत साध्वी अंशिमा बनीं, जबकि गोंडा यूपी के 23 वर्षीय सूरज जैन दीक्षोपरांत संभव मुनि बने। अंशिमा को महासाध्वी अक्षिता महाराज की शिष्या घोषित किया गया। वहीं सूरज कुमार जैन को मुदित मुनि महाराज का शिष्य घोषित किया गया।
श्री एसएस जैन सभा (रजि.) गांधी मंडी पानीपत के तत्वावधान में सेक्टर-25-2 स्थित सोमाया वैंक्वेट हाल में वीरवार को जैन भागवती दीक्षा समारोह में अंशिका जैन और सूरज कुमार जैन को दीक्षा दी गई। साथ ही दीक्षार्थियों की रथ शोभायात्रा गांधी मंडी से शुरू होकर सोमाया बैंक्वेट हाॅल तक बैंड बाजों व झांकियों के साथ संपूर्ण हुई। मुख्यातिथि दिल्ली से विनय जैन, सभा के अध्यक्ष जगदीश जैन और समाजसेवी विजय जैन तथा सुभाष जैन रहे। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन और सांसद संजय भाटिया राजकीय अतिथि रहे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदेश शर्मा और जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट अमित कादियान भी मौजूद रहे। मुख्य मंच संचालन अमित मुनि महाराज ने किया, वहीं विनय जैन देवबंदी ने काव्य पाठ किया। गायक तरुण मोदी ने भी मनभावन प्रस्तुतियों से सबको आनंदित किया।
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मुझे जैन धर्म सच्चा लगा : सूरज कुमार
दीक्षा के उपरांत संभव मुनि बने सूरज ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक छोटे से गांव से हैं। वे जन्म से जैन नहीं हैं बल्कि उन्होंने कभी जैन मुनियों को देखा भी नहीं था। वे सीनियर सेकेंडरी की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली भाई के पास आए थे। वहां स्थानकवासी संतों को देखा। उनके बारे में जानने की जिज्ञासा ओजस्वी वक्ता रमेश मुनि महाराज तक ले आई, जिसके बाद उन्हें जैन सच्चा धर्म लगा। उन्होंने उसी दिन सच्चा साधु बनने का संकल्प लिया।
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छोटी सी उम्र में जाना संसार खारा है : अंशिका
दीक्षा के उपरांत साध्वी अंशिमा बनी अंशिका ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से जैन संतों की शरण में है। इस दौरान उनमें हर रोज इस मार्ग पर आने की भावना बलवती होती गई। उनके सगे भाई भी जैन संत हैं। उनको अतिशय मुनि महाराज के नाम से जाना जाता है। उनका कहना है कि मैने छोटी ही उम्र से यह देखा के संसार खारा है। इसमें विभिन्न प्रकार के दुख हैं। रोग, बुढ़ापा, जन्म-मरण है। इनसे छुटकारा केवल संयम को विशुद्ध रूप में पाकर और मोक्ष प्राप्त करके ही हो सकता है।
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श्री एसएस जैन सभा (रजि.) गांधी मंडी पानीपत के तत्वावधान में सेक्टर-25-2 स्थित सोमाया वैंक्वेट हाल में वीरवार को जैन भागवती दीक्षा समारोह में अंशिका जैन और सूरज कुमार जैन को दीक्षा दी गई। साथ ही दीक्षार्थियों की रथ शोभायात्रा गांधी मंडी से शुरू होकर सोमाया बैंक्वेट हाॅल तक बैंड बाजों व झांकियों के साथ संपूर्ण हुई। मुख्यातिथि दिल्ली से विनय जैन, सभा के अध्यक्ष जगदीश जैन और समाजसेवी विजय जैन तथा सुभाष जैन रहे। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन और सांसद संजय भाटिया राजकीय अतिथि रहे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदेश शर्मा और जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट अमित कादियान भी मौजूद रहे। मुख्य मंच संचालन अमित मुनि महाराज ने किया, वहीं विनय जैन देवबंदी ने काव्य पाठ किया। गायक तरुण मोदी ने भी मनभावन प्रस्तुतियों से सबको आनंदित किया।
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मुझे जैन धर्म सच्चा लगा : सूरज कुमार
दीक्षा के उपरांत संभव मुनि बने सूरज ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक छोटे से गांव से हैं। वे जन्म से जैन नहीं हैं बल्कि उन्होंने कभी जैन मुनियों को देखा भी नहीं था। वे सीनियर सेकेंडरी की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली भाई के पास आए थे। वहां स्थानकवासी संतों को देखा। उनके बारे में जानने की जिज्ञासा ओजस्वी वक्ता रमेश मुनि महाराज तक ले आई, जिसके बाद उन्हें जैन सच्चा धर्म लगा। उन्होंने उसी दिन सच्चा साधु बनने का संकल्प लिया।
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छोटी सी उम्र में जाना संसार खारा है : अंशिका
दीक्षा के उपरांत साध्वी अंशिमा बनी अंशिका ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से जैन संतों की शरण में है। इस दौरान उनमें हर रोज इस मार्ग पर आने की भावना बलवती होती गई। उनके सगे भाई भी जैन संत हैं। उनको अतिशय मुनि महाराज के नाम से जाना जाता है। उनका कहना है कि मैने छोटी ही उम्र से यह देखा के संसार खारा है। इसमें विभिन्न प्रकार के दुख हैं। रोग, बुढ़ापा, जन्म-मरण है। इनसे छुटकारा केवल संयम को विशुद्ध रूप में पाकर और मोक्ष प्राप्त करके ही हो सकता है।