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सरकारी अस्पताल में आंखों के सब मर्जों की एक ही दवा
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Sun, 10 Jan 2016 12:11 AM IST
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सरकारी अस्पताल में आंखों के सब मर्जों की एक ही दवा है। यहां आंखों की बीमारी ठीक होने की आस लगाकर आने वाले मरीजों को उल्टी बीमारी लग रही है।
अस्पताल के डॉक्टर भी अस्पताल में दवा नहीं होने की कहकर एक ही दवा लिख रहे हैं। वे इसे अपनी मजबूरी बता रहे हैं। डॉक्टर इस बारे में आला डॉक्टरों को भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन वहां से डेढ़ माह से केवल आश्वासन मिल रहा है।
अपनी अव्यवस्था को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सिविल अस्पताल से अब डाक्टरों की ओर से मरीजों को गुमराह करने का मामला प्रकाश में आया है।
दरअसल डाक्टर जान बुझकर नहीं बल्कि मजबूरन मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। आंखों में दर्द हो, आंखों से पानी गिर रहा हो, आंखों में खुजली हो, आंखों में सूजन हो, कम दिखता हो कैसी भी बीमारी हो।
इन सबके लिए वह ड्रोप दी जा रही है जो सिर्फ आंखों में चुभन होने पर काम आती है। ऐसा डाक्टर अनजाने में नहीं बल्कि मजबूरन कर रहे हैं। सिविल अस्पताल में पिछले डेढ़ माह से आंखों की दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।
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यह है परेशानी
सिविल अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर सिर्फ ओक्सीबर फ्लूरबीप्रोफन और एंटी एलर्जिक जिनुला ही उपलब्ध है। एंटी एलर्जिक जिनुला के इस्तेमाल से मरीजों को एलर्जी हो रही है।
ऐसे में मरीज को हर बीमारी में ओक्सीबर फ्लूरबीप्रोफन ही दी जा रही है। जबकि यह सिर्फ आंखों में चुभन होने पर ही कारगर है। इनके अलावा एंटीबायोटिक ड्रोप भी मरीजों के लिए अति आवश्यक है। एंटीबोयोटिक तो मरीजों को बाहर से ही खरीदनी पड़ती है। आंखों के डाक्टर का कहना है कि उनको तो अब अपने दफ्तर में बैठने में भी शर्म आने लगी है।
हर रोज 90 से अधिक मरीज आते हैं
सिविल अस्पताल में हर रोज आंखों की बीमारी के 90 से अधिक मरीज आते हैं। जिनमें आंखों में मोतियाबिंद, आंखों में एलर्जी, खुजली, सूजन, दर्द, पानी गिरना और कम दिखना आदि शामिल है। इन सभी रोगों की दवाइयां सिविल अस्पताल में नहीं है। इन सभी रोगियों को डाक्टरों के द्वारा वह दवाई दी जा रही है, जो इन रोगों के लिए है ही नहीं।
जमीर गवाही नहीं देता
सिविल अस्पताल की आंखों की चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में पिछले डेढ़ माह से दवाइयां नहीं हैं। कई बार सिविल अस्पताल के आला चिकित्सकों से इस बारे में शिकायत कर चुके हैं।
उनको मजबूरन मरीजों को वह दवाईं देनी पड़ रही है जो उस बीमारी के लिए है ही नहीं। उनको पता है कि जो दवाई वह मरीज को दे रही हैं उससे मरीज को कोई फायदा नहीं होगा।
मरीजों को गुमराह करने के लिए अब उनका जमीर उन्हें गवाही नहीं देता। उनको मरीजों को चैक करने में भी शर्म आ रही है। सिविल अस्पताल में आंखों की जांच के लिए दूर-दूर से बुजुर्ग आते हैं। अधिकतर बुजुर्गों को मोतियाबिंद की बीमारी है। मोतिया बिंद की दवाई सिविल अस्पताल में मौजूद नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों को आंखों में खुजली की दवाई देकर गुमराह करना डाक्टरों की मजबूरी बन गया है।
सत्ता बदली व्यवस्था नहीं
सिविल अस्पताल में आंखों के इलाज के लिए गढ़ सरनाई के रणधीर, नूरवाला के जयप्रकाश, नांगल खेड़ी के कर्णसिंह, उझा के रामस्वरूप ने बताया कि वह आंखों की जांच के लिए सिविल अस्पताल में आए है। आंखों की दवाई सिविल अस्पताल में है ही नहीं।
डाक्टर ने दवाई बाहर की लिख दी। उन्हें बाहर से दवाई लेनी पड़ेगी तो सरकारी और निजी अस्पताल में क्या फर्क रह गया। राज्य में सिर्फ सत्ता बदली है, व्यवस्था नहीं। आज भी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के वो ही हालात है, जो पांच साल पहले थे।
एक दवा से एलर्जी हो रही है शिकायत के बाद भी बंद नहीं
सिविल अस्पताल में आंखों के लिए एंटी एर्जिक जिनुला उपलब्ध है। इसके इस्तेमाल से मरीजों को एलर्जी हो रही है। कई मरीजों ने इस्तेमाल के बाद इसकी शिकायत उन्हें की है। उन्होंने इस बारे में आला चिकित्सकों को अवगत करवाया है। बावजूद इसके भी ऊपर से यही दवाई भेजी जा रही है।
एमडी के साथ मीटिंग में भी दवाइयाें की कमी की बात रखी थी। एमडी ने उन्हें जल्द दवाइयां मुहैया करवाने की बात कही थी। वेयर हाउस में ही दवाइयों की कमी है। उम्मीद है कि जल्द सिविल अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्हें मरीजों और डाक्टरों को होने वाली परेशानी का अहसास है।
