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Panipat News: भाषण प्रतियोगिता में महाराना राजकीय स्कूल की अदिति प्रथम
Sun, 16 Nov 2025 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 16 Nov 2025 02:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। खंड स्तरीय गीता जयंती महोत्सव में राजकीय माध्यमिक विद्यालय महराना की छात्रा अदिति ने भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। अदिति ने अपने भाषण में गीता से उसने क्या-क्या सीखा और उससे उसके जीवन में क्या बदलाव आए पर विचार प्रस्तुत किए। वहीं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में हरिशरण, पुष्पेंद्र, दक्ष ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। श्लोक उच्चारण में दीपांशी और निबंध लेखन में रजविंद्र को सांत्वना पुरस्कार मिला।
मुख्याध्यापिका नीता ने विजेता विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी को गीता के उपदेशानुसार अपने कर्म अर्थात अपनी पढ़ाई को ही अपनी पूजा बना लेना चाहिए। अगर हम अपने काम को पूरी निष्ठा, लगन, ईमानदारी के साथ करेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने कहा कि गीता सिर्फ एक ग्रंथ नहीं है अपितु यह जीवन का सार है। यह हमें अंधेरे से उजाले, निराशा से आशा तथा अज्ञानता से ज्ञान की ओर लेकर जाती है। उन्होंने बताया कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म करने और फल की इच्छा न करने की प्रेरणा दी है। इस अवसर पर रामपाल शास्त्री, राजेश, रिंकू, पूनम, सीमा, सिल्की व रमा मौजूद रही।
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पानीपत। खंड स्तरीय गीता जयंती महोत्सव में राजकीय माध्यमिक विद्यालय महराना की छात्रा अदिति ने भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। अदिति ने अपने भाषण में गीता से उसने क्या-क्या सीखा और उससे उसके जीवन में क्या बदलाव आए पर विचार प्रस्तुत किए। वहीं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में हरिशरण, पुष्पेंद्र, दक्ष ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। श्लोक उच्चारण में दीपांशी और निबंध लेखन में रजविंद्र को सांत्वना पुरस्कार मिला।
मुख्याध्यापिका नीता ने विजेता विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी को गीता के उपदेशानुसार अपने कर्म अर्थात अपनी पढ़ाई को ही अपनी पूजा बना लेना चाहिए। अगर हम अपने काम को पूरी निष्ठा, लगन, ईमानदारी के साथ करेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने कहा कि गीता सिर्फ एक ग्रंथ नहीं है अपितु यह जीवन का सार है। यह हमें अंधेरे से उजाले, निराशा से आशा तथा अज्ञानता से ज्ञान की ओर लेकर जाती है। उन्होंने बताया कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म करने और फल की इच्छा न करने की प्रेरणा दी है। इस अवसर पर रामपाल शास्त्री, राजेश, रिंकू, पूनम, सीमा, सिल्की व रमा मौजूद रही।
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