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Panipat News: तेज धूप और गर्मी से पशु बेहाल, घटा दूध उत्पादन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2024 06:17 AM IST
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Animals suffering due to strong sunlight and heat, milk production reduced
पानीपत। इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। जिले में अधिकतम तापमान 44 डिग्री तक पहुंच चुका है।तापमान में वृद्धि के चलते दुधारू पशुओं का दूध 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो गया है। गर्मी व लू से पशु चारे का संकट भी गहरा गया है। गर्मी में हरे चारे पानी आदि की कमी के चलते दुधारू पशुओं ने दूध देना कम कर दी है। इससे पशुपालक चिंतित है।
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आलम यह है कि जो भैंस 10 लीटर दूध देती थी, गर्मी के चलते उसका दूध सात लीटर तक रह गया है। वहीं, धूप व लू लगने से पशुओं में तनाव देखा जा रहा है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में पशु खाना कम कर देते हैं। ऐसी स्थिति में दूध में भी कमी आ जाती है। धूप और लू से पशुओं में बीमारियां होने की आशंका भी बना रहता है। ऐसे में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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गर्मी में खेतों में पशुचारे का संकट
गर्मी के कारण खेतों में हरे पशुचारें का संकट बढ़ गया है। मई-जून में ज्यादा गर्मी व बारिश न होने से खेतों में हरे चारे की कमी हो जाती है। इन दिनों खेतों में पशुचारा न के बराबर है। पशुपालक अपने पशुओं को सूखा भूस खिलाने को मजबूर हैं। वहीं, पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को पशुओं के लिए प्रोटीन, फाइबर, चौकर आदि से युक्त खल-बांड देने की सलाह दी है। कुछ पशुपालक पशुओं को सरसों का तेल पिला रहे हैं।
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लू से हीट स्ट्रोक का खतरा

पूर्व पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि इन दिनों तपिश बढ़ने और लू चलने से पशुओं में हीट स्ट्रोक की आशंका है। हीट स्ट्रोक से पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना-पीना बंद कर देता है। पशु के सांस लेने की व नाड़ी की गति तेज हो जाती है। पशुओं में यह दशा रूक-रूककर यदि दो महीने से अधिक समय तक बनी रहती है तो पशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तो वह हांफने लगता है और वह बेहोश हो जाता है। ठीक से उपचार न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है। इसलिए पशुओं को पशुपालक ज्यादा देर तक धूप न रहने दें। समय-समय पर चारा पानी देकर छाया में ही बांधे।





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गर्मी में ऐसे करे पशुओं का बचाव

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. संजय अंतिल ने बताया कि पशुओं को लू से बचाने के लिए धूप में न जाने दें, बार-बार पानी पिलाएं। दिन में दो बार सुबह और शाम जरूर नहलाएं। थोड़े-थोड़े अंतराल पर खिलाएं। पशुओं को पेड़ों के नीचे अधिक देर तक न बांधे। पशुशाला पक्की है तो छत पर सूखी घास रखें, जिससे छत ठंडी रहे। टिनशेड और कम ऊंचाई की पक्की छत के नीचे पशुओं को बांधने से बचें। सूखे चारे की अपेक्षा हरे चारे का अधिक इस्तेमाल करें। समय-समय पर बीमारी से बचाव का टीका लगवाएं। समय-समय पर पशुओं को नहलाना, हरा चारा, पानी मिलता रहे तो दूध उत्पादन में कमी नहीं आ सकती।
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