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टुंडा के खिलाफ छह ने दी गवाही
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Wed, 04 Jun 2014 10:15 PM IST
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में बहुचर्चित बस बम धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के खिलाफ छह गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए।
वहीं, बचाव पक्ष में दो और वकील आ गए और उन्होंने गवाहों से सवाल-जवाब किए। अदालत ने गवाहों को सुनकर अगली सुनवाई 31 जुलाई को तय की है। इस दौरान अदालत परिसर और उसके आसपास भारी पुलिसबल तैनात रहा।
जिला और दिल्ली पुलिस सहकारी समिति की बस में धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को बुधवार को भारी सुरक्षा के बीच लेकर जिला अदालत में पहुंची।
उसे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह की अदालत में पेश किया गया। अदालत के सामने करीब पौने दो घंटे में 11 में से छह गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए और एक गवाह का नाम गलत होने के चलते वापस भेज दिया।
अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील व गवाहों के बयान सुनते ही मामले की अगली तारीख 31 जुलाई तय कर दी।
गवाहों में कई पुलिसकर्मी और एक फोटोग्राफर
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में बुधवार को 11 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने थे, लेकिन इनमें से सात गवाह मौजूद हुए। इनमें से छह के बयान दर्ज किए गए और एक गवाह का नाम गलत होने पर वापस भेज दिया। अदालत के सूत्रों की मानें तो बुधवार को जाटल रोड निवासी पालेराम, कालखा निवासी सुलतान, सेवानिवृत्त एएसआई आजाद (तत्कालीन सिपाही), फोटोग्राफर कुलदीप, उपायुक्त कार्यालय के रीडर दयाशंकर, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर रामपाल (तत्कालीन एमएससी) के बयान दर्ज किए गए। इनके साथ पुलिसकर्मी रणजीत सिंह भी अदालत में पहुंचे, लेकिन अदालत ने रणजीत की जगह रणधीर के बयान होने की बात कही। इसके चलते रणजीत सिंह को वापस भेज दिया गया, जबकि अदालत के सामने नीलम, सुरेंद्र, सुनीता व सिवाही सुरेंद्र पेश नहीं हो सके।
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टुंडा के बचाव में दो नए वकील आए
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के बचाव में दो वकील और आ गए हैं। इससे पहले जिला अदालत के वकील सुलतान सिंह खर्ब उनकी पैरवी कर रहे थे। बुधवार को अब्दुल करीम के साथ वकील विनीत और नरेंद्र कुमार भी पहुंचे। दोनों वकीलों ने सभी गवाहों से सवाल-जवाब किए और अब्दुल करीम उर्फ टुंडा का इस मामले में बचाव किया। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील को बारीकी से सुना।
ये है मामला
एक फरवरी 1997 को पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की एक बस में ब्लास्ट हुआ था। ब्लास्ट में मतलौडा के गांव कालखा निवासी 10 वर्षीय माडू की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग घायल हो गए थे। थाना शहर पुलिस ने इसमें अज्ञातों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। जिला पुलिस इस मामले का खुलासा नहीं कर सकी थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने गत वर्ष नेपाल बोर्डर से अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को काबू किया था। उसने पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की बस में धमाका करना कबूला था।
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वहीं, बचाव पक्ष में दो और वकील आ गए और उन्होंने गवाहों से सवाल-जवाब किए। अदालत ने गवाहों को सुनकर अगली सुनवाई 31 जुलाई को तय की है। इस दौरान अदालत परिसर और उसके आसपास भारी पुलिसबल तैनात रहा।
जिला और दिल्ली पुलिस सहकारी समिति की बस में धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को बुधवार को भारी सुरक्षा के बीच लेकर जिला अदालत में पहुंची।
उसे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह की अदालत में पेश किया गया। अदालत के सामने करीब पौने दो घंटे में 11 में से छह गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए और एक गवाह का नाम गलत होने के चलते वापस भेज दिया।
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अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील व गवाहों के बयान सुनते ही मामले की अगली तारीख 31 जुलाई तय कर दी।
गवाहों में कई पुलिसकर्मी और एक फोटोग्राफर
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में बुधवार को 11 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने थे, लेकिन इनमें से सात गवाह मौजूद हुए। इनमें से छह के बयान दर्ज किए गए और एक गवाह का नाम गलत होने पर वापस भेज दिया। अदालत के सूत्रों की मानें तो बुधवार को जाटल रोड निवासी पालेराम, कालखा निवासी सुलतान, सेवानिवृत्त एएसआई आजाद (तत्कालीन सिपाही), फोटोग्राफर कुलदीप, उपायुक्त कार्यालय के रीडर दयाशंकर, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर रामपाल (तत्कालीन एमएससी) के बयान दर्ज किए गए। इनके साथ पुलिसकर्मी रणजीत सिंह भी अदालत में पहुंचे, लेकिन अदालत ने रणजीत की जगह रणधीर के बयान होने की बात कही। इसके चलते रणजीत सिंह को वापस भेज दिया गया, जबकि अदालत के सामने नीलम, सुरेंद्र, सुनीता व सिवाही सुरेंद्र पेश नहीं हो सके।
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टुंडा के बचाव में दो नए वकील आए
अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के बचाव में दो वकील और आ गए हैं। इससे पहले जिला अदालत के वकील सुलतान सिंह खर्ब उनकी पैरवी कर रहे थे। बुधवार को अब्दुल करीम के साथ वकील विनीत और नरेंद्र कुमार भी पहुंचे। दोनों वकीलों ने सभी गवाहों से सवाल-जवाब किए और अब्दुल करीम उर्फ टुंडा का इस मामले में बचाव किया। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील को बारीकी से सुना।
ये है मामला
एक फरवरी 1997 को पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की एक बस में ब्लास्ट हुआ था। ब्लास्ट में मतलौडा के गांव कालखा निवासी 10 वर्षीय माडू की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग घायल हो गए थे। थाना शहर पुलिस ने इसमें अज्ञातों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। जिला पुलिस इस मामले का खुलासा नहीं कर सकी थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने गत वर्ष नेपाल बोर्डर से अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को काबू किया था। उसने पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की बस में धमाका करना कबूला था।