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सीरो लॉजिकल सर्वे की तर्ज पर होगा एनीमया का सर्वे
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पानीपत। सरकार प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए एक सर्वे करेगी। एनीमिया का सर्वे सीरोलॉजिकल सर्वे की तर्ज पर होगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम अलग-अलग कैटेगरी के बच्चों व युवाओं के खून के सैंपल लेकर हीमोग्लोबिन की मात्रा की जांच करेगी। ये रिपोर्ट आने के बाद विभाग बड़े स्तर पर एनीमिया के खिलाफ अभियान चलाएगा।
फिलहाल पानीपत स्वास्थ्य विभाग के सामने एनीमिया ही बड़ी चुनौती है। खून की कमी के कारण जिले में लगभग 10 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। विभाग कुपोषण को खत्म करने के लिए कई अभियान चला चुका है, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। एनीमिया मुक्त भारत के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से शहर और गांवों में एनिमिक तलाशे जाएंगे। सीरो सर्वे की तर्ज पर क्लस्टर बनाए जाएंगे। एनीमिया की जांच, उपचार व बचाव पर यह अभियान आधारित होगा। पांच साल तक बच्चों को आयरन सिरप, 6-9 साल तक के बच्चों को गुलाबी गोली, 10-19 साल तक के किशोरों को नीली गोली, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाल गोली व कम वजन वाली लड़कियों को लाल गोली खिलाई जाएगी। जिले की 60 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। नतीजा प्री मैच्योर डिलीवरी की संख्या बढ़ गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो रोज औसतन तीन शिशु प्री मैच्योर पैदा हो रहे हैं। यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
सीरो लॉजिकल सर्वे की तर्ज पर चलेगा अभियान : डॉ. वर्मा
एनीमिया बहुत गंभीर विषय है। इस बार एनीमिया मुक्त प्रदेश करने के लिए सरकार ने एनीमिया का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसमें हर वर्ग के बच्चों एवं युवाओं के खून के सैंपल लिए जाएंगे। इसी रिपोर्ट के आधार अभियान चलेगा।
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- डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।
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फिलहाल पानीपत स्वास्थ्य विभाग के सामने एनीमिया ही बड़ी चुनौती है। खून की कमी के कारण जिले में लगभग 10 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। विभाग कुपोषण को खत्म करने के लिए कई अभियान चला चुका है, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। एनीमिया मुक्त भारत के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से शहर और गांवों में एनिमिक तलाशे जाएंगे। सीरो सर्वे की तर्ज पर क्लस्टर बनाए जाएंगे। एनीमिया की जांच, उपचार व बचाव पर यह अभियान आधारित होगा। पांच साल तक बच्चों को आयरन सिरप, 6-9 साल तक के बच्चों को गुलाबी गोली, 10-19 साल तक के किशोरों को नीली गोली, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाल गोली व कम वजन वाली लड़कियों को लाल गोली खिलाई जाएगी। जिले की 60 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। नतीजा प्री मैच्योर डिलीवरी की संख्या बढ़ गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो रोज औसतन तीन शिशु प्री मैच्योर पैदा हो रहे हैं। यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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सीरो लॉजिकल सर्वे की तर्ज पर चलेगा अभियान : डॉ. वर्मा
एनीमिया बहुत गंभीर विषय है। इस बार एनीमिया मुक्त प्रदेश करने के लिए सरकार ने एनीमिया का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसमें हर वर्ग के बच्चों एवं युवाओं के खून के सैंपल लिए जाएंगे। इसी रिपोर्ट के आधार अभियान चलेगा।
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- डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत।