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जीएसटी के विरोध में उतरे कपड़ा व्यापारी, जीएसटी वापस लेने की मांग
Updated Mon, 12 Jun 2017 09:15 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। कपड़ा व्यापारी जीएसटी के विरोध में खुलकर सड़क पर आ गए। उन्होंने कपड़े पर लगे पांच प्रतिशत जीएसटी को वापस करने की मांग की। व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
न्यू क्लॉथ मार्केट के प्रधान विपिन चुघ की अगुवाई में जवाहर मार्केट, चोड़ा बाजार, हनुमान बाजार समेत शहर के अन्य बाजारों के कपड़ा व्यापारी प्रदर्शन करते हुए सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचे। उन्होंने यहां पर तहसीलदार जीवेंद्र मलिक के मार्फत प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रधान विपिन चुघ और कृष्ण चुघ ने बताया कि कपड़ा व्यक्ति के जन्म से लेकर अंतिम यात्रा तक साथ रहता है। सरकार द्वारा इस कपड़े पर भी पांच प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। कपड़ा व्यापारियों को जीएसटी के दायरे में लाना गंभीर विषय है। सरकार को जीएसटी कपड़े के व्यापार की बजाय मैन्यूफैक्चरिंग पर लगाना चाहिए। जीएसटी के अनुसार हर दस दिन में लेन-देन का हिसाब देना होगा। ऐसे में व्यापारी को माह में तीन बार जीएसटी भरने जाना होगा। वह इन सबके चलते अपनी दुकान को संभाल नहीं पाएगा। उसको इसका हिसाब किताब बनाकर रखने के लिए एक अकाउंटेंट रखना पड़ेगा। ऐसे में एक व्यापारी पर हर साल दो-ढाई लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ जाएगा। इस मौके पर दर्शनलाल बवेजा, इंद्रजीत कथूरिया, अंकित बंसल, मन्नू मौजूद रहे।
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पानीपत। कपड़ा व्यापारी जीएसटी के विरोध में खुलकर सड़क पर आ गए। उन्होंने कपड़े पर लगे पांच प्रतिशत जीएसटी को वापस करने की मांग की। व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
न्यू क्लॉथ मार्केट के प्रधान विपिन चुघ की अगुवाई में जवाहर मार्केट, चोड़ा बाजार, हनुमान बाजार समेत शहर के अन्य बाजारों के कपड़ा व्यापारी प्रदर्शन करते हुए सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचे। उन्होंने यहां पर तहसीलदार जीवेंद्र मलिक के मार्फत प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रधान विपिन चुघ और कृष्ण चुघ ने बताया कि कपड़ा व्यक्ति के जन्म से लेकर अंतिम यात्रा तक साथ रहता है। सरकार द्वारा इस कपड़े पर भी पांच प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। कपड़ा व्यापारियों को जीएसटी के दायरे में लाना गंभीर विषय है। सरकार को जीएसटी कपड़े के व्यापार की बजाय मैन्यूफैक्चरिंग पर लगाना चाहिए। जीएसटी के अनुसार हर दस दिन में लेन-देन का हिसाब देना होगा। ऐसे में व्यापारी को माह में तीन बार जीएसटी भरने जाना होगा। वह इन सबके चलते अपनी दुकान को संभाल नहीं पाएगा। उसको इसका हिसाब किताब बनाकर रखने के लिए एक अकाउंटेंट रखना पड़ेगा। ऐसे में एक व्यापारी पर हर साल दो-ढाई लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ जाएगा। इस मौके पर दर्शनलाल बवेजा, इंद्रजीत कथूरिया, अंकित बंसल, मन्नू मौजूद रहे।
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