डॉ. एसके.गुप्ता, एमएस सिविल अस्पताल पानीपत।
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अस्पताल के डॉक्टर भी अस्पताल में दवा नहीं होने की कहकर एक ही दवा लिख रहे हैं। वे इसे अपनी मजबूरी बता रहे हैं। डॉक्टर इस बारे में आला डॉक्टरों को भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन वहां से डेढ़ माह से केवल आश्वासन मिल रहा है।
अपनी अव्यवस्था को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सिविल अस्पताल से अब डाक्टरों की ओर से मरीजों को गुमराह करने का मामला प्रकाश में आया है।
दरअसल डाक्टर जान बुझकर नहीं बल्कि मजबूरन मरीजों को गुमराह कर रहे हैं। आंखों में दर्द हो, आंखों से पानी गिर रहा हो, आंखों में खुजली हो, आंखों में सूजन हो, कम दिखता हो कैसी भी बीमारी हो।
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इन सबके लिए वह ड्रोप दी जा रही है जो सिर्फ आंखों में चुभन होने पर काम आती है। ऐसा डाक्टर अनजाने में नहीं बल्कि मजबूरन कर रहे हैं। सिविल अस्पताल में पिछले डेढ़ माह से आंखों की दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।
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यह है परेशानी
सिविल अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर सिर्फ ओक्सीबर फ्लूरबीप्रोफन और एंटी एलर्जिक जिनुला ही उपलब्ध है। एंटी एलर्जिक जिनुला के इस्तेमाल से मरीजों को एलर्जी हो रही है।
ऐसे में मरीज को हर बीमारी में ओक्सीबर फ्लूरबीप्रोफन ही दी जा रही है। जबकि यह सिर्फ आंखों में चुभन होने पर ही कारगर है। इनके अलावा एंटीबायोटिक ड्रोप भी मरीजों के लिए अति आवश्यक है। एंटीबोयोटिक तो मरीजों को बाहर से ही खरीदनी पड़ती है। आंखों के डाक्टर का कहना है कि उनको तो अब अपने दफ्तर में बैठने में भी शर्म आने लगी है।
हर रोज 90 से अधिक मरीज आते हैं
सिविल अस्पताल में हर रोज आंखों की बीमारी के 90 से अधिक मरीज आते हैं। जिनमें आंखों में मोतियाबिंद, आंखों में एलर्जी, खुजली, सूजन, दर्द, पानी गिरना और कम दिखना आदि शामिल है। इन सभी रोगों की दवाइयां सिविल अस्पताल में नहीं है। इन सभी रोगियों को डाक्टरों के द्वारा वह दवाई दी जा रही है, जो इन रोगों के लिए है ही नहीं।
जमीर गवाही नहीं देता
सिविल अस्पताल की आंखों की चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में पिछले डेढ़ माह से दवाइयां नहीं हैं। कई बार सिविल अस्पताल के आला चिकित्सकों से इस बारे में शिकायत कर चुके हैं।
उनको मजबूरन मरीजों को वह दवाईं देनी पड़ रही है जो उस बीमारी के लिए है ही नहीं। उनको पता है कि जो दवाई वह मरीज को दे रही हैं उससे मरीज को कोई फायदा नहीं होगा।
मरीजों को गुमराह करने के लिए अब उनका जमीर उन्हें गवाही नहीं देता। उनको मरीजों को चैक करने में भी शर्म आ रही है। सिविल अस्पताल में आंखों की जांच के लिए दूर-दूर से बुजुर्ग आते हैं। अधिकतर बुजुर्गों को मोतियाबिंद की बीमारी है। मोतिया बिंद की दवाई सिविल अस्पताल में मौजूद नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों को आंखों में खुजली की दवाई देकर गुमराह करना डाक्टरों की मजबूरी बन गया है।
सत्ता बदली व्यवस्था नहीं
सिविल अस्पताल में आंखों के इलाज के लिए गढ़ सरनाई के रणधीर, नूरवाला के जयप्रकाश, नांगल खेड़ी के कर्णसिंह, उझा के रामस्वरूप ने बताया कि वह आंखों की जांच के लिए सिविल अस्पताल में आए है। आंखों की दवाई सिविल अस्पताल में है ही नहीं।
डाक्टर ने दवाई बाहर की लिख दी। उन्हें बाहर से दवाई लेनी पड़ेगी तो सरकारी और निजी अस्पताल में क्या फर्क रह गया। राज्य में सिर्फ सत्ता बदली है, व्यवस्था नहीं। आज भी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के वो ही हालात है, जो पांच साल पहले थे।
एक दवा से एलर्जी हो रही है शिकायत के बाद भी बंद नहीं
सिविल अस्पताल में आंखों के लिए एंटी एर्जिक जिनुला उपलब्ध है। इसके इस्तेमाल से मरीजों को एलर्जी हो रही है। कई मरीजों ने इस्तेमाल के बाद इसकी शिकायत उन्हें की है। उन्होंने इस बारे में आला चिकित्सकों को अवगत करवाया है। बावजूद इसके भी ऊपर से यही दवाई भेजी जा रही है।
एमडी के साथ मीटिंग में भी दवाइयाें की कमी की बात रखी थी। एमडी ने उन्हें जल्द दवाइयां मुहैया करवाने की बात कही थी। वेयर हाउस में ही दवाइयों की कमी है। उम्मीद है कि जल्द सिविल अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्हें मरीजों और डाक्टरों को होने वाली परेशानी का अहसास है।
डॉ. एसके.गुप्ता, एमएस सिविल अस्पताल पानीपत।