{"_id":"5e3b1bf38ebc3ee61845c81e","slug":"again-delay-monkey-arrest-tendar-in-panipat-panipat-news-knl21083498","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम अधिकारियों की लेटलतीफी और आयुक्त की गैर मौजूदगी से नहीं खुला टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम अधिकारियों की लेटलतीफी और आयुक्त की गैर मौजूदगी से नहीं खुला टेंडर
विज्ञापन
नगर निगम द्वारा निकाले गए बंदर पकड़ने के टेंडर पर एक बार फिर से ग्रहण लग सकता है। बुधवार को भी निगम आयुक्त की गैर मौजूदगी और निगम अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण भी टेंडर की फाइनेंशियल बिड नहीं खुल सकी। हालांकि मंगलवार शाम को पांच बजे टेंडर का समय पूरा हो चुुका है, जिसमें दो फर्मों ने पूरे दस्तावेजों के साथ आवेदन भी किया था, इसे बुधवार सुबह खोले जाने की बात भी कही गई थी, लेकिन बुधवार पूरा दिन अधिकारियों की व्यस्तता और आयुक्त की गैर मौजूदगी होने के कारण फाइनेंशियल बिड को नहीं खोली जा सकी। बता दें कि अभी तक टेंडर टेक्निकल बिड के चरण को भी पूरा नहीं कर पाया है। बुधवार शाम तक देवी लाल कॉम्प्लेक्स से टेंडर फाइल पालिका बाजार निगम कार्यालय में पहुंची है।
बताया जा रहा है कि दोनों फर्मों ने टेंडर लेने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तो पूरे कर लिए हैं, लेकिन फर्मों के आवश्यक अनुुुभव प्रमाण पत्र अभी तक नहीं मिल पाए हैं। आवेदक फर्मों ने इनकी जगह निगम और पालिकाओं से टेंडर प्राप्त किए गए वर्क आर्डरों की प्रति को फाइल में संलग्न किया हुआ है, जबकि टेंडर की शर्तों में फर्मों से केवल आवश्यक दस्तावेजों की डिमांड की गई थी। वहीं, पिछली बार भी टेंडर अलॉट न किए जाने का भी यही कारण रहा था कि फर्मों से मांगे गए दस्तावेज पूरे नहीं हो पाए थे।
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि टेक्निकल चरण पूरा होने के बाद ही फाइल को निगम आयुक्त के पास फाइनेंशियल बिड के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद आयुक्त के आदेशों के बाद ही टेंडर के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया जाना है। इस प्रक्रिया में दो से तीन दिन का समय भी लग सकता है। निगम आयुक्त के 31 जनवरी को रिटायरमेंट होने के बाद उनकी 6 माह के लिए निदेशालय द्वारा एक्सटेंशन तो कर दी गई है, लेकिन अभी तक उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला है। चर्चा में है कि आयुक्त वीरवार को निगम कार्यालय में पदभार संभाल सकते हैं, जिसके बाद टेंडर की आगामी कार्रवाई को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, पिछले वर्क ऑर्डर पर टेंडर अलॉट किया जाना है या नहीं ये भी निगम आयुक्त की सहमति के बाद ही संभव हो पाएगा।
विज्ञापन
इन दस्तावेजों की थी मांग जो फर्मों ने किए प्रस्तुत
बंदर पकड़ने के लिए टेंडर के लिए इन दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिनमें धरोहर राशि, आईटीआर, पैन कार्ड, आधार कार्ड, एक्सपीरियंस लेटर के साथ सत्यापित शपथ पत्र भी शामिल थे। दोनों फर्मों ने सभी दस्तावेज तो पूरे किए हैं, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र की जगह पिछले कामों के वर्क आर्डर को संलग्न कर दिया है, जबकि निगम की हिदायतों में इस टेंडर के लिए अनुभव प्रमाण पत्र उसे माना जाता है जो किसी नगर निगम, पालिका या संस्था ने फर्म को उसके काम से संतुष्ट होकर संतुष्टि पत्र दिया हो, क्योंकि कुछ फर्म इस काम को बीच में ही छोड़ देती हैं, जिससे निगम को पूरा आश्वासन नहीं मिल पाता कि फर्म ने पिछला काम किस स्तर पर किया था।
