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माडर्न शुगर मिल का खाका तैयार
Panipat
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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पानीपत। शहर के लोगों को जल्द ही शुगर मिल की राख और बदबू से निजात मिल जाएगी। शुगर मिल प्रबंधन ने माडर्न शुगर मिल का खाका तैयार कर लिया है। गोहाना रोड स्थित शुगर मिल को डाहर गांव में शिफ्ट करने की योजना है। जिस पर 160 से 170 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रबंधन ने शुगर मिल शिफ्ट करने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया है।
पानीपत शुगर मिल और डिस्टलरी गोहाना रोड पर करीब 70 एकड़ जमीन पर है। यहां पर मिल कई दशक से है। गन्ना पेराई सत्र में आसपास की कालोनीवासियों को राख और बदबू से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से शुगर मिल को शिफ्ट करने की योजना चल रही है। जमीन नहीं मिलने और कई क्षेत्र के किसानों के संघर्ष से शिफ्टिंग नहीं हो पाई।
मिली की क्षमता होगी दोगुनी
नई माडर्न शुगर मिल की क्षमता पुराने शुगर मिल की क्षमता से दोगुनी होगी। इस समय शुगर मिल की पेराई कैपेसिटी 18 हजार क्विंटल प्रति दिन है। नए शुगर मिल की पेराई कैपेसिटी की क्षमता बढ़कर 30 से 35 हजार क्विंटल प्रतिदिन हो जाएगी। डाहर गांव में बनने वाली शुगर मिल भी 70 से 72 एकड़ जमीन में होगा। यहां पर मशीनें भी आधुनिक होंगी। अधिकारियों को शुगर मिल शिफ्टिंग की सौगात जल्द मिलेगी।
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अन्यों पर निर्भर होना नहीं पड़ेगा
नई शुगर मिल स्थापित होने के बाद गन्ने की फसल उत्पादक क्षेत्रीय किसानों को दूसरे जिलों के शुगर मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। किसान अपने जिले के मिल में ही अपना पूरा गन्ना डाल सकेंगे। इससे पहले किसानों का पूरा में पेराई नहीं हो पाता था। किसानों को गोहाना और फरमाणा समेत अन्य जिलों के शुगर मिलों में जाना पड़ता है। इससे किसानों में रोष था।
अन्य समस्याओं से मिलेगी निजात
इस समय शुगर मिल क्षेत्र में आसपास की कालोनियों में रहने वाले लोग मिल से आने वाली बदबू और राख से खासा परेशान हैं। लंबे समय से क्षेत्रवासी भी मिल को स्थानांतरित करने की मांग करते आ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि मिल से निकलने वाली राख ने सभी को परेशान कर दिया है। इससे लोगों की आंखों पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा डिस्टलरी से बदबू भी ज्यादा आती है और मच्छर भी ज्यादा पनपते हैं। इससे हमेशा बीमारियों के फैलने का अंदेशा रहता है।
वर्जन
क्षेत्रवासियों को जल्द ही नई माडर्न शुगर मिल का तोहफा मिलने वाला है। इसके लिए खाका तैयार करके सरकार के पास प्रपोजल भेज दिया है। माडर्न मिल तैयार होने के बाद क्षेत्र के किसानों को गन्ना बेचने के लिए क्षेत्र की अन्य मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नए मिल की कैपेसिटी भी दोगुना होगी।
मंजीत सिंह, एमडी शुगर मिल पानीपत
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पानीपत शुगर मिल और डिस्टलरी गोहाना रोड पर करीब 70 एकड़ जमीन पर है। यहां पर मिल कई दशक से है। गन्ना पेराई सत्र में आसपास की कालोनीवासियों को राख और बदबू से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से शुगर मिल को शिफ्ट करने की योजना चल रही है। जमीन नहीं मिलने और कई क्षेत्र के किसानों के संघर्ष से शिफ्टिंग नहीं हो पाई।
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मिली की क्षमता होगी दोगुनी
नई माडर्न शुगर मिल की क्षमता पुराने शुगर मिल की क्षमता से दोगुनी होगी। इस समय शुगर मिल की पेराई कैपेसिटी 18 हजार क्विंटल प्रति दिन है। नए शुगर मिल की पेराई कैपेसिटी की क्षमता बढ़कर 30 से 35 हजार क्विंटल प्रतिदिन हो जाएगी। डाहर गांव में बनने वाली शुगर मिल भी 70 से 72 एकड़ जमीन में होगा। यहां पर मशीनें भी आधुनिक होंगी। अधिकारियों को शुगर मिल शिफ्टिंग की सौगात जल्द मिलेगी।
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अन्यों पर निर्भर होना नहीं पड़ेगा
नई शुगर मिल स्थापित होने के बाद गन्ने की फसल उत्पादक क्षेत्रीय किसानों को दूसरे जिलों के शुगर मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। किसान अपने जिले के मिल में ही अपना पूरा गन्ना डाल सकेंगे। इससे पहले किसानों का पूरा में पेराई नहीं हो पाता था। किसानों को गोहाना और फरमाणा समेत अन्य जिलों के शुगर मिलों में जाना पड़ता है। इससे किसानों में रोष था।
अन्य समस्याओं से मिलेगी निजात
इस समय शुगर मिल क्षेत्र में आसपास की कालोनियों में रहने वाले लोग मिल से आने वाली बदबू और राख से खासा परेशान हैं। लंबे समय से क्षेत्रवासी भी मिल को स्थानांतरित करने की मांग करते आ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि मिल से निकलने वाली राख ने सभी को परेशान कर दिया है। इससे लोगों की आंखों पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा डिस्टलरी से बदबू भी ज्यादा आती है और मच्छर भी ज्यादा पनपते हैं। इससे हमेशा बीमारियों के फैलने का अंदेशा रहता है।
वर्जन
क्षेत्रवासियों को जल्द ही नई माडर्न शुगर मिल का तोहफा मिलने वाला है। इसके लिए खाका तैयार करके सरकार के पास प्रपोजल भेज दिया है। माडर्न मिल तैयार होने के बाद क्षेत्र के किसानों को गन्ना बेचने के लिए क्षेत्र की अन्य मिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नए मिल की कैपेसिटी भी दोगुना होगी।
मंजीत सिंह, एमडी शुगर मिल पानीपत