सीएसआई ब्रांच में भेजी जा चुकी है फाइल
नियमानुसार ये काम निगम की सीएसआई ब्रांच का है, इसलिए फाइल को टेक्निकल औपचारिकताओं और दस्तावेजों की जांच के लिए सीएसआई में भेजा गया है। वहां से फाइल वापस मिलने के बाद टेंडर फाइल को निगम आयुक्त के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद वे फाईनेंशियल बिड खोलेंगे।
-नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि दोनों फर्मों ने टेंडर लेने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तो पूरे कर लिए हैं, लेकिन फर्मों के आवश्यक अनुुुभव प्रमाण पत्र अभी तक नहीं मिल पाए हैं। आवेदक फर्मों ने इनकी जगह निगम और पालिकाओं से टेंडर प्राप्त किए गए वर्क आर्डरों की प्रति को फाइल में संलग्न किया हुआ है, जबकि टेंडर की शर्तों में फर्मों से केवल आवश्यक दस्तावेजों की डिमांड की गई थी। वहीं, पिछली बार भी टेंडर अलॉट न किए जाने का भी यही कारण रहा था कि फर्मों से मांगे गए दस्तावेज पूरे नहीं हो पाए थे।
विज्ञापन
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि टेक्निकल चरण पूरा होने के बाद ही फाइल को निगम आयुक्त के पास फाइनेंशियल बिड के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद आयुक्त के आदेशों के बाद ही टेंडर के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया जाना है। इस प्रक्रिया में दो से तीन दिन का समय भी लग सकता है। निगम आयुक्त के 31 जनवरी को रिटायरमेंट होने के बाद उनकी 6 माह के लिए निदेशालय द्वारा एक्सटेंशन तो कर दी गई है, लेकिन अभी तक उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला है। चर्चा में है कि आयुक्त वीरवार को निगम कार्यालय में पदभार संभाल सकते हैं, जिसके बाद टेंडर की आगामी कार्रवाई को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। वहीं, पिछले वर्क ऑर्डर पर टेंडर अलॉट किया जाना है या नहीं ये भी निगम आयुक्त की सहमति के बाद ही संभव हो पाएगा।
विज्ञापन
इन दस्तावेजों की थी मांग जो फर्मों ने किए प्रस्तुत
बंदर पकड़ने के लिए टेंडर के लिए इन दस्तावेजों की मांग की गई थी, जिनमें धरोहर राशि, आईटीआर, पैन कार्ड, आधार कार्ड, एक्सपीरियंस लेटर के साथ सत्यापित शपथ पत्र भी शामिल थे। दोनों फर्मों ने सभी दस्तावेज तो पूरे किए हैं, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र की जगह पिछले कामों के वर्क आर्डर को संलग्न कर दिया है, जबकि निगम की हिदायतों में इस टेंडर के लिए अनुभव प्रमाण पत्र उसे माना जाता है जो किसी नगर निगम, पालिका या संस्था ने फर्म को उसके काम से संतुष्ट होकर संतुष्टि पत्र दिया हो, क्योंकि कुछ फर्म इस काम को बीच में ही छोड़ देती हैं, जिससे निगम को पूरा आश्वासन नहीं मिल पाता कि फर्म ने पिछला काम किस स्तर पर किया था।
सीएसआई ब्रांच में भेजी जा चुकी है फाइल
नियमानुसार ये काम निगम की सीएसआई ब्रांच का है, इसलिए फाइल को टेक्निकल औपचारिकताओं और दस्तावेजों की जांच के लिए सीएसआई में भेजा गया है। वहां से फाइल वापस मिलने के बाद टेंडर फाइल को निगम आयुक्त के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद वे फाईनेंशियल बिड खोलेंगे।
-नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।